
नागौर: पंचायती राज चुनाव प्रशिक्षण से अनुपस्थित 16 कार्मिकों को नोटिस
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नागौर जिले में आगामी पंचायती राज चुनाव-2026 की तैयारियों के बीच जिला प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाना शुरू कर दिया है। निर्वाचन प्रक्रिया के पहले चरण के महत्वपूर्ण प्रशिक्षण कार्यक्रम से बिना किसी पूर्व सूचना के अनुपस्थित रहने वाले 16 अधिकारियों और कर्मचारियों पर बड़ी कार्रवाई की गई है। इनमें चार रिटर्निंग अधिकारी (RO) भी शामिल हैं, जिन्हें जिला निर्वाचन विभाग ने नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा है। हमारी टीम लगातार इन महत्वपूर्ण चुनावी तैयारियों पर पैनी नजर बनाए हुए है।
हमारे नागौर संवाददाता के अनुसार, यह घटना जिला प्रशासन की उस सख्ती को दर्शाती है, जिसमें चुनावी प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की लापरवाही या अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। पंचायती राज चुनाव लोकतंत्र की सबसे निचली इकाई को मजबूत करने का आधार होते हैं, और इनकी पारदर्शिता व निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए सभी संबंधित कार्मिकों का प्रशिक्षित होना अत्यंत आवश्यक है। प्रशिक्षण कार्यक्रम में अनुपस्थिति को गंभीरता से लिया गया है, क्योंकि इससे चुनावी मशीनरी की कार्यप्रणाली प्रभावित हो सकती है।
प्रशासन का कड़ा संदेश
- अनुशासनहीनता पर जीरो टॉलरेंस: जिला प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि चुनावी ड्यूटी में किसी भी प्रकार की शिथिलता या अनुशासनहीनता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यह कार्रवाई एक कड़ा संदेश है कि सभी कार्मिक अपनी जिम्मेदारियों के प्रति गंभीर रहें।
- निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करना प्राथमिकता: आगामी पंचायती राज चुनाव को निष्पक्ष और स्वतंत्र रूप से संपन्न कराने के लिए निर्वाचन विभाग पूरी तरह प्रतिबद्ध है। इसी कड़ी में प्रारंभिक प्रशिक्षणों को अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है।
- भविष्य की कार्रवाई की चेतावनी: नोटिस जारी होने के बाद, इन सभी 16 कार्मिकों को निर्धारित समय-सीमा के भीतर अपना जवाब प्रस्तुत करना होगा। संतोषजनक जवाब न मिलने की स्थिति में इनके खिलाफ विभागीय नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जा सकती है, जिसमें अनुशासनात्मक कार्रवाई या अन्य कानूनी प्रावधान शामिल हो सकते हैं।
यह प्रशिक्षण कार्यक्रम चुनावी प्रक्रिया के विभिन्न पहलुओं, जैसे नामांकन पत्र दाखिल करने की प्रक्रिया, मतदान सामग्री का प्रबंधन, ईवीएम का संचालन, मतगणना प्रक्रिया और अन्य महत्वपूर्ण चुनावी नियमों से अवगत कराने के लिए आयोजित किया गया था। रिटर्निंग अधिकारी जैसे महत्वपूर्ण पदों पर तैनात अधिकारियों की अनुपस्थिति चिंता का विषय है, क्योंकि वे चुनावी प्रक्रिया की रीढ़ होते हैं। उनकी अनुपस्थिति से चुनावी कार्य में बाधा आ सकती है, और त्रुटियों की संभावना बढ़ सकती है।
जिला निर्वाचन अधिकारी ने कहा कि चुनाव ड्यूटी एक राष्ट्रीय कर्तव्य है और इसमें किसी भी प्रकार की कोताही स्वीकार्य नहीं है। सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन पूरी ईमानदारी और निष्ठा से करना चाहिए। यह कदम यह भी सुनिश्चित करेगा कि भविष्य में होने वाले प्रशिक्षण कार्यक्रमों में शत-प्रतिशत उपस्थिति दर्ज की जा सके और सभी कार्मिक चुनावी चुनौतियों का सामना करने के लिए पूरी तरह से तैयार रहें। हमारी टीम इस मामले में आगे की गतिविधियों पर भी नजर रखेगी और नवीनतम अपडेट आप तक पहुंचाती रहेगी। प्रशासन द्वारा की गई यह कार्रवाई अन्य कार्मिकों के लिए भी एक चेतावनी है कि वे अपनी ड्यूटी को गंभीरता से लें।
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Written & Verified By
नागौर के युवा पत्रकार और डिजिटल मीडिया विशेषज्ञ। अभिषेक जी को ग्रामीण विकास और स्थानीय समस्याओं के सटीक विश्लेषण का गहरा अनुभव है।