
राजस्थान के स्कूलों में 'शुगर बोर्ड': कोल्ड ड्रिंक नहीं, नींबू पानी!
Posted on 2 नवंबर 2026
Listen News
Audio Summary
हमारे **नागौर** संवाददाता के अनुसार, राजस्थान के स्कूलों में अब बच्चों के स्वास्थ्य और खानपान की आदतों को सुधारने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। शिक्षा विभाग ने स्कूलों में 'शुगर बोर्ड' लगाने का निर्णय लिया है, जिससे छात्र-छात्राओं को कोल्ड ड्रिंक्स, चॉकलेट और बिस्किट जैसे उत्पादों में छिपी चीनी की मात्रा के बारे में जानकारी मिल सकेगी।
'शुगर बोर्ड' का उद्देश्य और कार्यप्रणाली
यह पहल स्कूली बच्चों में तेजी से बढ़ते डायबिटीज और मोटापे के मामलों को ध्यान में रखते हुए की गई है। 'मिशन मधुहारी' के तहत, राजस्थान में टाइप-1 डायबिटीज से पीड़ित बच्चों की संख्या दिसंबर 2025 में 1,700 से बढ़कर अब 2,817 हो गई है। 'शुगर बोर्ड' पर विभिन्न खाद्य और पेय पदार्थों में मौजूद चीनी की मात्रा को चम्मचों के रूप में दर्शाया जाएगा। इससे बच्चे यह समझ सकेंगे कि वे कितना चीनी का सेवन कर रहे हैं।
- चीनी का हिसाब: शुगर बोर्ड पर कोल्ड ड्रिंक, पैकेट बंद बिस्किट और चॉकलेट जैसे लोकप्रिय उत्पादों में चीनी की मात्रा चम्मचों में दिखाई जाएगी।
- स्वास्थ्य जोखिम: बच्चों को ज्यादा चीनी के सेवन से होने वाली बीमारियों जैसे टाइप-2 डायबिटीज, मोटापा, दांतों की समस्याएं, हृदय रोग और उच्च रक्तचाप के बारे में जागरूक किया जाएगा।
- जागरूकता का लक्ष्य: इस पहल का मुख्य उद्देश्य बच्चों को डराना नहीं, बल्कि कम उम्र से ही उन्हें स्वस्थ खानपान के प्रति जागरूक करना है, ताकि वे भविष्य में बेहतर निर्णय ले सकें।
टीचरों की भूमिका और अभिभावकों की भागीदारी
शिक्षक बच्चों को कोल्ड ड्रिंक जैसे मीठे पेय पदार्थों की जगह नींबू पानी और छाछ पीने के फायदे बताएंगे। इसी तरह, पैकेट बंद स्नैक्स और जंक फूड के बजाय ताजे फल, मेवे और अंकुरित अनाज को आहार में शामिल करने के महत्व पर जोर दिया जाएगा।
इसके साथ ही, अभिभावकों को भी बच्चों के टिफिन में संतुलित आहार भेजने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया जाएगा कि बच्चों को घर से ही स्वस्थ भोजन मिले, जिससे उनकी खानपान की आदतें सुधर सकें। अभिभावकों को उत्पादों में अतिरिक्त चीनी की जानकारी देकर खरीदारी और टिफिन के लिए बेहतर विकल्प चुनने में मदद मिलेगी।
स्कूलों में 'शुगर बोर्ड' का स्थान
यह 'शुगर बोर्ड' स्कूल परिसर में ऐसी जगह पर लगाया जाएगा जहां छात्रों की आसानी से नजर पड़े, जैसे कि नोटिस बोर्ड, कॉरिडोर या कैंटीन क्षेत्र में। क्लास टीचर इन बोर्डों पर दी गई जानकारी को बच्चों को समझाएंगे, जिससे यह पहल अधिक प्रभावी हो सके। यह निर्णय बीकानेर निदेशालय के निर्देशानुसार लागू किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य राज्यभर के स्कूलों में स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देना है।
📲 खबर पसंद आई?
अपने दोस्तों के साथ शेयर करें!

Written & Verified By
नागौर के युवा पत्रकार और डिजिटल मीडिया विशेषज्ञ। अभिषेक जी को ग्रामीण विकास और स्थानीय समस्याओं के सटीक विश्लेषण का गहरा अनुभव है।


