
मिड-डे मील के बर्तन बदलने के लिए ₹71.90 करोड़ का बजट अटका
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प्रदेश के 53,738 सरकारी स्कूलों में मिड-डे मील बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाले बर्तन अब पुराने हो चुके हैं। ये बर्तन वर्ष 2009 में खरीदे गए थे और अब इन्हें बदलने की आवश्यकता है। हालांकि, बर्तनों की खरीद के लिए 71.90 करोड़ रुपए का बजट अभी तक अटका हुआ है। इस संबंध में यह स्पष्ट नहीं है कि बर्तनों की खरीद सीधे स्कूल स्तर पर की जाएगी या फिर यह प्रक्रिया शिक्षा विभाग की ओर से पूरी की जाएगी।
सरकारी स्कूलों में मिड-डे मील की स्थिति
सरकारी स्कूलों में मिड-डे मील योजना के तहत छात्रों को पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराया जाता है। इस योजना के सफल संचालन के लिए साफ-सफाई और गुणवत्तापूर्ण बर्तनों का होना अत्यंत आवश्यक है। वर्ष 2009 में खरीदे गए बर्तन अब काफी पुराने हो चुके हैं और कई स्कूलों में इनकी स्थिति चिंताजनक है। इन बर्तनों के लगातार उपयोग और रखरखाव की कमी के कारण ये खराब होने लगे हैं, जिससे योजना की गुणवत्ता पर भी प्रश्नचिह्न लग सकता है।
बजट की प्रतीक्षा
बच्चों के स्वास्थ्य और शिक्षा के अधिकार को ध्यान में रखते हुए, पुराने बर्तनों को बदलने के लिए लगभग 71.90 करोड़ रुपए के बजट की आवश्यकता बताई गई है। यह बजट पिछले काफी समय से स्वीकृत होने की प्रतीक्षा में है। बजट के अभाव में स्कूलों को पुराने और जर्जर बर्तनों के साथ ही काम चलाना पड़ रहा है। अधिकारियों का कहना है कि प्रक्रिया को जल्द से जल्द पूरा करने के प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन अंतिम निर्णय और राशि जारी होने का इंतजार है।
भविष्य की योजनाएं
- प्रदेश के 53,738 सरकारी स्कूलों में मिड-डे मील के लिए बर्तन बदले जाने हैं।
- लगभग 71.90 करोड़ रुपए के बजट की आवश्यकता है।
- बर्तनों की खरीद प्रक्रिया (स्कूल स्तर या विभाग स्तर) पर निर्णय लंबित है।
- वर्ष 2009 में खरीदे गए थे वर्तमान में उपयोग हो रहे बर्तन।
यह मामला बच्चों के स्वास्थ्य और मिड-डे मील योजना की गुणवत्ता से जुड़ा है, इसलिए उम्मीद की जा रही है कि संबंधित विभाग इस पर जल्द ध्यान देगा और आवश्यक बजट जारी कर पुराने बर्तनों को बदलवाने की व्यवस्था करेगा।
हमारे नागौर संवाददाता के अनुसार...
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नागौर के युवा पत्रकार और डिजिटल मीडिया विशेषज्ञ। अभिषेक जी को ग्रामीण विकास और स्थानीय समस्याओं के सटीक विश्लेषण का गहरा अनुभव है।