
नागौर: जेएलएन अस्पताल में चार माह से सीटी स्कैन ठप, मरीज बेहाल
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हमारे नागौर संवाददाता के अनुसार, जिले के सबसे बड़े जवाहरलाल नेहरू (जेएलएन) अस्पताल में पिछले चार महीनों से सीटी स्कैन सेवा पूरी तरह से ठप पड़ी है। इस गंभीर समस्या के कारण ओपीडी और इनडोर में भर्ती होने वाले गंभीर मरीजों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। बुनियादी जांच के अभाव में मरीजों को अब निजी सेंटरों की ओर रुख करना पड़ रहा है, जो उनकी जेब पर अतिरिक्त बोझ डाल रहा है।
चार माह से ठप पड़ी सेवा, मरीजों की बढ़ी परेशानी
नागौर जिले के लिए महत्वपूर्ण यह स्वास्थ्य सेवा बंद होने से खासकर सड़क दुर्घटनाओं के शिकार घायलों और सिर की गंभीर चोट वाले मरीजों की स्थिति और भी विकट हो गई है। हमारी टीम ने पाया कि सीटी स्कैन की सुविधा न होने के कारण ऐसे मरीजों को प्राथमिक उपचार के बजाय सीधे जोधपुर या बीकानेर जैसे बड़े शहरों के अस्पतालों में रेफर करना पड़ रहा है, जिससे बहुमूल्य समय और संसाधनों का नुकसान हो रहा है। अस्पताल में पहले रोजाना औसतन 15 से 20 सीटी स्कैन जांचें होती थीं, जो अब पूरी तरह बंद हैं।
पुरानी मशीन बनी बाधा, नई की स्वीकृति लंबित
अस्पताल प्रशासन के अनुसार, सीटी स्कैन सेवा ठप होने का मुख्य कारण 13 साल पुरानी मशीन का पूरी तरह से खराब हो जाना है। यह मशीन अब तकनीकी रूप से इतनी जीर्ण-शीर्ण हो चुकी है कि इसकी मरम्मत संभव नहीं है। नई मशीन स्थापित किए बिना इस महत्वपूर्ण सेवा को फिर से शुरू करना असंभव है। हालांकि, नई सीटी स्कैन मशीन की मंजूरी अभी तक नहीं मिल पाई है, जिसके चलते मरीजों को प्रतिदिन परेशानी झेलनी पड़ रही है।
10 से अधिक पत्र भी बेअसर, प्रशासन की अनदेखी
जेएलएन अस्पताल प्रशासन ने नई सीटी स्कैन मशीन के आवंटन के लिए लगातार प्रयास किए हैं। पूर्व पीएमओ डॉ. आरके अग्रवाल ने अपने कार्यकाल के दौरान जयपुर स्थित उच्च अधिकारियों को 10 से अधिक बार रिमाइंडर भेजे थे। उनके बाद पदभार संभालने वाले वर्तमान पीएमओ डॉ. रामावतार जाखड़ ने भी इस संबंध में दोबारा पत्र लिखा है। हमारी पड़ताल में सामने आया है कि इन सभी प्रयासों और पत्राचार के बावजूद, चार महीने बीत जाने के बाद भी शासन-प्रशासन की ओर से कोई ठोस कार्रवाई या सुध नहीं ली गई है।
- सेवा बाधित: पिछले चार माह से जेएलएन अस्पताल में सीटी स्कैन सेवा पूरी तरह बंद।
- कारण: 13 साल पुरानी मशीन तकनीकी रूप से खराब, मरम्मत असंभव।
- प्रभाव: गंभीर मरीज और सड़क दुर्घटना के घायल निजी सेंटरों पर जाने को मजबूर, सिर की चोट वाले केस सीधे जोधपुर/बीकानेर रेफर।
- प्रशासकीय उदासीनता: पूर्व और वर्तमान पीएमओ द्वारा 10 से अधिक बार पत्र लिखने के बावजूद नई मशीन की स्वीकृति लंबित।
- वर्तमान स्थिति: पीएमओ डॉ. रामावतार जाखड़ ने बताया कि स्वीकृति मिलते ही नई मशीन स्थापित की जाएगी और जांचें शुरू हो पाएंगी।
इस स्थिति से यह स्पष्ट है कि जिले के सबसे बड़े अस्पताल में एक मूलभूत जांच सुविधा का अभाव मरीजों के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। हम उम्मीद करते हैं कि सरकार और संबंधित विभाग जल्द से जल्द इस मामले में हस्तक्षेप कर नई सीटी स्कैन मशीन की स्थापना सुनिश्चित करेंगे ताकि नागौर के मरीजों को हो रही परेशानी से मुक्ति मिल सके।
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Written & Verified By
नागौर के युवा पत्रकार और डिजिटल मीडिया विशेषज्ञ। अभिषेक जी को ग्रामीण विकास और स्थानीय समस्याओं के सटीक विश्लेषण का गहरा अनुभव है।