
प्रतियोगी परीक्षाओं की किताबें अटकीं, छात्रों की जेब पर बढ़ रहा बोझ
Posted on 24 अक्टूबर 2026
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जयपुर: राजस्थान हिंदी ग्रंथ अकादमी की नई पुस्तकें प्रकाशित होने में हो रही देरी से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों को बड़ा झटका लगा है। विषयवार एक्सपर्ट कमेटियों के गठन की मंजूरी में सरकारी स्तर पर हो रही देरी के कारण प्रकाशन का कार्य रुका हुआ है।
नई किताबों का प्रकाशन क्यों अटका है?
दरअसल, अकादमी की नई पुस्तकों के प्रकाशन के लिए विषय विशेषज्ञों की एक्सपर्ट कमेटियों का गठन किया जाना है। इन कमेटियों की मंजूरी के बाद ही पुस्तकों की विषयवस्तु को अंतिम रूप दिया जा सकेगा और उन्हें प्रकाशन के लिए भेजा जा सकेगा। अकादमी ने विभिन्न विश्वविद्यालयों से विषय विशेषज्ञों के नाम मांगे थे, जो कुछ हद तक प्राप्त भी हो गए हैं। हालांकि, अब इन नामों को सरकारी स्तर पर अंतिम मंजूरी देने की प्रक्रिया में विलंब हो रहा है। इस देरी के चलते प्रकाशन कार्य पूरी तरह से ठप पड़ा हुआ है।
छात्रों पर सीधा असर: महंगी किताबों का सहारा
अकादमी की पुस्तकें अपनी कम कीमत के लिए जानी जाती हैं, जिससे यह प्रतियोगी छात्रों के बजट में आसानी से फिट हो जाती हैं। नई किताबों के प्रकाशन में हो रही देरी का सीधा असर विद्यार्थियों पर पड़ रहा है। उन्हें अकादमी की सस्ती और विश्वसनीय पुस्तकें उपलब्ध नहीं हो पा रही हैं। ऐसे में, उन्हें निजी प्रकाशकों की महंगी पुस्तकें खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है, जिससे उनकी आर्थिक परेशानी बढ़ रही है।
पुरानी किताबों के सहारे अकादमी
नई पुस्तकों की प्रक्रिया अटकी होने के कारण, राजस्थान हिंदी ग्रंथ अकादमी फिलहाल पुरानी और पहले से लंबित संस्करणों का ही प्रकाशन कर रही है। इससे पुरानी पेंडेंसी को कुछ हद तक कम किया जा रहा है, लेकिन नई पुस्तकों के प्रकाशन की दिशा में कोई प्रगति नहीं हो पा रही है। यह स्थिति बनी रहती है तो नए साल में भी यह समस्या बनी रह सकती है।
जानें किन परीक्षाओं के लिए हैं महत्वपूर्ण
राजस्थान हिंदी ग्रंथ अकादमी की पुस्तकें सिविल सेवा, शिक्षक भर्ती परीक्षाओं (जैसे REET), और अन्य विभिन्न प्रकार की प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले अभ्यर्थियों के बीच बहुत लोकप्रिय हैं। विभिन्न विश्वविद्यालयों के पाठ्यक्रमों के विद्यार्थी भी इन पुस्तकों का उपयोग करते हैं।
क्या है समाधान?
विभागीय अधिकारियों का कहना है कि एक्सपर्ट कमेटियों के गठन की प्रक्रिया जारी है। गठन पूरा होते ही लंबित पुस्तकों की समीक्षा कर उन्हें जल्द से जल्द प्रकाशन के लिए भेजा जाएगा।
हमारे नागौर संवाददाता के अनुसार...
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Written & Verified By
नागौर के युवा पत्रकार और डिजिटल मीडिया विशेषज्ञ। अभिषेक जी को ग्रामीण विकास और स्थानीय समस्याओं के सटीक विश्लेषण का गहरा अनुभव है।


