
राजस्थान शिक्षा विभाग का बिगड़ा ढांचा: पदों की रिक्तता से शिक्षकों और कामकाज पर बढ़ा भारी दबाव
Posted on 20 अक्टूबर 2026
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हमारे नागौर संवाददाता के अनुसार, राजस्थान के शिक्षा विभाग में प्रशासनिक पदों पर लंबे समय से डीपीसी (विभागीय पदोन्नति समिति) प्रक्रिया अटकी होने के कारण प्रदेश का प्रशासनिक ढांचा बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। स्थिति यह है कि एक ही अधिकारी को दो से तीन पदों का अतिरिक्त कार्यभार संभालना पड़ रहा है, जिसका सीधा असर स्कूलों की मॉनिटरिंग और प्रशासनिक निर्णयों पर पड़ रहा है।
क्या है स्थिति और किसे हो रहा नुकसान?
बीकानेर निदेशालय और जयपुर सचिवालय के बीच फाइलों के उलझने से जमीनी स्तर पर अधिकारियों की भारी कमी हो गई है। वर्तमान आंकड़ों के अनुसार:
- जिला शिक्षा अधिकारी (DEO): 534 में से 131 पद खाली हैं।
- उप निदेशक (CDEO): 67 में से 32 पद रिक्त हैं।
- संयुक्त निदेशक: 18 में से 9 पद खाली पड़े हैं।
- अतिरिक्त निदेशक: 3 में से 1 पद पर कोई नियुक्त नहीं है।
शिक्षकों और प्रशासनिक कार्यों पर असर
अतिरिक्त कार्यभार के कारण अधिकारियों को अपने मूल कार्यालय के साथ-साथ अन्य कार्यालयों का कामकाज भी देखना पड़ रहा है, जिससे फील्ड विजिट और स्कूलों का निरीक्षण नाममात्र का रह गया है। कई वरिष्ठ अधिकारी पदोन्नति के इंतजार में ही सेवानिवृत्त हो रहे हैं, जिससे उनके अनुभव का लाभ विभाग को नहीं मिल पा रहा है।
क्या चाहते हैं शिक्षक संगठन?
शिक्षक संगठनों का स्पष्ट मानना है कि सरकार को डीओपी के वर्ष 2008 के सर्कुलर के नियम 7.1 के तहत तत्काल रिव्यू और रिवीजन सूची जारी करनी चाहिए। यदि रिक्त पदों पर समय रहते पात्र अधिकारियों की नियुक्ति होती है, तो प्रशासनिक व्यवस्था में कसावट आएगी और शिक्षकों की समस्याओं का समाधान त्वरित गति से हो सकेगा।
आम जनता और शिक्षकों के लिए क्या है मतलब?
शिक्षा विभाग में प्रशासनिक स्तर पर निर्णय लेने वाली कड़ी कमजोर होने से आपके बच्चों के स्कूल के निरीक्षण, समय पर होने वाली विभागीय अनुमतियां और शिक्षकों के वेतन या सेवा संबंधी कार्यों में देरी की संभावना बनी रहती है। जब तक पद रिक्त रहेंगे, तब तक फाइलों की गति धीमी रहेगी। हमारी टीम विभाग की अगली डीपीसी बैठकों और शासन सचिवालय के नए आदेशों पर लगातार नजर बनाए हुए है।
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Written & Verified By
नागौर के युवा पत्रकार और डिजिटल मीडिया विशेषज्ञ। अभिषेक जी को ग्रामीण विकास और स्थानीय समस्याओं के सटीक विश्लेषण का गहरा अनुभव है।


