
चरक संहिता अनुसार, शरद ऋतु का जल है अमृत समान: नागौर
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कार्तिक मास के साथ ही शुरू हुए कार्तिक स्नान का महत्व प्राचीन ग्रंथों में विशेष रूप से वर्णित है। सूर्योदय से पूर्व पवित्र जल में स्नान की यह परंपरा सदियों से चली आ रही है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस जल को ब्रह्मांडीय ऊर्जा और ईश्वरीय कृपा का प्रतीक माना जाता है। श्रद्धालुओं के अनुभव में, विशेषकर सुबह 4 से 5 बजे के मध्य ठंडे जल से स्नान और ईश्वर का स्मरण करने से मन में एक विशेष प्रकार का हल्कापन, स्पष्टता और सकारात्मकता का भाव उत्पन्न होता है।
आयुर्वेद और योग परंपराएं भी ठंडे पानी से स्नान को शरीर और तंत्रिका तंत्र की सक्रियता से जोड़ती हैं। कार्तिक मास में स्नान के साथ-साथ भगवान विष्णु की पूजा, तुलसी की सेवा, दीपदान और दान-पुण्य का भी अत्यंत महत्व है। पूरे मास इन परंपराओं का नियमित रूप से पालन करना व्यक्ति के संकल्प, आस्था और आत्मचिंतन को दर्शाता है। इस वर्ष कार्तिक मास 24 नवंबर तक चलेगा।
'हंसोदक' जल का वैज्ञानिक और आयुर्वेदिक महत्व
दिन में सूर्य की किरणों से गर्म और रात में चंद्रमा की किरणों से शीतल हुआ, समय के साथ परिपक्व तथा अगस्त्य तारे के प्रभाव से युक्त जल ‘हंसोदक’ कहलाता है। चरक संहिता में इसी शरद ऋतु के निर्मल जल को स्नान, पान और जल में अवगाहन (शरीर को डुबोना) के लिए अमृत के समान हितकारी बताया गया है। चरक संहिता के सूत्रस्थान में शरद ऋतु के जल के संबंध में कहा गया है:
- “दिवा सूर्यांशुसन्तप्तं निशि चन्द्रांशुशीतलम्।
- कालेन पक्वं निर्दोषमगस्त्येनाविषीकृतम्॥
- हंसोदकमिति ख्यातं शारदं विमलं शुचि।
- स्नानपानावगाहेषु हितमम्बु यथाऽमृतम्॥”
इसका तात्पर्य है कि यह जल स्नान, पीने और शरीर डुबोने के लिए अमृत के समान लाभकारी है।
हाइड्रोथेरेपी है कार्तिक स्नान
फिजिशियन डॉ. मनोज मित्तल के अनुसार, ठंडे पानी के शरीर पर पड़ने से त्वचा की रक्त वाहिकाएं सिकुड़ती हैं, जिससे आंतरिक अंगों की ओर रक्त प्रवाह में बदलाव होता है। यह शरीर की तत्काल प्रतिक्रिया को सक्रिय करता है। ठंडे पानी से स्नान को हाइड्रोथेरेपी का एक रूप भी माना जा सकता है। ठंडे पानी के संपर्क से शरीर में नॉरएड्रेनालाईन जैसे रसायनों के स्तर में बदलाव हो सकता है, जो सतर्कता और मनोदशा को प्रभावित करता है। हमारे नागौर संवाददाता के अनुसार, इस परंपरा का पालन करने वालों को शारीरिक और मानसिक रूप से लाभ होता है।
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नागौर के युवा पत्रकार और डिजिटल मीडिया विशेषज्ञ। अभिषेक जी को ग्रामीण विकास और स्थानीय समस्याओं के सटीक विश्लेषण का गहरा अनुभव है।