
मेड़ता: 75 यात्री आज सम्मेद शिखरजी की निशुल्क तीर्थयात्रा पर होंगे रवाना
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नागौर-पाली-सूरत निवासी सुमनदेवी-महेंद्र कुमार, पूजा-गौरव एवं जिहान चौरड़िया परिवार अपनी अनूठी पहल के तहत इस वर्ष भी श्रद्धालुओं को पूर्णतः नि:शुल्क सम्मेद शिखरजी की तीर्थयात्रा करा रहा है। पिछले 17 वर्षों से यह परिवार समाजबंधुओं को पुण्य का भागीदार बनाने की भावना के साथ यह सेवा कर रहा है।
पारिवारिक सदस्य संजय पींचा ने बताया कि इस पुनीत पहल के माध्यम से देशभर के विभिन्न शहरों में रहने वाले लगभग 800 से 900 जैन समाजबंधु अब तक सिद्धक्षेत्र सम्मेद शिखरजी की वंदना कर चुके हैं। संघपति महेंद्र चौरड़िया ने जानकारी देते हुए कहा कि उन्हें इस निस्वार्थ सेवा की प्रेरणा अपने पिता तेजराज चौरड़िया, माता कमलादेवी चौरड़िया और भाई नितिन चौरड़िया के संस्कारों से प्राप्त हुई है।
इस वर्ष की यात्रा का विवरण
- इस वर्ष 11 नवंबर की रात मेड़ता रोड बाइपास जंक्शन से 70 से 75 यात्रियों का संघ रवाना होगा।
- यह संघ विभिन्न जैन तीर्थों की वंदना करते हुए 19 नवंबर की सुबह जोधपुर में अपनी यात्रा का समापन करेगा।
- इस यात्रा में संपन्न और सामान्य वर्ग के सभी यात्री एक समान भाव से यात्रा करते हैं।
'पंचतीर्थी यात्रा' का विशेष आयोजन
परिवार द्वारा प्रति 3 से 4 वर्ष के अंतराल में सम्मेद शिखरजी के साथ-साथ वृहद 'पंचतीर्थी यात्रा' का भी आयोजन किया जाता है। इस बार की 8 दिवसीय यात्रा में श्रद्धालुओं को झारखंड और बिहार के 11 ऐतिहासिक एवं अतिशयकारी जैन तीर्थों के दर्शन का अवसर मिलेगा। इन पवित्र स्थानों में भगवान महावीर की साधना भूमि ऋजु बालिका, मंदारगिरी, देवधर, चंपापुरी, लछुआड़ (जन्मभूमि), क्षत्रिय कुंड, पावापुरी (निर्वाण भूमि), गुणावा, कुंडलपुर, नालंदा तथा राजगीर जैसे प्रमुख स्थान शामिल हैं।
सम्मेद शिखरजी का महत्व
जैन दर्शन में सम्मेद शिखरजी (पारसनाथ पर्वत) को विश्व का सबसे बड़ा सिद्धक्षेत्र माना जाता है। मान्यता है कि चौबीसी के 24 तीर्थंकरों में से 20 तीर्थंकरों ने इसी पवित्र पर्वत की चोटियों (टोंकों) से मोक्ष प्राप्त किया था।
आध्यात्मिक और प्रारंभिक तीर्थ स्थल
नागौर, पाली, सूरत आदि से आने वाले सभी यात्रियों का मुख्य केंद्र मेड़ता रोड जंक्शन रहता है। ट्रेन या वाहन से रवाना होने से पूर्व सभी श्रद्धालु प्रसिद्ध प्राचीन श्री फलवृद्धि पार्श्वनाथ जैन तीर्थ पहुंचते हैं। वहां सामूहिक महाआरती, भक्ति-संगीत और विशेष पूजा-अर्चना के साथ यात्रा की मंगल कामना की जाती है। इस प्रकार मेड़ता रोड जंक्शन सिर्फ एक रेलवे पड़ाव न रहकर इस निशुल्क संघ का आध्यात्मिक और प्रारंभिक तीर्थ स्थल बन चुका है।
हमारे मेड़ता संवाददाता के अनुसार...
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Written & Verified By
नागौर के युवा पत्रकार और डिजिटल मीडिया विशेषज्ञ। अभिषेक जी को ग्रामीण विकास और स्थानीय समस्याओं के सटीक विश्लेषण का गहरा अनुभव है।