
खींवसर: पंचायत समिति की घोषणा नौ माह बाद भी जमीनहीन, विकास ठप
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खींवसर क्षेत्र के पांचौड़ी कस्बे को पंचायत समिति का दर्जा मिले नौ माह बीत चुके हैं, लेकिन आज तक इसके लिए जमीन का चयन नहीं हो सका है। उपतहसील का दर्जा मिलने के करीब 45 महीने बाद भी उसके स्थायी भवन का निर्माण शुरू नहीं हुआ है। इन प्रशासनिक घोषणाओं के बावजूद धरातल पर लालफीताशाही हावी है, जिसके चलते 25 ग्राम पंचायतों और 11 पटवार मंडलों का कामकाज अस्थायी व्यवस्थाओं के भरोसे चल रहा है।
घोषणाओं के बावजूद जमीनी हकीकत शून्य
पांचौड़ी को 14 जून 2023 को उपतहसील का दर्जा दिया गया था। इसके लिए लगभग 7.5 बीघा जमीन भी आवंटित हो चुकी है, परंतु निर्माण कार्य आज तक शुरू नहीं हुआ है। इसी तरह, फरवरी 2026 में इसे पंचायत समिति का दर्जा प्राप्त हुआ, लेकिन नौ महीने बीतने के बाद भी जमीन का चयन और आवंटन नहीं हो पाया है। इस देरी के कारण पांचौड़ी में प्रस्तावित पंचायत समिति का ढांचा अधर में लटका है।
स्थायी भवन का अभाव, कामकाज प्रभावित
उप-तहसील का कार्य वर्तमान में एक सरकारी भवन में संचालित हो रहा है, जिससे अभिलेखों के रखरखाव और आम जनता की सुविधाओं पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। स्थायी भवन के अभाव में जरूरी व्यवस्थाएं जैसे बैठक कक्ष, कंप्यूटर कक्ष और रिकॉर्ड रूम अपर्याप्त हैं। इससे प्रशासनिक कार्यों में देरी हो रही है और ग्रामीणों को बार-बार चक्कर काटने पड़ रहे हैं। अधिकारियों की अनुपलब्धता और नियमित मॉनिटरिंग का अभाव भी बनी हुई है।
चुनाव संपन्न, लेकिन दफ्तर का पता नहीं
पांचौड़ी पंचायत समिति के अंतर्गत 15 वार्डों के लिए चुनाव संपन्न हो चुके हैं, और सदस्यों के चुने जाने के बाद आगामी दिनों में पहले प्रधान का चुनाव भी होना है। यह स्थिति एक बड़े सवाल को जन्म दे रही है कि यदि प्रधान चुन लिया जाता है, तो उनका कार्यालय कहां स्थापित होगा? बिना भवन और बिना जमीन के, नए प्रधान अपना कामकाज किस व्यवस्था के तहत शुरू करेंगे, इसका जवाब वर्तमान में अधिकारियों के पास भी नहीं है।
मुख्य बिंदु:
- उपतहसील की घोषणा: 14 जून 2023, 7.5 बीघा जमीन आवंटित, निर्माण कार्य ठप।
- पंचायत समिति की घोषणा: फरवरी 2026, 9 माह बाद भी भूमि आवंटन शून्य।
- प्रभावित क्षेत्र: 25 ग्राम पंचायतें, 11 पटवार मंडल।
- समस्याएं: स्थायी भवन का अभाव, अभिलेखों का असुरक्षित रखरखाव, प्रशासनिक देरी, संसाधनों की कमी, अधिकारियों की अनुपलब्धता।
- भविष्य की अनिश्चितता: नव-निर्वाचित प्रधान का कार्यालय संचालन अनिश्चित।
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Written & Verified By
नागौर के युवा पत्रकार और डिजिटल मीडिया विशेषज्ञ। अभिषेक जी को ग्रामीण विकास और स्थानीय समस्याओं के सटीक विश्लेषण का गहरा अनुभव है।