
आरयूएचएस जयपुर: आर्थिक चुनौतियों के बीच धन्वन्तरि प्रतिमा स्थापना की तैयारी, प्राचीन-आधुनिक चिकित्सा का होगा संगम
Posted on 6 नवंबर 2026
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जयपुर। प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों को मान्यता प्रदान करने, महत्वपूर्ण परीक्षाओं का आयोजन कराने और मेडिकल डिग्रियां जारी करने वाले प्रतिष्ठित राजस्थान स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय (आरयूएचएस) में चिकित्सा के आराध्य भगवान धन्वन्तरि की प्रतिमा अब तक स्थापित नहीं हो पाई है। यह स्थिति तब है जब विश्वविद्यालय परिसर में प्रतिमा स्थापित करने के लिए तीन साल पहले ही एक मंदिर का निर्माण हो चुका है, जो तब से खाली पड़ा है।
आयुर्वेद में भगवान धन्वन्तरि को चिकित्सा और आरोग्य का प्रमुख देवता तथा आयुर्वेद शास्त्र का प्रणेता माना जाता है। ऐसे में, चिकित्सा शिक्षा के एक शीर्ष संस्थान में ही उनकी प्रतिमा का अभाव कई सवाल खड़े करता है, विशेषकर जब भारतीय ज्ञान परंपरा और चिकित्सा के प्राचीन रूपों को आधुनिक शिक्षा से जोड़ने पर लगातार जोर दिया जा रहा हो। हमारी टीम ने इस मुद्दे पर गहनता से पड़ताल की है, जहां एक ओर विश्वविद्यालय आर्थिक चुनौतियों से जूझ रहा है, वहीं दूसरी ओर भारतीय चिकित्सा परंपरा के सम्मान से जुड़ा यह महत्वपूर्ण कार्य लंबित पड़ा है।
प्राचीन-आधुनिक चिकित्सा परंपरा के मेल का प्रतीक होगी प्रतिमा
भगवान धन्वन्तरि को न केवल आयुर्वेद का प्रवर्तक बल्कि देवताओं का वैद्य भी कहा गया है। भारतीय ज्ञान-विज्ञान परंपरा में उनके द्वारा प्रतिपादित आयुर्वेद शास्त्र मानवता के लिए एक अमूल्य देन है। चिकित्सा शिक्षा से जुड़े विश्वविद्यालय में उनकी प्रतिमा की स्थापना केवल धार्मिक आस्था का विषय नहीं है, बल्कि यह भारतीय चिकित्सा ज्ञान और उसकी समृद्ध परंपरा के प्रति सम्मान का प्रतीक भी होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि आरयूएचएस में इनकी प्रतिमा स्थापित होने से प्राचीन चिकित्सा ज्ञान और आधुनिक चिकित्सा शिक्षा के बीच एक सामंजस्यपूर्ण मेल दिखाई देगा, जो वर्तमान पीढ़ी के लिए प्रेरणादायक होगा। राजस्थान संस्कृत विश्वविद्यालय के डीन जैसे शिक्षाविदों ने भी इस दिशा में जल्द पहल करने की आवश्यकता पर बल दिया है, ताकि भारतीय चिकित्सा के गौरव को पुनर्जीवित किया जा सके।
कुलगुरु ने दी जानकारी: प्रतिमा स्थापना की योजना प्रस्तावित
विश्वविद्यालय प्रशासन ने अब इस दिशा में कदम बढ़ाने का निर्णय लिया है। विश्वविद्यालय के कुलगुरु के अनुसार, परिसर में ज्ञान की देवी मां सरस्वती और विश्वविद्यालय से संबद्ध मेडिकल कॉलेज में भगवान धन्वन्तरि की प्रतिमा स्थापित करने की योजना प्रस्तावित है। उन्होंने बताया कि दोनों महत्वपूर्ण प्रतिमाओं की स्थापना का प्रस्ताव तैयार किया गया है और जल्द ही इस पर कार्य शुरू किया जाएगा। यह घोषणा ऐसे समय में आई है जब विश्वविद्यालय कई आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रहा है। इसके बावजूद, यह पहल दर्शाती है कि विश्वविद्यालय भारतीय परंपराओं और मूल्यों को आधुनिक शिक्षा के साथ एकीकृत करने के प्रति प्रतिबद्ध है।
आर्थिक संकट के बीच महत्वपूर्ण सांस्कृतिक कदम
आरयूएचएस इन दिनों आर्थिक चुनौतियों से जूझ रहा है, जिसका सीधा असर इसके संचालन और विकास कार्यों पर पड़ रहा है। इसी बीच विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा परिसर में मां सरस्वती और विश्वविद्यालय से जुड़े मेडिकल कॉलेज में भगवान धन्वन्तरि की प्रतिमा स्थापित करने की योजना बनाई गई है। कुलगुरु ने पुष्टि की है कि दोनों प्रतिमाओं की स्थापना का प्रस्ताव है। चिकित्सा शिक्षा के इस प्रमुख संस्थान में भगवान धन्वन्तरि की प्रतिमा स्थापित होना केवल आस्था से जुड़ा एक कदम नहीं होगा, बल्कि यह प्राचीन भारतीय चिकित्सा परंपरा और आधुनिक मेडिकल शिक्षा के बीच एक मजबूत सांस्कृतिक और शैक्षिक जुड़ाव का प्रतीक भी बनेगा। यह कदम शिक्षा के क्षेत्र में भारतीय मूल्यों और विरासत को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण संदेश देगा।
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नागौर के युवा पत्रकार और डिजिटल मीडिया विशेषज्ञ। अभिषेक जी को ग्रामीण विकास और स्थानीय समस्याओं के सटीक विश्लेषण का गहरा अनुभव है।


