
मेड़ता: लुनियास के ग्रामीण पंचायत मुख्यालय विवाद पर अड़े, चुनाव बहिष्कार की चेतावनी
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पंचायती राज चुनावों की सरगर्मियों के बीच, मेड़ता विधानसभा क्षेत्र के लुनियास गांव में एक बड़ा प्रशासनिक विवाद गहरा गया है। ग्रामीणों ने ग्राम पंचायत मुख्यालय को लुनियास के बजाय 9 किलोमीटर दूर बायड़ गांव में स्थापित करने का कड़ा विरोध किया है। इस फैसले के खिलाफ, ग्रामीणों ने आगामी चुनावों में पूर्ण मतदान बहिष्कार का ऐलान किया है, जिससे स्थानीय प्रशासन की चिंताएं बढ़ गई हैं। यह घोषणा ऐसे समय में हुई है जब पूरे जिले में चुनावी माहौल अपने चरम पर है।
लुनियास गांव को फरवरी 2026 में बड़गांव से अलग कर एक नई ग्राम पंचायत का दर्जा दिया गया था, जिससे स्थानीय निवासियों में काफी हर्ष और उम्मीदें जगी थीं। नई पंचायत के गठन से ग्रामीणों को अपने ही गांव में प्रशासनिक सुविधाएं मिलने की उम्मीद थी। हालांकि, बाद में हुए प्रशासनिक फेरबदल के तहत पंचायत मुख्यालय बायड़ में तय कर दिया गया, जिससे ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। उनका आरोप है कि यह निर्णय किसी स्थानीय जनप्रतिनिधि के दबाव में आकर लिया गया है, जो पूरी तरह से अनुचित और मनमाना है।
ग्रामीणों की मुख्य आपत्ति और मांगें:
ग्रामीणों का तर्क है कि जब पंचायत का नाम लुनियास है और उसकी आबादी भी बायड़ से कहीं अधिक है, तो मुख्यालय को किसी अन्य गांव में स्थापित करने का कोई तर्कसंगत आधार नहीं बनता। उनकी मुख्य आपत्तियां और मांगें निम्नलिखित हैं:
- दूरी और जोखिम: बायड़ गांव लुनियास से करीब 9 किलोमीटर दूर स्थित है। दोनों गांवों के बीच राज्य राजमार्ग होने के कारण आवागमन के दौरान हर समय सड़क दुर्घटनाओं का गंभीर जोखिम बना रहता है। दैनिक कार्यों के लिए इतनी दूर जाना ग्रामीणों, विशेषकर बुजुर्गों और महिलाओं के लिए बेहद मुश्किल और असुरक्षित है।
- सुविधाओं का अभाव: पेंशन, प्रमाण पत्र बनवाने और अन्य सरकारी योजनाओं से संबंधित कार्यों के लिए ग्रामीणों को लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। दूरस्थ मुख्यालय होने से उन्हें आवश्यक प्रशासनिक सुविधाएं सुलभता से नहीं मिल पा रही हैं, जिससे उनका समय और धन दोनों बर्बाद हो रहा है।
- जनसंख्या और केंद्रीय स्थान: ग्रामीणों का दावा है कि लुनियास की कुल जनसंख्या बायड़ की तुलना में काफी अधिक है। साथ ही, लुनियास गांव केंद्रीय स्थान पर स्थित है, जहां से पंचायत के सभी गांवों के निवासियों को प्रशासनिक सुविधाएं अधिक सुगमता से प्राप्त हो सकती हैं।
- पारदर्शिता का अभाव: ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि पंचायत मुख्यालय के निर्धारण के मापदंडों और संबंधित आदेशों को सार्वजनिक किया जाए, ताकि पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता बरती जा सके। उनका मानना है कि यह निर्णय बिना किसी स्पष्ट और न्यायोचित कारण के लिया गया है।
मतदान बहिष्कार की चेतावनी:
लुनियास के ग्रामीणों ने अपनी मांग पूरी न होने तक आगामी पंचायती राज चुनावों में मतदान में भाग न लेने का स्पष्ट ऐलान किया है। उन्होंने दो टूक कहा है कि जब तक उनकी जायज मांग पर सकारात्मक निर्णय लेते हुए लुनियास को ही पंचायत मुख्यालय घोषित नहीं किया जाता, तब तक गांव का कोई भी नागरिक मतदान केंद्र तक नहीं जाएगा। पूरे गांव द्वारा सामूहिक मतदान बहिष्कार की इस घोषणा ने चुनावी प्रक्रिया से जुड़े प्रशासनिक अधिकारियों की चिंताएं बढ़ा दी हैं।
प्रशासन के सामने अब एक बड़ी चुनौती है। पंचायती राज चुनावों के ठीक पहले इस तरह के सामूहिक विरोध से लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। यह देखना होगा कि प्रशासन चुनाव से पूर्व ग्रामीणों से वार्ता कर इस गतिरोध को समाप्त करवाता है या यह विवाद और अधिक तूल पकड़ता है। ग्रामीण अपनी मांग मनवाने के लिए इस लोकतांत्रिक अधिकार का उपयोग विरोध के हथियार के रूप में कर रहे हैं, और उनका कहना है कि वे अपने हक के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं। हमारे मेड़ता संवाददाता के अनुसार, स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है और समाधान के लिए शीघ्र हस्तक्षेप की आवश्यकता है।
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Written & Verified By
नागौर के युवा पत्रकार और डिजिटल मीडिया विशेषज्ञ। अभिषेक जी को ग्रामीण विकास और स्थानीय समस्याओं के सटीक विश्लेषण का गहरा अनुभव है।