
सिर्फ 12 वोटर्स, गूगल मैप पर भी गायब: सारगांवास बना चर्चा का विषय
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नागौर जिले का एक अनोखा गांव, सारगांवास, सरकारी रिकॉर्ड में तो दर्ज है, लेकिन हकीकत में यह सिर्फ एक गली तक सिमट कर रह गया है। इस गांव में मात्र दो परिवारों के कुल 12 मतदाता निवास करते हैं। इस बार के पंचायत चुनावों में, इन 12 वोटर्स के लिए एक अलग पोलिंग बूथ स्थापित किया गया है, जो गांव को चर्चा का केंद्र बना रहा है।
एक गली में सिमटा गांव, 12 वोटर्स का भविष्य दांव पर
सारंगावास, राजस्व ग्राम सथाना कलां के बीच एक गली में बसा है। बुनियादी सुविधाओं और सरकारी योजनाओं के अभाव के चलते यहां मतदाताओं की संख्या लगातार घटती गई है। पूर्व में जहां 60 मतदाता थे, वहीं अब केवल 12 ही शेष बचे हैं, जिन्होंने अपने नाम अन्य पंचायतों में जुड़वा लिए हैं। पंचायती राज चुनाव के मद्देनजर, इन 12 मतदाताओं के लिए ग्राम पंचायत सैसड़ा मुख्यालय पर एक अलग से पोलिंग बूथ की व्यवस्था की गई है, जहाँ निर्वाचन विभाग की पूरी टीम तैनात रहेगी।
गांव की पहचान पर प्रश्नचिह्न: न पहचान बोर्ड, न गूगल मैप पर मौजूदगी
गांव में न तो कोई पहचान या साइन बोर्ड लगा है और न ही गूगल मैप्स पर इसकी लोकेशन दर्ज है। ऐसे में बाहरी व्यक्ति के लिए यह पता लगाना भी मुश्किल है कि वे सारगांवास गांव में ही खड़े हैं। ग्रामीणों के अनुसार, राजस्व ग्राम सारगांवास, सथाना कलां ग्राम पंचायत के बीच में एक गली में बसा होने के कारण, भले ही यह सैसड़ा ग्राम पंचायत का हिस्सा है, लेकिन पंचायत समिति भेरूंदा और ग्राम पंचायत सैसड़ा के अंतर्गत आता है। वहीं, सथाना कलां की पंचायत समिति रियांबड़ी है। इस सीमांकन के कन्फ्यूजन के कारण, यहां के मतदाताओं को अपने कार्यों के लिए दूर जाना पड़ता है, जिस कारण कई लोगों ने अपने वोट कटवाकर दूसरी ग्राम पंचायतों में जुड़वा लिए हैं।
कन्फ्यूजन के कारण प्रत्याशी भी करते हैं परहेज
ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत समिति और जिला परिषद चुनाव के दौरान प्रत्याशियों में भी इस गांव के मतदाताओं को लेकर असमंजस की स्थिति बनी रहती है। इसी वजह से आजादी के बाद से आज तक सारंगावास गांव में विधानसभा चुनाव के प्रत्याशी भी वोट मांगने नहीं पहुंचे हैं, जिसका सीधा असर गांव के विकास पर पड़ा है।
भूतपूर्व सरपंच के प्रयास भी रहे बेअसर
सैंड़ा के पूर्व सरपंच नेमाराम ने बताया कि सारंगावास राजस्व गांव सैंड़ा ग्राम पंचायत में होने के बावजूद सथाना कलां ग्राम पंचायत के बीच में पड़ता है। प्रशासनिक स्तर पर सुधार के कई प्रयास किए गए, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला। मनरेगा योजना के तहत सारंगावास के ग्रामीणों को पंजीकृत करवाया गया था और ग्राम जेजासनी में तालाब में काम भी शुरू करवाया गया था। लेकिन सारंगावास से लगभग 3 किलोमीटर की दूरी होने के कारण कोई भी वहां काम करने नहीं आया। ग्रामीण आज भी मूलभूत सुविधाओं के लिए प्रयासरत हैं।
मुख्य बिंदु:
- गांव में सिर्फ 2 परिवार निवास करते हैं, कुल 12 मतदाता हैं।
- 12 वोटर्स के लिए अलग से पोलिंग बूथ की व्यवस्था की गई है।
- गांव की गूगल मैप पर कोई लोकेशन दर्ज नहीं है।
- सीमांकन को लेकर कन्फ्यूजन के कारण प्रत्याशी वोट मांगने नहीं आते।
- आजादी के बाद से अब तक विधानसभा प्रत्याशी यहां नहीं पहुंचे।
हमारे नागौर संवाददाता के अनुसार...
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नागौर के युवा पत्रकार और डिजिटल मीडिया विशेषज्ञ। अभिषेक जी को ग्रामीण विकास और स्थानीय समस्याओं के सटीक विश्लेषण का गहरा अनुभव है।