
नागौर: पार्षदों की कार्यशाला, जनता की समस्याओं के समाधान पर जोर
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हमारे नागौर संवाददाता के अनुसार...
शहर के विकास में जन प्रतिनिधियों की भूमिका और उनके दायित्वों को लेकर बुधवार को कृषि मंडी सभागार में एक महत्वपूर्ण कार्यशाला का आयोजन किया गया। 'सेवा का संकल्प' अभियान के तहत आयोजित इस कार्यशाला में स्थानीय पार्षदों को उनके अधिकारों के साथ-साथ जनता के प्रति जवाबदेही का भी भलीभांति ज्ञान कराया गया।
पार्षदों की भूमिका और जिम्मेदारियां
कार्यशाला में विशेषज्ञों ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि पार्षदों की भूमिका केवल समस्याओं को उठाने तक सीमित नहीं है, बल्कि उनके प्रभावी समाधान के लिए पहल करना भी उनकी जिम्मेदारी है। विशेषकर पहली बार चुने गए जनप्रतिनिधियों को अनुभवी पार्षदों ने वार्डों की बुनियादी सुविधाओं में सुधार करने और संबंधित अधिकारियों के साथ बेहतर समन्वय स्थापित करने की सलाह दी। यह समझाया गया कि जनता ने उन्हें अपने वार्ड की समस्याओं को सुलझाने और शहर के विकास की बागडोर सौंपी है, इसलिए उन्हें इस जिम्मेदारी को पूरी निष्ठा से निभाना होगा।
अधिकारों और कर्तव्यों का ज्ञान
नगरपालिका अधिनियम 2009 के विभिन्न प्रावधानों पर भी विस्तृत चर्चा की गई। वरिष्ठ पार्षद एवं पूर्व अध्यक्ष मनोहरसिंह राठौड़ ने पार्षदों की नगर परिषद के कामकाज में भागीदारी, जनसमस्याओं को प्राथमिकता के साथ उठाने, विकास कार्यों के प्रस्ताव रखने, बजट और योजनाओं की जानकारी प्राप्त करने तथा अधिकारियों से जवाबदेही मांगने जैसे विषयों के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि नियमों की जानकारी होने पर ही पार्षद अपने वार्ड के लिए प्रभावी ढंग से पैरवी कर सकेंगे। नगरपालिका अधिनियम की धारा 45 और 46 के बारे में भी बिंदुवार जानकारी दी गई।
समन्वय से विकास का मार्ग
कार्यशाला को संबोधित करते हुए एडवोकेट गोविन्द कड़वा ने जनप्रतिनिधियों और नगर परिषद प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि वार्डों की वास्तविक जरूरतों के अनुसार विकास कार्यों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उन्होंने जंभेश्वर कॉलोनी और दीप कॉलोनी जैसी कॉलोनियों का उदाहरण देते हुए बताया कि सरकारी भूमि नगरपरिषद को हैंडओवर न होने के कारण पट्टे जारी करने में आ रही दिक्कतों का समाधान निकालना आवश्यक है। अन्यथा, ऐसी कॉलोनियां कभी भी पूरी तरह विकसित नहीं हो पाएंगी।
बजट और समन्वय की महत्ता
पूर्व सभापति बिरदीचंद सांखला ने नगर परिषद के कामकाज में पार्षदों की सक्रिय भागीदारी को अनिवार्य बताया। उन्होंने कहा कि बजट की कमी और अन्य सरकारी विभागों के साथ समन्वय की कमी विकास कार्यों में बाधा उत्पन्न करती है। उन्होंने विभिन्न विभागों के बीच बेहतर तालमेल की वकालत की ताकि एक विभाग द्वारा किए गए कार्य को दूसरे विभाग द्वारा बाधित न किया जाए।
उपसभापति शरीफ कुरैशी ने शहर की सफाई व्यवस्था को सुदृढ़ करने के प्रयासों पर प्रकाश डाला, लेकिन साथ ही नागरिकों द्वारा कचरा फैलाने की प्रवृत्ति पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कचरा संग्रहण वाहनों के प्रभावी उपयोग पर भी बात कही।
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नागौर के युवा पत्रकार और डिजिटल मीडिया विशेषज्ञ। अभिषेक जी को ग्रामीण विकास और स्थानीय समस्याओं के सटीक विश्लेषण का गहरा अनुभव है।