
लाडनूं में 72 शारीरिक शिक्षकों को मिला प्रतिभा निखारने का प्रशिक्षण, 'खेलो राजस्थान' को बढ़ावा
Posted on 26 अक्टूबर 2026
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हमारे लाडनूं संवाददाता के अनुसार, विद्यार्थियों में खेल प्रतिभाओं को समय पर पहचान कर उन्हें वैज्ञानिक और निष्पक्ष प्रशिक्षण देने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह कार्यशाला राजस्थान राज्य क्रीड़ा परिषद और शिक्षा विभाग के संयुक्त तत्वावधान में संचालित ‘प्रतिभा कार्यक्रम’ के तहत जौहरी राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में संपन्न हुई। इस प्रशिक्षण में लाडनूं ब्लॉक के कुल 72 शारीरिक शिक्षकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया, जिसका सीधा लाभ क्षेत्र के हजारों स्कूली विद्यार्थियों को मिलेगा।
शिक्षा विभाग, बीकानेर निदेशालय की खेल नीति के अनुरूप, इस कार्यशाला का मुख्य लक्ष्य राज्य में खेल संस्कृति को मजबूत करना और जमीनी स्तर पर छिपी हुई खेल प्रतिभाओं को सामने लाना था। हमारी टीम का मानना है कि ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम न केवल शिक्षकों के कौशल को बढ़ाते हैं, बल्कि छात्रों को भी अपनी क्षमता को पहचानने और विकसित करने का अवसर प्रदान करते हैं।
खेल प्रतिभाओं को पहचानने पर विशेष जोर
कार्यशाला के मुख्य अतिथि, सीबीईओ बजरंगसिंह राठौड़ ने अपने संबोधन में शिक्षकों को प्रेरित करते हुए कहा कि प्रत्येक विद्यार्थी में कोई न कोई खेल प्रतिभा अवश्य छिपी होती है। हमारा कर्तव्य है कि हम उसे समय रहते पहचानें और सही दिशा में मार्गदर्शन करें। उन्होंने 'खेलो राजस्थान' अभियान के तहत अधिक से अधिक विद्यार्थियों का पंजीकरण सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए, ताकि कोई भी प्रतिभाशाली छात्र अवसर से वंचित न रहे। यह पहल जयपुर सचिवालय की खेल नीति को ग्रामीण स्तर तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण साबित होगी।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि शारीरिक शिक्षा केवल खेल कूद तक सीमित नहीं है, बल्कि यह विद्यार्थियों में अनुशासन, नेतृत्व क्षमता और टीम वर्क जैसे महत्वपूर्ण गुणों का विकास करती है। इन गुणों से युक्त विद्यार्थी न केवल अच्छे खिलाड़ी बनते हैं, बल्कि एक जिम्मेदार नागरिक भी बनते हैं।
शारीरिक शिक्षा: अनुशासन और नेतृत्व का माध्यम
कार्यशाला की अध्यक्षता करते हुए प्रधानाचार्य मनीष सिंघाटिया ने शारीरिक शिक्षा के व्यापक महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि यह केवल शरीर को स्वस्थ रखने का माध्यम नहीं, बल्कि विद्यार्थियों में अनुशासन, नेतृत्व क्षमता और सामाजिक सामंजस्य विकसित करने का एक सशक्त उपकरण है। उप प्राचार्य प्रकाश स्वामी ने ‘प्रतिभा कार्यक्रम’ के उद्देश्यों और उसके दूरगामी प्रभावों की विस्तृत जानकारी दी, जिससे उपस्थित शिक्षकों को योजना के प्रति गहरी समझ विकसित हुई।
तकनीकी प्रशिक्षण और मूल्यांकन पद्धतियां
कार्यशाला में मास्टर ट्रेनर कमला गोदारा ने शारीरिक माप और विभिन्न खेल परीक्षणों के तकनीकी पहलुओं पर गहन प्रशिक्षण प्रदान किया। प्रशिक्षणार्थियों को निम्नलिखित महत्वपूर्ण परीक्षणों की बारीकियों से अवगत कराया गया:
- 30 मीटर स्प्रिंट: गति और त्वरित प्रतिक्रिया का मूल्यांकन।
- ब्रॉड जंप (लंबी कूद): पैरों की ताकत और विस्फोटक शक्ति का मापन।
- वर्टिकल जंप (ऊंची कूद): ऊर्ध्वाधर कूदने की क्षमता का आकलन।
- शटल रन: चपलता और दिशा बदलने की गति का परीक्षण।
- शारीरिक माप: वैज्ञानिक तरीके से शरीर के विभिन्न मापों का सही आकलन।
इन परीक्षणों के माध्यम से शारीरिक शिक्षक विद्यार्थियों की खेल क्षमता का निष्पक्ष और सटीक मूल्यांकन कर पाएंगे, जिससे उन्हें उनकी रुचि और प्रतिभा के अनुसार सही खेल विधा में प्रशिक्षित किया जा सके। कार्यशाला का सफल संचालन प्राध्यापक हर्षवर्धन नांदू ने किया, जिन्होंने पूरे सत्र के दौरान समन्वय बनाए रखा।
यह पहल न केवल लाडनूं ब्लॉक बल्कि पूरे नागौर जिले में खेल प्रतिभाओं को बढ़ावा देने में मील का पत्थर साबित होगी। हमारी टीम लगातार ऐसे प्रयासों पर नजर बनाए हुए है जो राज्य के शिक्षा और खेल क्षेत्र को नई ऊंचाइयों पर ले जा सकें।
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Written & Verified By
नागौर के युवा पत्रकार और डिजिटल मीडिया विशेषज्ञ। अभिषेक जी को ग्रामीण विकास और स्थानीय समस्याओं के सटीक विश्लेषण का गहरा अनुभव है।


