
नागौर में उर्वरक कालाबाजारी पर नकेल, कृषि विभाग ने पीओएस से शुरू की स्टॉक जाँच
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हमारे नागौर संवाददाता के अनुसार, रबी सीजन की शुरुआत के साथ ही नागौर जिले में किसानों को समय पर और उचित मूल्य पर उर्वरक उपलब्ध कराने के लिए कृषि विभाग पूरी तरह से मुस्तैद हो गया है। हमारी टीम को मिली जानकारी के अनुसार, जिलेभर में यूरिया और डीएपी जैसे महत्वपूर्ण उर्वरकों की पारदर्शी बिक्री सुनिश्चित करने और किसी भी प्रकार की कालाबाजारी पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान के तहत, अब उर्वरक विक्रेताओं के पास उपलब्ध यूरिया और डीएपी के स्टॉक का मिलान पीओएस (पॉइंट ऑफ सेल) मशीन के माध्यम से किया जा रहा है। यह कदम उर्वरकों की उपलब्धता में पारदर्शिता लाने और उनकी कालाबाजारी की संभावनाओं को जड़ से खत्म करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।
पारदर्शी बिक्री और कालाबाजारी पर लगाम
कृषि विभाग की यह सतर्कता विशेष रूप से रबी फसलों की बुवाई के समय बेहद महत्वपूर्ण है, जब यूरिया और डीएपी की मांग अपने चरम पर होती है। अक्सर, इस अवधि में कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा उर्वरकों की जमाखोरी और मनमानी कीमतों पर बिक्री की शिकायतें मिलती रही हैं, जिससे छोटे और सीमांत किसानों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। इसी समस्या से निपटने के लिए, विभाग ने 'अलर्ट मोड' में काम करना शुरू कर दिया है।
- स्टॉक का ऑनलाइन मिलान: सभी अधिकृत उर्वरक विक्रेताओं को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने पास उपलब्ध यूरिया और डीएपी के स्टॉक को पीओएस मशीनों के माध्यम से ऑनलाइन दर्ज करें। इससे कृषि विभाग को रियल-टाइम में पूरे जिले के उर्वरक स्टॉक की जानकारी मिल सकेगी।
- कालाबाजारी पर निगरानी: पीओएस मशीन से बिक्री अनिवार्य होने के कारण, हर किसान को आधार कार्ड के माध्यम से ही उर्वरक बेचे जाते हैं, जिससे एक ही व्यक्ति द्वारा बड़ी मात्रा में उर्वरक खरीदकर जमाखोरी करने की संभावना खत्म हो जाती है। यह प्रणाली कालाबाजारी पर प्रभावी रूप से लगाम कसने में सहायक सिद्ध हो रही है।
- किसान हितैषी कदम: इस पहल का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सरकार द्वारा निर्धारित दरों पर ही किसानों को पर्याप्त मात्रा में उर्वरक उपलब्ध हों और उन्हें बिचौलियों के शोषण से बचाया जा सके।
निरीक्षण और सख्त कार्रवाई के निर्देश
कृषि विभाग के अधिकारी लगातार जिले के विभिन्न हिस्सों में उर्वरक वितरण केंद्रों और दुकानों का औचक निरीक्षण कर रहे हैं। हमारी टीम को बताया गया है कि इन निरीक्षणों के दौरान, पीओएस मशीनों के उपयोग की स्थिति, स्टॉक रजिस्टर का रखरखाव और किसानों को बेचे जा रहे उर्वरकों की कीमतों की जांच की जा रही है। किसी भी प्रकार की अनियमितता पाए जाने पर संबंधित विक्रेता के खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई करने के निर्देश जारी किए गए हैं, जिसमें लाइसेंस रद्द करने से लेकर कानूनी कार्रवाई तक शामिल हो सकती है।
हमारा मानना है कि इस प्रकार की सक्रिय निगरानी और तकनीकी नवाचार के उपयोग से किसानों को न केवल राहत मिलेगी, बल्कि कृषि क्षेत्र में पारदर्शिता भी बढ़ेगी। कृषि विभाग का यह कदम नागौर जिले में रबी सीजन की बंपर पैदावार सुनिश्चित करने की दिशा में एक सराहनीय प्रयास है, जो किसानों के लिए एक अनुकूल माहौल तैयार कर रहा है।
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Written & Verified By
नागौर के युवा पत्रकार और डिजिटल मीडिया विशेषज्ञ। अभिषेक जी को ग्रामीण विकास और स्थानीय समस्याओं के सटीक विश्लेषण का गहरा अनुभव है।