
नागौर मेडिकल कॉलेज में दूसरा देहदान: सुशीला देवी के परिजनों ने सौंपा पार्थिव शरीर
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हमारे नागौर संवाददाता के अनुसार, मानवता और सेवा भावना की एक अनुपम मिसाल पेश करते हुए नागौर निवासी स्वर्गीय सुशीला देवी ललवानी के परिजनों ने उनके निधन के उपरांत उनका पार्थिव शरीर राजकीय मेडिकल कॉलेज, नागौर को समर्पित किया है। यह राजकीय मेडिकल कॉलेज, नागौर में किया गया दूसरा देहदान है, जो चिकित्सा शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण योगदान है। इस पहल से न केवल भावी चिकित्सकों को लाभ मिलेगा, बल्कि समाज में देहदान के प्रति जागरूकता भी बढ़ेगी।
मानवता की मिसाल: सुशीला देवी का देहदान
सुशीला देवी ललवानी, जो स्वर्गीय चंचलमल ललवानी की धर्मपत्नी थीं, का यह देहदान उनके परिवार द्वारा लिया गया एक साहसिक और प्रेरणादायक निर्णय है। उनके पुत्र सुभाष ललवानी, पुत्रवधू विजया ललवानी, पौत्र शुभम, पौत्रवधू पमिता, पौत्र सौरभ ललवानी, बेटी चंद्रकला और दामाद दिलीप मुनोत ने मिलकर यह पुण्य कार्य संपन्न किया। परिवार का कहना है कि मृत्यु के बाद भी देहदान के माध्यम से दूसरों के जीवन को बेहतर बनाने और चिकित्सा शिक्षा में योगदान दिया जा सकता है, जो एक अतुलनीय सेवा है। यह कार्य समाज को यह संदेश देता है कि जीवन के बाद भी हम अपनी देह के माध्यम से ज्ञान और जीवन को बचा सकते हैं।
मेडिकल छात्रों को मिलेगा लाभ
राजकीय मेडिकल कॉलेज, नागौर के प्रिंसिपल एवं कंट्रोलर ऑफिस के अनुसार, सुशीला देवी ललवानी का देहदान मेडिकल छात्रों के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगा।
- मानव शरीर की समझ: मेडिकल स्टूडेंट्स को मानव शरीर की बनावट और जटिल संरचना को गहराई से समझने में मदद मिलेगी।
- व्यावहारिक ज्ञान: किताबों में पढ़े गए सिद्धांतों को वास्तविक मानव शरीर पर लागू करने और प्रेक्टिकल नॉलेज प्राप्त करने का अवसर मिलेगा।
- चिकित्सा प्रशिक्षण और अनुसंधान: यह देहदान चिकित्सा प्रशिक्षण को मजबूत करेगा और विभिन्न बीमारियों के कारणों एवं उनके उपचार पर होने वाले अनुसंधान में भी सहायता प्रदान करेगा।
यह एक ऐसी प्रक्रिया है जिससे भावी डॉक्टरों को रोग निदान और उपचार की गहरी समझ विकसित करने में मदद मिलती है, जिससे वे भविष्य में बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान कर सकेंगे।
देहदान के प्रति बढ़ रही जागरूकता और आवेदन
नागौर के राजकीय मेडिकल कॉलेज में देहदान के प्रति जागरूकता तेजी से बढ़ रही है। कॉलेज प्रशासन ने बताया है कि अब तक कुल 13 व्यक्तियों के देहदान के आवेदन प्राप्त हो चुके हैं। यह संख्या यह दर्शाती है कि समाज में लोग इस नेक कार्य के महत्व को समझ रहे हैं और स्वेच्छा से आगे आ रहे हैं।
कॉलेज के प्रिंसिपल ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि सुशीला देवी ललवानी का देहदान चिकित्सा शिक्षा और अनुसंधान के लिए अमूल्य योगदान है। उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह के कार्य समाज में देहदान के प्रति सकारात्मक सोच पैदा करते हैं और अन्य लोगों को भी इस महान कार्य के लिए प्रेरित करते हैं। मेडिकल कॉलेज प्रशासन देहदान करने वाले परिवारों के प्रति आभार व्यक्त करता है और समाज से अपील करता है कि वे इस पुनीत कार्य में सहयोग करें ताकि भावी डॉक्टरों को बेहतर शिक्षा मिल सके और चिकित्सा विज्ञान उन्नति कर सके। यह दान न केवल एक व्यक्ति की विरासत को अमर करता है बल्कि अनगिनत जिंदगियों को बचाने में भी सहायक होता है।
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Written & Verified By
नागौर के युवा पत्रकार और डिजिटल मीडिया विशेषज्ञ। अभिषेक जी को ग्रामीण विकास और स्थानीय समस्याओं के सटीक विश्लेषण का गहरा अनुभव है।