
नागौर: नकली बीज और खाद पर अब डिजिटल प्रहार, डाक विभाग से लैब तक होगी निगरानी
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हमारे नागौर संवाददाता के अनुसार, जिले के किसानों को नकली और अमानक बीज, उर्वरक व कीटनाशकों की मार से बचाने के लिए कृषि विभाग ने गुणवत्ता जांच प्रणाली में बड़ा बदलाव किया है। अब बीज और खाद के नमूने लेने से लेकर उनकी जांच रिपोर्ट आने तक की पूरी प्रक्रिया को फेसलेस, कॉन्टैक्टलेस और पूरी तरह से डिजिटल बनाया जा रहा है।
क्या है नई डिजिटल प्रक्रिया?
कृषि विभाग की नई व्यवस्था के तहत अब नमूनों के साथ मानवीय हस्तक्षेप को खत्म किया जा रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य बिचौलियों और मिलावटखोरों पर नकेल कसना है। पूरी व्यवस्था को पारदर्शी बनाने के लिए निम्नलिखित कदम उठाए गए हैं:
- डाक विभाग की भूमिका: कृषि अधिकारी द्वारा लिए गए नमूनों को अब डाक विभाग के माध्यम से सीधे सरकारी लैब भेजा जाएगा, जिससे नमूना बदलने की आशंका समाप्त हो जाएगी।
- फेसलेस और डिजिटल प्रणाली: सैंपलिंग के समय से ही पूरी जानकारी डिजिटल पोर्टल पर दर्ज की जाएगी, ताकि कोई भी अधिकारी या डीलर इसमें फेरबदल न कर सके।
- कॉन्टैक्टलेस जांच: नमूना लेने वाली टीम और लैब के बीच कोई सीधा संपर्क नहीं होगा, जिससे निष्पक्ष रिपोर्ट आना सुनिश्चित होगा।
- त्वरित रिपोर्ट: डिजिटल प्रक्रिया होने के कारण जांच रिपोर्ट जल्दी तैयार होगी, जिससे किसानों को समय रहते सही गुणवत्ता वाली सामग्री की पहचान हो सकेगी।
किसानों को मिलेगा सीधा लाभ
अक्सर देखा गया है कि नकली बीजों के कारण बुवाई के बाद फसल खराब होने से किसान आर्थिक संकट में घिर जाते हैं। नई प्रणाली से उर्वरकों और कीटनाशकों की शुद्धता सुनिश्चित होगी। कृषि विभाग के अनुसार, यदि नमूना मानक के विपरीत पाया जाता है, तो संबंधित डीलर और कंपनी पर तत्काल कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। यह कदम कृषि आदानों की गुणवत्ता को लेकर दशकों से चली आ रही समस्याओं के समाधान के रूप में देखा जा रहा है।
नागौर जिले में यह प्रणाली लागू होने से कृषि व्यवसाय में पारदर्शिता आएगी और सीधे तौर पर किसानों का भरोसा बढ़ेगा। विभाग की यह पहल आने वाले रबी सीजन के लिए काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
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Written & Verified By
नागौर के युवा पत्रकार और डिजिटल मीडिया विशेषज्ञ। अभिषेक जी को ग्रामीण विकास और स्थानीय समस्याओं के सटीक विश्लेषण का गहरा अनुभव है।