
नागौर: चुनावी ड्यूटी के बाद शिक्षकों को मिलेगा अगले दिन अवकाश? बड़ी खबर
Posted on 21 अक्टूबर 2026
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नागौर। चुनावी प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले शिक्षकों के लिए एक बड़ी खबर सामने आ रही है। मतदान संपन्न होने के बाद चुनाव सामग्री जमा कराने में देर रात तक जूझने वाले शिक्षकों के लिए अब अगले दिन अवकाश की मांग जोर पकड़ रही है। हमारी टीम को मिली जानकारी के अनुसार, विभिन्न शिक्षक संगठनों ने इस संबंध में राज्य सरकार और शिक्षा विभाग से तत्काल राहत प्रदान करने की अपील की है।
शिक्षकों की समस्या: देर रात तक कागजी कार्यवाही और शारीरिक थकावट
मतदान दिवस पर सुबह से देर रात तक की निरंतर ड्यूटी के बाद, शिक्षकों को ईवीएम (इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन) और अन्य चुनाव सामग्री को संग्रहण केंद्र पर जमा कराने के लिए घंटों इंतजार करना पड़ता है। अक्सर यह प्रक्रिया अगली सुबह तक जारी रहती है, जिससे कर्मचारियों को शारीरिक और मानसिक रूप से अत्यधिक थकान का सामना करना पड़ता है। लगातार कई घंटों के परिश्रम और देर रात तक की भागदौड़ के बाद, अगले दिन शिक्षकों का विद्यालयों में उपस्थित होकर शिक्षण कार्य करना चुनौतीपूर्ण हो जाता है। इस स्थिति में, शिक्षकों के स्वास्थ्य और उनके कार्य प्रदर्शन दोनों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। इसी को देखते हुए, शिक्षक समुदाय में मतदान के बाद अगले दिन अनिवार्य अवकाश की मांग बुलंद हो रही है।
बीएलओ के भत्ते में वृद्धि और बुजुर्ग शिक्षकों को छूट की मांग
केवल चुनावी ड्यूटी के बाद अवकाश ही नहीं, बल्कि बूथ लेवल अधिकारियों (बीएलओ) के लिए भी विशेष मांगों पर विचार करने का आग्रह किया गया है। बीएलओ वर्ष भर घर-घर जाकर मतदाता सूची को अद्यतन करने, नए नाम जोड़ने और हटाने का महत्वपूर्ण कार्य करते हैं। मतदान दिवस पर भी वे बूथ पर अपनी सेवाएं देते हैं। शिक्षक संगठनों का कहना है कि उनके वर्ष भर के अथक परिश्रम और मतदान दिवस की सेवाओं को देखते हुए, उनके भत्ते में भी उचित वृद्धि की जानी चाहिए।
- अवकाश की मांग: मतदान सामग्री जमा कराने के बाद अगले दिन शिक्षकों को अवकाश दिया जाए।
- बीएलओ भत्ता वृद्धि: बूथ लेवल अधिकारियों के वर्ष भर के कार्य और मतदान दिवस की सेवाओं को देखते हुए उनके भत्ते में वृद्धि की जाए।
- बुजुर्ग कर्मचारियों को छूट: 55 वर्ष या उससे अधिक आयु के तथा गंभीर बीमारियों से जूझ रहे कर्मचारियों को निर्वाचन कार्य से मुक्त रखा जाए ताकि उन्हें अनावश्यक परेशानी से बचाया जा सके।
हमारी टीम ने इस मुद्दे पर कई शिक्षकों से बात की। उन्होंने बताया कि चुनावी ड्यूटी राष्ट्र निर्माण का महत्वपूर्ण कार्य है, लेकिन इसमें लगने वाले समय और परिश्रम को देखते हुए सरकार को कर्मचारियों के हित में निर्णय लेना चाहिए। विशेष रूप से, जो शिक्षक लंबी दूरी से आकर ड्यूटी करते हैं और सामग्री जमा करने के बाद अपने घर लौटते हैं, उनके लिए अगले दिन तुरंत ड्यूटी पर लौटना बेहद कठिन हो जाता है।
राज्य सरकार और शिक्षा निदेशालय से अपील
इन सभी मांगों को राज्य सरकार, जयपुर सचिवालय और बीकानेर निदेशालय के समक्ष प्रभावी ढंग से उठाया गया है। शिक्षक संगठनों को उम्मीद है कि सरकार उनकी जायज मांगों पर गंभीरता से विचार करेगी और जल्द ही इस संबंध में कोई सकारात्मक निर्णय लेगी। यह कदम न केवल शिक्षकों के मनोबल को बढ़ाएगा बल्कि उनकी कार्यक्षमता में भी सुधार लाएगा। हम लगातार इस मामले पर नजर बनाए हुए हैं और जैसे ही कोई आधिकारिक घोषणा होती है, आपको तुरंत सूचित करेंगे।
हमारे नागौर संवाददाता के अनुसार...
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Written & Verified By
नागौर के युवा पत्रकार और डिजिटल मीडिया विशेषज्ञ। अभिषेक जी को ग्रामीण विकास और स्थानीय समस्याओं के सटीक विश्लेषण का गहरा अनुभव है।


