
50 की उम्र में 34 किमी दौड़े रामप्रसाद, टांकला पहुंचे
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नागौर. 50 वर्षीय व्याख्याता रामप्रसाद कासनियां ने 3 घंटे में 34 किलोमीटर की दूरी तय कर टांकला स्थित किशन तक पहुंचने का एक अनूठा कारनामा कर दिखाया है। उनकी यह दौड़ युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत बनी हुई है, जो दर्शाती है कि यदि मन में कुछ करने का जुनून हो तो कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं है। कासनियां का जन्म समय से पहले होने के बावजूद, उन्होंने विपरीत परिस्थितियों पर विजय प्राप्त की और आज वे एक अनुशासित धावक के रूप में अपनी पहचान बना रहे हैं।
अदम्य साहस और आस्था का संगम
रामप्रसाद कासनियां का जन्म समय से पूर्व (सात माह में) हुआ था और उन्होंने दो वर्ष की आयु के बाद चलना प्रारंभ किया। बुटाटी स्थित चतुरदासजी महाराज के प्रति उनकी गहरी आस्था है। इसी आस्था के चलते उन्होंने यह संकल्प लिया था कि वे देश में कहीं भी 42.195 किलोमीटर की मैराथन दौड़ पूरी करने से पहले अपनी इस उपलब्धि को चतुरदासजी महाराज के चरणों में अर्पित करेंगे।
प्रमुख दौड़ों में उत्कृष्ट प्रदर्शन
कासनियां ने अपने दौड़ने के जुनून को विभिन्न मैराथन और हाफ मैराथन में साबित किया है। उनकी कुछ प्रमुख उपलब्धियां इस प्रकार हैं:
- अहमदाबाद हाफ मैराथन (24 नवंबर 2024): 1 घंटा 46 मिनट में दौड़ पूरी कर आयु वर्ग में 12वां स्थान प्राप्त किया।
- जोधपुर हाफ मैराथन (15 दिसंबर 2024): 1 घंटा 40 मिनट में दौड़ पूरी कर आयु वर्ग में सातवां स्थान हासिल किया।
- नागौर-बुटाटी मैराथन (19 अक्टूबर 2025): 42.195 किलोमीटर की इस दौड़ को 4 घंटे 6 मिनट में सफलतापूर्वक पूरा किया।
- द बॉर्डर मैराथन, जैसलमेर (6 दिसंबर 2025): 50 किलोमीटर की दौड़ 6 घंटे 10 मिनट में पूरी की। 509 धावकों के बीच उन्होंने 97वां स्थान पाया, भले ही पैर की मांसपेशियों में खिंचाव था।
- जयपुर हाफ मैराथन (1 फरवरी 2026): 2 घंटे 4 मिनट में दौड़ पूरी की। इस दौड़ में नागौर के आकोड़ा निवासी सुरेंद्र गोदारा ने भी भाग लिया था।
- मुकाम हाफ मैराथन (15 फरवरी 2026): अपनी आयु वर्ग में तीसरा स्थान प्राप्त किया। इस मैराथन में उनकी प्रेरणा से नागौर के 12 धावकों ने भी हिस्सा लिया।
अनुशासन और स्वस्थ जीवनशैली
रामप्रसाद कासनियां का दिन सुबह 4:30 बजे से ही शुरू हो जाता है। वे प्रतिदिन स्टेडियम में 5-6 किलोमीटर दौड़ लगाते हैं, जिसके बाद एक घंटा व्यायाम और योग करते हैं। अपने आहार में वे अंकुरित चने-मूंग को शामिल करते हैं और दिन में आधा-आधा लीटर दूध का सेवन करते हैं। वे विद्यालय आने-जाने के लिए तथा अन्य सामाजिक कार्यक्रमों में भाग लेने के लिए भी साइकिल का प्रयोग करते हैं, जो उनकी स्वस्थ जीवनशैली का परिचायक है।
प्रेरणा के स्रोत
शुरुआत में अकेले दौड़ने वाले कासनियां आज 20-30 धावकों के समूह के लिए प्रेरणा बन गए हैं, जो उनके साथ नियमित रूप से अभ्यास करते हैं। वर्ष 2025 के योग दिवस पर, उन्होंने शहरवासियों के सहयोग से नागौर में पहली हाफ मैराथन का सफल आयोजन भी करवाया था।
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Written & Verified By
नागौर के युवा पत्रकार और डिजिटल मीडिया विशेषज्ञ। अभिषेक जी को ग्रामीण विकास और स्थानीय समस्याओं के सटीक विश्लेषण का गहरा अनुभव है।