
मूंडवा: सरपंच चुनाव हारे प्रत्याशी को ग्रामीणों ने दिए ₹25 लाख, जनसेवा का अनूठा सम्मान
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नागौर। नागौर जिले की मूंडवा पंचायत समिति में पंचायत चुनाव के बाद एक अनूठी परंपरा देखने को मिल रही है, जहां ग्रामीण अपने हारे हुए सरपंच प्रत्याशियों का सम्मान कर रहे हैं। नागड़ी ग्राम पंचायत में सरपंच पद का चुनाव हारने वाले भागीरथ हटीला को ग्रामीणों ने एकजुट होकर लगभग 25 लाख रुपए की आर्थिक सहायता प्रदान की। इस दौरान कार्यक्रम का माहौल किसी शादी समारोह से कम नहीं था, जो ग्रामीण एकता और प्रत्याशी के प्रति उनके विश्वास को दर्शाता है। इससे पहले, भदौरा ग्राम पंचायत में भी सरपंच पद का चुनाव हारी चिड़ी देवी को ग्रामीणों ने इसी तरह सम्मानित किया था।
हमारे मूंडवा संवाददाता के अनुसार, यह घटना मारवाड़ की उस पुरानी परंपरा की याद दिलाती है, जहां शादी समारोहों में मायरा भरा जाता है। लेकिन इस बार, यह परंपरा पंचायत चुनावों के बाद एक हारे हुए प्रत्याशी के सम्मान में दोहराई गई है, जो अपने आप में एक नया चलन स्थापित कर रहा है।
ग्रामीणों ने क्यों की आर्थिक मदद?
- भागीरथ हटीला (45) पेशे से मकान कंट्रक्शन का काम करते हैं।
- इस बार उन्हें नागड़ी ग्राम पंचायत से लोगों ने आपसी सहमति से सरपंच पद का उम्मीदवार बनाया था।
- भागीरथ ने स्वयं बताया कि वे ग्रामीणों के समर्थन के बाद ही चुनावी मैदान में उतरे थे।
नागड़ी ग्राम पंचायत में करीब 3,500 मतदाता हैं, जिनमें से 3 हजार 8 लोगों ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया था। पहले चरण में हुए इस चुनाव में भागीरथ हटीला 1133 वोट प्राप्त कर दूसरे स्थान पर रहे थे। चुनाव परिणाम आने के बाद, ग्रामीणों ने उनसे दूरी बनाने के बजाय उनका साथ दिया और उनके लिए आर्थिक सहायता जुटाने का निर्णय लिया। एकत्रित राशि उनके घर पहुंचकर एक भव्य कार्यक्रम में सौंपी गई।
नागड़ी ग्राम पंचायत चुनाव के प्रमुख आंकड़े
नागड़ी ग्राम पंचायत में सरपंच पद के लिए कुल छह प्रत्याशी मैदान में थे। चुनावी नतीजों में:
- राकेश हटीला को सर्वाधिक 1532 वोट मिले, जिससे वे विजयी हुए।
- भागीरथ हटीला 1133 वोट के साथ दूसरे स्थान पर रहे।
- अन्य प्रत्याशियों में प्रहलाद राम को 88, कैलाश को 67, गिरधारी राम को 51, बद्रीराम को 17 और साबुड़ी को 12 वोट मिले।
जनता का प्यार ही सबसे बड़ी पूंजी
भागीरथ हटीला ने इस भावुक क्षण पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि हार-जीत चुनाव का एक हिस्सा है, लेकिन जनता का प्यार, विश्वास और अपनापन ही उनकी असली पूंजी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि चुनाव का परिणाम कुछ भी रहा हो, ग्रामवासियों के प्रति उनका सम्मान और जनसेवा का भाव हमेशा बना रहेगा।
उन्होंने आगे कहा कि जनता का फैसला उनके लिए सिर आंखों पर है। गांव के विकास के लिए प्रयास करना और ग्रामीणों के सुख-दुख में साथ खड़े रहना ही सच्ची जनसेवा है, और वे इस पथ पर हमेशा अग्रसर रहेंगे। इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि ग्रामीण क्षेत्रों में मानवीय संबंध और एकता राजनीतिक परिणामों से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है। हमारी टीम इस अनूठी पहल की सराहना करती है, जो लोकतंत्र में हारने वाले प्रत्याशी के प्रति भी सम्मान और सहयोग की भावना को मजबूत करती है।
भदौरा में भी ऐसा ही मामला
यह कोई अकेला मामला नहीं है। इससे पहले, मूंडवा पंचायत समिति की ही भदौरा ग्राम पंचायत में सरपंच चुनाव हारी प्रत्याशी चिड़ी देवी को भी ग्रामीणों ने लगभग 25 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देकर सम्मानित किया था। इन दोनों घटनाओं ने नागौर जिले में ग्रामीण भाईचारे और एकता का एक नया उदाहरण प्रस्तुत किया है। गले में मालाएं, सिर पर साफा और रुपयों से भरे थाल के साथ ग्रामीणों ने अपने प्रत्याशी के प्रति अटूट विश्वास और समर्थन व्यक्त किया, जो हार-जीत से बढ़कर है।
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Written & Verified By
नागौर के युवा पत्रकार और डिजिटल मीडिया विशेषज्ञ। अभिषेक जी को ग्रामीण विकास और स्थानीय समस्याओं के सटीक विश्लेषण का गहरा अनुभव है।