
खींवसर और श्रीबालाजी में भाईचारे की जीत: 3 पंचायतों में निर्विरोध चुने गए सरपंच और वार्ड पंच
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नागौर जिले में लोकतंत्र की एक बेहद प्रेरणादायक तस्वीर सामने आई है। जहाँ खींवसर और श्रीबालाजी पंचायत समिति की तीन ग्राम पंचायतों में आपसी सहमति और भाईचारे की ऐसी मिसाल पेश की गई है जो पूरे राजस्थान के लिए चर्चा का विषय बन गई है। शुक्रवार को नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के साथ ही इन पंचायतों में चुनावी शोर की जगह उत्सव का माहौल है।
निर्विरोध निर्वाचन से गांवों में उत्सव
हमारे खींवसर संवाददाता के अनुसार, इन तीन ग्राम पंचायतों में कुल 11,088 मतदाताओं ने बिना किसी मतदान के अपने प्रतिनिधियों का चयन कर लिया है। इन पंचायतों में न केवल सरपंच, बल्कि सभी 33 वार्ड पंचों का चुनाव भी आम सहमति से निर्विरोध संपन्न हुआ है। ग्रामीणों की इस एकजुटता ने विकास और सद्भाव का एक नया संदेश दिया है।
इन पंचायतों में हुआ निर्विरोध चयन
- ग्राम पंचायत दूजासर (खींवसर): यहाँ पहली बार बनी इस पंचायत में शिवनारायण मेघवाल को निर्विरोध सरपंच चुना गया है। यहाँ के सभी 13 वार्ड पंच भी निर्विरोध चुने गए। इस पंचायत में रोहिणी, बीरमसर और कांकरिया गांव शामिल हैं।
- ग्राम पंचायत घोड़ारण (श्रीबालाजी): नवगठित ग्राम पंचायत घोड़ारण में किसान रामूराम सारण को सर्वसम्मति से सरपंच की जिम्मेदारी सौंपी गई है। यहाँ सभी 9 वार्ड पंच भी निर्विरोध चुने गए हैं।
- ग्राम पंचायत रोहिणी (श्रीबालाजी): इस पुरानी पंचायत में उद्यमी और भामाशाह भागीरथराम डूडी को सरपंच चुना गया है। यहाँ के 11 वार्ड पंचों का चयन भी बिना चुनाव के आपसी सहमति से हुआ है।
जायल और अमरपुरा में भी दिखी एकजुटता
लोकतंत्र की इस बयार का असर जायल पंचायत समिति में भी देखने को मिला है, जहाँ 7 ग्राम पंचायतों में वार्ड पंचों का चुनाव निर्विरोध हुआ है। वहीं, अमरपुरा ग्राम पंचायत में भी सभी 13 वार्डों में ग्रामीणों ने एकजुटता दिखाते हुए वार्ड पंचों को निर्विरोध निर्वाचित किया है। आगामी 25 अक्टूबर को इन पंचायतों में उपसरपंच का चुनाव भी आपसी सहमति से कराने की योजना बनाई गई है।
यहाँ नहीं बन पाई सहमति, आज होगा मतदान
जहाँ एक तरफ निर्विरोध चयन की खुशी है, वहीं नागौर तहसील की खेतास और श्रीबालाजी की गोरेरा ग्राम पंचायत में समीकरण अंतिम समय में बदल गए। इन दोनों पंचायतों में ग्रामीण पहले सहमति बना चुके थे, लेकिन नामांकन के दौरान पेंच फंसने के कारण अब शनिवार को लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत मतदान करवाया जाएगा।
ग्रामीणों का कहना है कि निर्विरोध चुनाव से न केवल आपसी मनमुटाव खत्म होता है, बल्कि चुनाव में होने वाला अनावश्यक खर्च भी बचता है, जिसे गाँव के विकास कार्यों में लगाया जा सकता है।
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Written & Verified By
नागौर के युवा पत्रकार और डिजिटल मीडिया विशेषज्ञ। अभिषेक जी को ग्रामीण विकास और स्थानीय समस्याओं के सटीक विश्लेषण का गहरा अनुभव है।