
बरणगांव सरपंच चुनाव में रोचक मुकाबला: सांसद हनुमान बेनीवाल की दो भाभियां आमने-सामने
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नागौर पंचायत समिति के अंतर्गत आने वाले बरणगांव में इस बार का सरपंच चुनाव बेहद रोमांचक मोड़ ले चुका है। राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) सुप्रीमो और नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल के पैतृक गांव में सरपंच पद की कुर्सी के लिए 6 महिला प्रत्याशी मैदान में हैं, जिनमें स्वयं सांसद बेनीवाल की दो भाभियां भी एक-दूसरे के खिलाफ चुनाव लड़ रही हैं। इस चुनावी मुकाबले ने पूरे क्षेत्र में राजनीतिक सरगर्मियां बढ़ा दी हैं और हर किसी की निगाहें बरणगांव पर टिकी हुई हैं।
हमारे नागौर संवाददाता के अनुसार, इस दिलचस्प चुनावी रण में सांसद हनुमान बेनीवाल के बड़े भाई स्वर्गीय रामप्रसाद बेनीवाल की पत्नी मीरा बेनीवाल और दूसरे बड़े भाई प्रेमसुख बेनीवाल की पत्नी राजबाला बेनीवाल शामिल हैं। दोनों ही बेनीवाल परिवार की सदस्य होने के नाते गांव में अपनी-अपनी दावेदारी पेश कर रही हैं, जिससे यह मुकाबला पारिवारिक प्रतिष्ठा का विषय भी बन गया है।
बेनीवाल परिवार का चुनावी इतिहास और दावेदारी
बरणगांव में बेनीवाल परिवार का राजनीति में गहरा दखल रहा है। स्वर्गीय रामप्रसाद बेनीवाल, जो सांसद हनुमान बेनीवाल के बड़े भाई थे, करीब 25 साल पहले बरणगांव के सरपंच रह चुके हैं। उनकी पत्नी मीरा बेनीवाल अब उसी विरासत को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से चुनावी मैदान में हैं। दूसरी ओर, प्रेमसुख बेनीवाल की पत्नी राजबाला बेनीवाल भी अपनी मजबूत दावेदारी के साथ मतदाताओं के बीच सक्रिय हैं।
- मीरा बेनीवाल: स्वर्गीय रामप्रसाद बेनीवाल की पत्नी, जो पूर्व सरपंच भी रह चुके हैं।
- राजबाला बेनीवाल: प्रेमसुख बेनीवाल की पत्नी, जो सक्रिय रूप से चुनावी अभियान में जुटी हैं।
- कुल 6 महिला प्रत्याशी मैदान में हैं, जिनमें अन्य चार उम्मीदवार भी अपनी किस्मत आजमा रही हैं।
2,970 मतदाता करेंगे भाग्य का फैसला
बरणगांव और उससे जुड़े बूढ़ी व अर्जुनपुरा क्षेत्र को मिलाकर कुल 2,970 मतदाता हैं, जिनके हाथों में इस बार के सरपंच का भाग्य तय होगा। मतदाताओं के बीच दोनों भाभियों के साथ-साथ अन्य प्रत्याशियों द्वारा भी सघन जनसंपर्क किया जा रहा है। गांव के विकास और स्थानीय मुद्दों पर बहस छिड़ी हुई है। इस चुनाव को बेनीवाल परिवार के पुराने राजनीतिक घटनाक्रमों से भी जोड़कर देखा जा रहा है। पिछले विधानसभा चुनाव में मीरा बेनीवाल की बेटी डॉ. अनीता बेनीवाल भी हनुमान बेनीवाल के सामने चुनाव लड़ी थीं, वहीं खींवसर विधानसभा उपचुनाव में हनुमान बेनीवाल की पत्नी कनिका बेनीवाल को हार का सामना करना पड़ा था।
सांसद बेनीवाल की चुप्पी
हालांकि, इन सबके बीच एक महत्वपूर्ण बात यह है कि सांसद हनुमान बेनीवाल ने अब तक आधिकारिक तौर पर अपनी किसी भी भाभी के समर्थन की पुष्टि नहीं की है। उनकी यह चुप्पी गांव के मतदाताओं के बीच कई तरह की अटकलों को जन्म दे रही है। माना जा रहा है कि बेनीवाल परिवार के सदस्यों के आमने-सामने आने से गांव का राजनीतिक माहौल गरमा गया है और हर कोई यह जानने को उत्सुक है कि इस बार बरणगांव की जनता किसे अपना मुखिया चुनती है। यह चुनाव न केवल स्थानीय स्तर पर बल्कि जिला स्तर पर भी चर्चा का विषय बना हुआ है, क्योंकि इसमें एक बड़े राजनीतिक परिवार की प्रतिष्ठा दांव पर लगी हुई है।
यह चुनाव दर्शाता है कि स्थानीय निकाय चुनाव किस तरह से बड़े राजनीतिक परिवारों के भीतर भी दिलचस्प मुकाबले पैदा कर सकते हैं। हमारी टीम लगातार इस महत्वपूर्ण चुनाव पर अपनी पैनी निगाह बनाए हुए है और पल-पल की अपडेट आप तक पहुंचाएगी।
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Written & Verified By
नागौर के युवा पत्रकार और डिजिटल मीडिया विशेषज्ञ। अभिषेक जी को ग्रामीण विकास और स्थानीय समस्याओं के सटीक विश्लेषण का गहरा अनुभव है।