
नागौर: नाथूराम मिर्धा की 105वीं जयंती पर शिक्षा-समाजसेवा का संदेश
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नागौर में किसान नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री नाथूराम मिर्धा की 105वीं जयंती श्रद्धापूर्वक मनाई गई। मानासर चौराहा स्थित नाथूराम मिर्धा चैरिटेबल ट्रस्ट परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम में जिले भर से आए गणमान्य व्यक्तियों, ट्रस्ट पदाधिकारियों और बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य मिर्धा के जीवन, संघर्ष और उनके आदर्शों को याद करना तथा उनकी शिक्षा और समाजसेवा के प्रति अटूट समर्पण के संदेश को जन-जन तक पहुंचाना था।
हमारे नागौर संवाददाता के अनुसार, जयंती समारोह की शुरुआत नाथूराम मिर्धा के आदमकद चित्र पर माल्यार्पण और पुष्प अर्पित कर हुई। इस दौरान उपस्थित सभी लोगों ने उन्हें नमन करते हुए उनके योगदान को याद किया। कार्यक्रम में वक्ताओं ने नाथूराम मिर्धा के दूरदर्शी विचारों और राजस्थान के विकास में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। विशेष रूप से किसानों के हितों की रक्षा, ग्रामीण उत्थान और सहकारिता आंदोलन को मजबूत करने में उनके प्रयासों की सराहना की गई।
शिक्षा के प्रति समर्पण
नाथूराम मिर्धा ने जीवनभर शिक्षा के महत्व पर जोर दिया। उनका मानना था कि समाज का वास्तविक विकास तभी संभव है जब हर व्यक्ति शिक्षित हो। इसी प्रेरणा के चलते उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण कार्य किए और अनेक शिक्षण संस्थाओं की स्थापना में सहयोग दिया। जयंती समारोह में इस बात पर विशेष बल दिया गया कि युवाओं को मिर्धा के दिखाए मार्ग पर चलते हुए शिक्षा को प्राथमिकता देनी चाहिए। ट्रस्ट के सदस्यों ने कहा कि शिक्षा ही वह माध्यम है जो व्यक्ति को आत्मनिर्भर बनाकर समाज और राष्ट्र के निर्माण में सक्षम बनाती है।
- नाथूराम मिर्धा का जन्म 1921 में नागौर जिले के कुचेरा गांव में हुआ था।
- उन्होंने अपनी राजनीतिक यात्रा पंचायती राज से शुरू की और केंद्रीय मंत्री तक का सफर तय किया।
- किसान हितों की वकालत करने के लिए उन्हें 'किसान मसीहा' के रूप में जाना जाता है।
- सहकारिता आंदोलन को बढ़ावा देने में उनका योगदान अविस्मरणीय है।
समाज सेवा का पर्याय
पूर्व केंद्रीय मंत्री नाथूराम मिर्धा केवल एक राजनेता नहीं थे, बल्कि वे समाज सेवा के एक सच्चे प्रतीक थे। उन्होंने अपना पूरा जीवन समाज के वंचित और गरीब तबके के उत्थान के लिए समर्पित कर दिया। उनकी निष्ठा, ईमानदारी और जनसेवा की भावना आज भी लाखों लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। जयंती समारोह में वक्ताओं ने मिर्धा की निस्वार्थ सेवा भावना का स्मरण करते हुए वर्तमान पीढ़ी से आग्रह किया कि वे समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को समझें और जनहित के कार्यों में सक्रिय रूप से योगदान दें। यह बताया गया कि ट्रस्ट उनके आदर्शों को आगे बढ़ाते हुए विभिन्न सामाजिक गतिविधियों को संचालित करता है, जिनमें शिक्षा सहायता, स्वास्थ्य शिविर और ग्रामीण विकास परियोजनाएं शामिल हैं।
ट्रस्ट की भूमिका और भावी पीढ़ी
नाथूराम मिर्धा चैरिटेबल ट्रस्ट उन्हीं सिद्धांतों पर कार्य कर रहा है जिनकी नींव मिर्धा ने रखी थी। ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने बताया कि वे शिक्षा को बढ़ावा देने और समाज सेवा के कार्यों को निरंतर जारी रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं। इस अवसर पर विद्यार्थियों को भी प्रेरित किया गया कि वे नाथूराम मिर्धा के जीवन से प्रेरणा लेकर अपने लक्ष्यों को प्राप्त करें और एक जागरूक नागरिक के रूप में राष्ट्र निर्माण में अपना योगदान दें। जयंती समारोह में उपस्थित लोगों ने एक सुर में कहा कि नाथूराम मिर्धा के आदर्श आज भी प्रासंगिक हैं और आने वाली पीढ़ियों को भी उनसे प्रेरणा मिलती रहेगी। उनके विचार और कार्य हमें हमेशा समाज के प्रति हमारे कर्तव्यों का बोध कराते रहेंगे।
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Written & Verified By
नागौर के युवा पत्रकार और डिजिटल मीडिया विशेषज्ञ। अभिषेक जी को ग्रामीण विकास और स्थानीय समस्याओं के सटीक विश्लेषण का गहरा अनुभव है।