
पर्यावरण प्रेमी पूनमचंद भाटी के निधन पर नागौर में 1 दिन की शोक बैठक
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हमारे नागौर संवाददाता के अनुसार, नागौर के जाने-माने पर्यावरण प्रेमी और सामाजिक सरोकार से जुड़े पूनमचंद भाटी (वासुदेव) का गत 22 अक्टूबर को निधन हो गया। उनके निधन से न केवल उनके परिवार को गहरा सदमा लगा है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में भी एक बड़ी क्षति हुई है। पूनमचंद भाटी ने अपना पूरा जीवन जीव-दया और पर्यावरण की सेवा में समर्पित कर दिया था।
सादगी और दूरदर्शिता का अनूठा निर्णय
सती कुआं निवासी भाटी के परिवार ने एक अभूतपूर्व और दूरदर्शी निर्णय लेते हुए, मृत्यु के उपरांत आयोजित होने वाली पारंपरिक लंबी शोक बैठकों की प्रथा को समाप्त करने का फैसला किया है। रूढ़िवादी परंपराओं को तोड़ते हुए, परिवार ने केवल 28 अक्टूबर को एक दिवसीय शोक बैठक आयोजित करने का निर्णय लिया है। परिवार का मानना है कि इस सादगीपूर्ण पहल से न केवल समय और धन की बचत होगी, बल्कि दिवंगत के प्रति सम्मान और श्रद्धांजलि में कोई कमी नहीं आएगी। यह निर्णय सामाजिक रीति-रिवाजों में एक सकारात्मक बदलाव का प्रतीक है।
जीव-दया और सेवा के पर्याय
पूनमचंद भाटी की पहचान सिर्फ एक समाज सुधारक के रूप में ही नहीं थी, बल्कि वे एक सच्चे जीव-दया प्रेमी थे। वे हमेशा जरूरतमंद मरीजों के इलाज के लिए जयपुर, जोधपुर और अहमदाबाद जैसे शहरों तक सफर करते थे, और अस्पतालों के चक्कर लगाते थे। उनके परिवार ने मोक्षधाम के लिए 1 बीघा जमीन भी दान की है, जो उनके परोपकारी कार्यों का एक और प्रमाण है।
मोक्षधाम में 2000 से अधिक वृक्षों का निर्माण
लगभग 10 वर्ष पूर्व, पूनमचंद भाटी ने रतन सागर मोक्षधाम में वृक्षारोपण का कार्य प्रारंभ किया था। उनकी दशकों की अथक मेहनत और लगन का परिणाम है कि आज मोक्षधाम में 2000 से अधिक विशाल और घने वृक्ष लहलहा रहे हैं। ये वृक्ष न केवल पर्यावरण को शुद्ध करते हैं, बल्कि अनेकों पक्षियों और छोटे जीवों के लिए आश्रय स्थली भी बने हुए हैं।
पशु-पक्षियों के लिए अटूट प्रेम
उनकी जीव-दया का एक और महत्वपूर्ण पहलू यह था कि वे प्रतिदिन मोक्षधाम में पक्षियों और छोटे जीवों के लिए लगभग एक क्विंटल अनाज (बाजरा, मूंग, मोठ, चने, सूरजमुखी के बीज, ब्रेड आदि) की व्यवस्था करते थे। साथ ही, 30 से अधिक पानी के बर्तन भी भरे जाते थे, ताकि भीषण गर्मी में जीवों को पानी की कमी न हो। आज, यह मोक्षधाम मोर, कबूतर, तोते, बत्तख और गिलहरियों जैसे अनगिनत जीवों का प्रिय मिलन स्थल बन गया है, जो पूनमचंद भाटी की सेवा भावना का जीवंत उदाहरण है।
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Written & Verified By
नागौर के युवा पत्रकार और डिजिटल मीडिया विशेषज्ञ। अभिषेक जी को ग्रामीण विकास और स्थानीय समस्याओं के सटीक विश्लेषण का गहरा अनुभव है।