
नागौर में आज मनाई जाएगी शरद पूर्णिमा, मंदिरों में होगा खीर का भोग व सुंदरकांड पाठ
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हमारे नागौर संवाददाता के अनुसार, शरद पूर्णिमा का पावन पर्व आज, रविवार, 25 अक्टूबर 2026 को नागौर शहर में धूमधाम से मनाया जाएगा। इस अवसर पर शहर के विभिन्न मंदिरों में विशेष धार्मिक आयोजनों की धूम रहेगी। कहीं भगवान को खीर का विशेष भोग लगाकर श्रद्धालुओं में प्रसाद वितरित किया जाएगा, तो कहीं संगीतमय सुंदरकांड पाठ और रात्रि जागरण के माध्यम से भक्ति और आध्यात्म की अविरल धारा बहेगी।
पंचमुखी श्री हनुमान मंदिर में खीर का भोग और प्रसाद वितरण
शहर के प्रमुख पंचमुखी श्री हनुमान मंदिर में शरद पूर्णिमा के पावन अवसर पर विशेष धार्मिक आयोजन होगा। मंदिर की पुजारी तारादेवी ने जानकारी देते हुए बताया कि शाम 8 बजे से रात 12 बजे तक मंदिर में पूजा-अर्चना और विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इस दौरान भगवान हनुमान को खीर का विशेष भोग लगाया जाएगा, जिसके बाद इसे बड़ी संख्या में उपस्थित श्रद्धालुओं में प्रसाद के रूप में वितरित किया जाएगा।
तारादेवी ने बताया कि मंदिर में पूजा-अर्चना और सेवा की यह गौरवशाली परंपरा करीब 98 वर्षों से निरंतर जारी है। उनके परिवार की तीन पीढ़ियां इस पवित्र मंदिर की सेवा में समर्पित रही हैं। पहले उनके परिवार के स्वर्गीय मदनलाल पुजारी के रूप में मंदिर की सेवा करते थे, जिसके बाद किशनलाल ने पूजा और सेवा की जिम्मेदारी संभाली। वर्तमान में तारादेवी स्वयं मंदिर में पूजा-अर्चना और इसके संरक्षण का कार्य पूरी श्रद्धा और लगन से कर रही हैं। यह परंपरा नागौर शहर की धार्मिक विरासत का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है।
श्री मेहंदीपुर बालाजी मंडल और मानस सत्संग परिवार द्वारा सुंदरकांड पाठ
शरद पूर्णिमा के अवसर पर श्री मेहंदीपुर बालाजी मंडल, नया दरवाजा और मानस सत्संग परिवार द्वारा एक भव्य संगीतमय सुंदरकांड पाठ का आयोजन किया जाएगा। यह पाठ आज दोपहर 3 बजे से शुरू होगा, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु भाग लेंगे। सुंदरकांड पाठ के बाद रात्रि जागरण का भी आयोजन किया जाएगा, जिसमें भक्तगण भजन-कीर्तन के माध्यम से अपनी भक्ति व्यक्त करेंगे और पूरी रात आध्यात्मिक माहौल में डूबे रहेंगे। इस आयोजन को लेकर शहर के भक्तों में खासा उत्साह देखा जा रहा है।
शरद पूर्णिमा का धार्मिक महत्व
शरद पूर्णिमा का हिन्दू धर्म में अत्यधिक महत्व है। इसे 'कोजागरी पूर्णिमा' भी कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी रात समुद्र मंथन से देवी लक्ष्मी का अवतरण हुआ था। इसलिए इसे मां लक्ष्मी का जन्मदिन भी माना जाता है। यह विश्वास किया जाता है कि अपनी जयंती पर मां लक्ष्मी आधी रात को धरती पर यह देखने के लिए भ्रमण करती हैं कि कौन जागकर उनकी भक्ति और आराधना कर रहा है। जो भक्त इस रात जागकर मां लक्ष्मी की पूजा करते हैं, उन्हें विशेष कृपा प्राप्त होती है।
आर्थिक तंगी और दरिद्रता को दूर करने के लिए शरद पूर्णिमा की रात को माता लक्ष्मी के आठ स्वरूपों का ध्यान और पूजन करना अत्यंत फलदायी माना गया है। इन आठ स्वरूपों में धनलक्ष्मी, धान्यलक्ष्मी, राजलक्ष्मी, वैभवलक्ष्मी, ऐश्वर्यलक्ष्मी, संतानलक्ष्मी, कमलालक्ष्मी और विजयलक्ष्मी शामिल हैं। इन स्वरूपों का ध्यान करने से भक्तों को जीवन में सुख-समृद्धि और ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है। हमारी टीम भी इस शुभ अवसर पर सभी पाठकों के लिए मंगलकामना करती है।
पंचांग के अनुसार पूर्णिमा तिथि और स्नान-दान
पंचांग के अनुसार, इस बार पूर्णिमा तिथि रविवार सुबह 11 बजकर 55 मिनट से शुरू होकर सोमवार सुबह 9 बजकर 41 मिनट तक रहेगी। चूंकि पूर्णिमा की उदयातिथि सोमवार को पड़ रही है, इसलिए पवित्र नदियों में स्नान और दान से संबंधित सभी कार्य सोमवार को ही किए जाएंगे। यह सुनिश्चित करता है कि श्रद्धालु धार्मिक नियमों का पालन करते हुए इस पवित्र पर्व का पूर्ण लाभ उठा सकें।
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Written & Verified By
नागौर के युवा पत्रकार और डिजिटल मीडिया विशेषज्ञ। अभिषेक जी को ग्रामीण विकास और स्थानीय समस्याओं के सटीक विश्लेषण का गहरा अनुभव है।