
गोगेलाव में हनुमान सिंह देवड़ा की पुण्यतिथि पर दौड़ प्रतियोगिता, 165 छात्रों ने लिया भाग
Listen News
Audio Summary
हमारे नागौर संवाददाता के अनुसार, गोगेलाव में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पूर्व नागौर विभाग संघचालक एवं शारीरिक शिक्षक हनुमान सिंह देवड़ा की प्रथम पुण्यतिथि पर एक प्रेरणादायक व्याख्यान माला और खेल प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। इस अवसर पर 1500, 800 और 400 मीटर दौड़ प्रतियोगिताओं में कुल 165 छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया, जिन्होंने देवड़ा के आदर्शों को स्मरण करते हुए अपनी शारीरिक क्षमताओं का प्रदर्शन किया। यह कार्यक्रम समाज में उत्कृष्ट योगदान देने वाले व्यक्तियों के स्मरण और उनकी प्रेरणा को जीवंत रखने का एक महत्वपूर्ण प्रयास था।
समर्पण भाव और संस्कृति संरक्षण पर जोर
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के विभाग प्रचारक गिरधारी लाल ने अपने संबोधन में कहा कि समाज उन्हीं व्यक्तियों को याद रखता है, जो अपने कार्यों से एक विशिष्ट पहचान बनाते हैं। उन्होंने जोर दिया कि समर्पण का भाव ही एक सच्चे कार्यकर्ता की मूल पहचान है। गिरधारी लाल ने उपस्थित जनसमूह और विद्यार्थियों को अपने पुरखों की गौरवशाली संस्कृति को अपनाने और देश, समाज तथा संस्कृति के उत्थान के लिए निरंतर कार्य करने हेतु प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि हनुमान सिंह देवड़ा जैसे व्यक्तित्वों का जीवन हमें इन्हीं मूल्यों की शिक्षा देता है। मुख्य अतिथि सरपंच रामचंद्र गोदारा ने भी अपने विचार साझा किए और युवा प्रतिभागियों को उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं देते हुए पुरस्कार प्रदान किए।
खेल प्रतियोगिता में युवाओं का उत्साह
देवड़ा की पुण्यतिथि पर आयोजित इस कार्यक्रम का एक प्रमुख आकर्षण विभिन्न आयु वर्गों में हुई दौड़ प्रतियोगिताएं थीं। 17 वर्ष से अधिक और 17 वर्ष से कम आयु वर्ग में छात्र-छात्राओं के लिए अलग-अलग मुकाबले हुए। इन प्रतियोगिताओं में कुल 165 विद्यार्थियों ने अपनी प्रतिभा और दमखम का प्रदर्शन किया। विजेताओं को प्रशस्ति पत्र और स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर कुल 42 प्रतिभावान खिलाड़ियों को उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए पुरस्कृत किया गया। हमारी टीम ने पाया कि विद्यार्थियों में खेल भावना और अनुशासन का अद्भुत संगम देखने को मिला।
दौड़ प्रतियोगिता के विजेता:
- 1500 मीटर (छात्र): विजय राज
- 1500 मीटर (छात्रा): गोमती
- 800 मीटर (छात्र): विक्रम
- 800 मीटर (छात्रा): आरती
- 400 मीटर (छात्र): जितेंद्र
- 400 मीटर (छात्रा): आरती
पूर्व छात्रों ने सुनाए संस्मरण, रखी स्टेडियम के नामकरण की मांग
इस भावुक अवसर पर भवानी सिंह सिंगड़, बागाराम जांगू, शिम्भुराम चोटिया, सीताराम सियाग, रामप्रसाद कासनिया और श्रवण कुमार वैष्णव सहित कई पूर्व विद्यार्थियों ने हनुमान सिंह देवड़ा के साथ बिताए अविस्मरणीय पलों को याद किया। उन्होंने देवड़ा के व्यक्तित्व, उनके मार्गदर्शन और उनके शिक्षा के प्रति समर्पण को सराहा। पूर्व छात्रों ने सुझाव दिया कि इस प्रकार का आयोजन प्रतिवर्ष किया जाना चाहिए ताकि नई पीढ़ी उनके जीवन से प्रेरणा ले सके। इसके साथ ही, उन्होंने स्थानीय स्टेडियम का नाम हनुमान सिंह देवड़ा के नाम पर रखने की मार्मिक मांग भी की, ताकि उनकी स्मृति चिरस्थायी रहे और आने वाली पीढ़ियां उनके योगदान को याद कर सकें।
हनुमान सिंह देवड़ा: एक शिक्षक और संघचालक का प्रेरणादायी जीवन
हनुमान सिंह देवड़ा गोगेलाव में एक समर्पित शारीरिक शिक्षक के रूप में कार्यरत थे और साथ ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पूर्व नागौर विभाग संघचालक भी थे। उनका जीवन अनुशासन, राष्ट्रभक्ति और निस्वार्थ सेवा का प्रतीक था। देवड़ा ने वर्ष 1995 में शिक्षा विभाग में नौकरी जॉइन की और 29 वर्षों तक सरकारी सेवा में रहे, इस दौरान उन्होंने सैकड़ों विद्यार्थियों के जीवन को नई दिशा दी। उनके पढ़ाए हुए 100 से अधिक विद्यार्थी आज सेना, पुलिस और शिक्षक जैसे महत्वपूर्ण पदों पर कार्यरत होकर देश सेवा कर रहे हैं। वर्ष 2024 में उनकी सेवानिवृत्ति के अवसर पर स्वयं तत्कालीन शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने 250 किलोमीटर का सफर तय कर उनके घर पहुंचकर पैर छूकर आशीर्वाद लिया था, जो उनके विराट व्यक्तित्व और समाज में उनके सम्मान का परिचायक है। कार्यक्रम के अंत में देवड़ा के बड़े भाई भीवराज देवड़ा, पुत्र निखिल, पुत्रियां सुरभि व पीकांक्षा सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण और विद्यार्थी उपस्थित रहे। देवड़ा के चित्र के समक्ष पुष्पांजलि अर्पित की गई और वंदे मातरम् के राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ, जिसने उपस्थित सभी लोगों को एक अविस्मरणीय संदेश दिया।
📲 खबर पसंद आई?
अपने दोस्तों के साथ शेयर करें!

Written & Verified By
नागौर के युवा पत्रकार और डिजिटल मीडिया विशेषज्ञ। अभिषेक जी को ग्रामीण विकास और स्थानीय समस्याओं के सटीक विश्लेषण का गहरा अनुभव है।