
मेड़ता: किसान नेता नाथूराम मिर्धा की 105वीं जयंती, याद किए संघर्ष
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हमारे मेड़ता संवाददाता के अनुसार, नागौर जिले के मेड़ता सिटी में बीते मंगलवार को जनप्रिय किसान नेता स्वर्गीय नाथूराम मिर्धा की 105वीं जयंती को समारोहपूर्वक मनाया गया। इस अवसर पर विभिन्न राजनीतिक और सामाजिक हस्तियों ने एकजुट होकर मिर्धा के विराट व्यक्तित्व और उनके योगदान को स्मरण किया। कार्यक्रम का मुख्य आयोजन नाथूराम मिर्धा स्मारक परिसर में किया गया, जहाँ स्थापित उनकी विशाल प्रतिमा पर जनप्रतिनिधियों और कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए माल्यार्पण किया। यह आयोजन मिर्धा के विचारों और संघर्षों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का एक महत्वपूर्ण प्रयास था।
किसान हितों के पुरोधा थे नाथूराम मिर्धा
स्वर्गीय नाथूराम मिर्धा को राजस्थान की राजनीति में किसान हितों के प्रबल पैरोकार के रूप में सदैव याद किया जाता है। उनका जीवन किसानों, मजदूरों और ग्रामीण अंचल के विकास को समर्पित रहा। उन्होंने अपना पूरा जीवन समाज के वंचित वर्गों के उत्थान और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए संघर्ष किया। मिर्धा ने सहकारिता आंदोलन को नई दिशा दी और ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा, सिंचाई तथा बुनियादी सुविधाओं के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनकी दूरदर्शिता और दृढ़ संकल्प ने नागौर सहित पूरे राजस्थान के राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक परिदृश्य पर गहरा प्रभाव डाला। यह जयंती समारोह उनके इन्हीं महान कार्यों और अविस्मरणीय योगदान को पुनर्जीवित करने का अवसर था।
श्रद्धांजलि सभा का आयोजन
स्मारक परिसर में आयोजित कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्थानीय लोग, किसान और विभिन्न राजनीतिक दलों के कार्यकर्ता उपस्थित रहे। उपस्थित नेताओं ने नाथूराम मिर्धा के जीवन और उनके सिद्धांतों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि मिर्धा ने हमेशा नैतिकता और ईमानदारी की राजनीति की। उनके संघर्षों की कहानी आज भी प्रेरणादायक है, विशेषकर उन लोगों के लिए जो समाज के पिछड़े और शोषित वर्ग के लिए काम करना चाहते हैं। इस अवसर पर कई वक्ताओं ने मिर्धा के आदर्शों को वर्तमान राजनीति में अपनाने की आवश्यकता पर जोर दिया, ताकि जनसेवा और विकास के पथ पर आगे बढ़ा जा सके।
- मुख्य आयोजन स्थल: मेड़ता सिटी स्थित नाथूराम मिर्धा स्मारक परिसर।
- श्रद्धांजलि: जनप्रतिनिधियों और कांग्रेस नेताओं द्वारा विशाल प्रतिमा पर माल्यार्पण।
- स्मरण: उनके किसान हितैषी संघर्षों और सामाजिक योगदान को याद किया गया।
- उपस्थिति: बड़ी संख्या में स्थानीय लोग, किसान और कार्यकर्ता शामिल हुए।
- महत्व: यह आयोजन उनकी विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने और उनके आदर्शों को पुनर्जीवित करने का माध्यम बना।
विरासत और प्रेरणा
नाथूराम मिर्धा की विरासत आज भी जीवित है और उनके सिद्धांत अनेक लोगों को प्रेरित करते हैं। उन्होंने अपने सार्वजनिक जीवन में अनेक महत्वपूर्ण पदों पर रहते हुए भी कभी अपने किसान मूल और ग्रामीण पृष्ठभूमि को नहीं भुलाया। उनका मानना था कि भारत की आत्मा गांवों में बसती है और जब तक गांवों का विकास नहीं होगा, देश आगे नहीं बढ़ सकता। उन्होंने किसानों को सशक्त बनाने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए विभिन्न योजनाएं बनाईं और लागू करवाईं। उनकी 105वीं जयंती पर उन्हें याद करना सिर्फ एक औपचारिकता नहीं, बल्कि उनके द्वारा स्थापित मूल्यों और सिद्धांतों के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को दोहराना भी है। DailyDhandora की टीम भी इस महान व्यक्तित्व को नमन करती है।
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Written & Verified By
नागौर के युवा पत्रकार और डिजिटल मीडिया विशेषज्ञ। अभिषेक जी को ग्रामीण विकास और स्थानीय समस्याओं के सटीक विश्लेषण का गहरा अनुभव है।