
शिक्षा विभाग के स्कूलों में सजावट के निर्देश, शिक्षक संघ ने मांगा बजट
Posted on 24 अक्टूबर 2026
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हमारे नागौर संवाददाता के अनुसार...
दीपावली के अवसर पर सरकारी स्कूलों को चमकाने के लिए शिक्षा विभाग ने प्रदेशभर में एक विशेष अभियान शुरू किया है। इस अभियान के तहत स्कूलों से 3 नवंबर तक कचरा हटाने और 6 नवंबर से दीयों व लाइटिंग से सजावट करने के निर्देश जारी किए गए हैं। हालांकि, रंग-रोगन, मरम्मत और सजावट के लिए अलग से बजट का स्पष्ट प्रावधान न होने से शिक्षकों में चिंता है।
अभियान की रूपरेखा और चुनौतियाँ
माध्यमिक शिक्षा निदेशालय द्वारा जारी निर्देशों में जनसहयोग और श्रमदान पर विशेष जोर दिया गया है। स्कूल फैसिलिटी ग्रांट (SFG) की राशि का उपयोग भी केवल निर्धारित मदों में ही किया जा सकता है, जिससे इस अभियान के लिए अतिरिक्त धन की व्यवस्था मुश्किल हो गई है। 'कबाड़ हटाओ, श्रमदान लाओ' पहल के तहत टूटे-फूटे फर्नीचर की नीलामी और ग्रामीणों, विद्यार्थियों व संस्थाओं के सहयोग से स्कूलों को व्यवस्थित करने की योजना है।
विशेष रूप से सफाई और कचरा हटाने जैसे कार्यों को श्रमदान से कराने की बात कही गई है। लेकिन, भवनों की मरम्मत, रंग-रोगन और रोशनी की व्यवस्था के लिए धन की आवश्यकता होगी। पिछले वर्ष स्कूलों की जरूरत के अनुसार 15 हजार से 2 लाख रुपए तक के खर्च का प्रावधान किया गया था, लेकिन इस बार ऐसे स्पष्ट प्रावधान का अभाव है।
शिक्षक संघ की मांग
राजस्थान पंचायती राज एवं माध्यमिक शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष शेर सिंह चौहान ने इस अभियान की अवधारणा की सराहना करते हुए पर्याप्त बजट जारी करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि खासकर आदिवासी क्षेत्रों में जनसहयोग से ऐसे कार्य कराना व्यावहारिक नहीं है। वित्तीय सहायता के बिना शिक्षकों से सफाई, मरम्मत, रंग-रोगन और सजावट की अपेक्षा करना कठिन है। उन्होंने यह भी बताया कि स्कूलों में शौचालयों की मरम्मत के लिए भी पुरानी कंपोजिट ग्रांट पर ही निर्भर रहना पड़ रहा है।
उद्देश्य और क्रियान्वयन में बाधा
इस अभियान का दोहरा उद्देश्य है: पहला, स्कूलों की सफाई और सजावट कर उन्हें दीपावली के लिए तैयार करना, और दूसरा, विद्यार्थियों में अपने विद्यालय के प्रति अपनत्व, गौरव और जिम्मेदारी की भावना विकसित करना। 22 अक्टूबर से दीपावली तक चरणबद्ध तरीके से स्कूलों को व्यवस्थित करने का अवसर मिलेगा, लेकिन अतिरिक्त बजट की स्पष्ट व्यवस्था के अभाव में, संस्था प्रधानों के लिए इन निर्देशों को प्रभावी ढंग से जमीन पर उतारना एक बड़ी चुनौती साबित हो सकता है।
SFG ग्रांट का सीमित उपयोग
स्कूल फैसिलिटी ग्रांट का उपयोग मुख्य रूप से शिक्षण सामग्री, पेयजल व्यवस्था, पंखे-ट्यूबलाइट की मरम्मत, बिजली बिल, खेल गतिविधियों और उपकरणों की छोटी-मोटी मरम्मत जैसे कार्यों के लिए ही किया जा सकता है। उपलब्ध नियमों के अनुसार, भवन की बड़ी मरम्मत, पुताई, और सजावट जैसे कार्य इस ग्रांट से नहीं कराए जा सकते, जिससे सजावट अभियान के लिए धन जुटाना और भी मुश्किल हो गया है।
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Written & Verified By
नागौर के युवा पत्रकार और डिजिटल मीडिया विशेषज्ञ। अभिषेक जी को ग्रामीण विकास और स्थानीय समस्याओं के सटीक विश्लेषण का गहरा अनुभव है।


