
राजस्थान के सरकारी स्कूलों में अब बिना आधार कार्ड भी मिलेगा प्रवेश: शिक्षा विभाग का बड़ा फैसला
Posted on 25 अक्टूबर 2026
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नागौर, राजस्थान। प्रदेश के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले लाखों बच्चों और उनके अभिभावकों के लिए एक बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। शिक्षा विभाग, राजस्थान सरकार ने अब सरकारी विद्यालयों में आधार कार्ड के बिना भी बच्चों को प्रवेश देने का निर्णय लिया है। इस महत्वपूर्ण फैसले से यह सुनिश्चित किया गया है कि किसी भी बच्चे को केवल आधार कार्ड न होने के कारण शिक्षा के अधिकार से वंचित न रहना पड़े। हमारी टीम लगातार इस संबंध में अपडेट जुटा रही थी, और अब यह स्पष्ट निर्देश जारी कर दिए गए हैं।
बीकानेर निदेशालय से जारी हुए निर्देश
शिक्षा का अधिकार सुनिश्चित
बीकानेर स्थित प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय ने इस संबंध में संयुक्त निदेशक, स्कूल शिक्षा को विस्तृत निर्देश जारी किए हैं। निदेशालय ने स्पष्ट तौर पर कहा है कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) के तहत प्रत्येक बच्चे को शिक्षा प्राप्त करने का अधिकार है, और आधार कार्ड की अनुपलब्धता इस अधिकार में बाधा नहीं बननी चाहिए। यह निर्णय विशेष रूप से उन ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों के बच्चों के लिए फायदेमंद होगा, जहां आधार कार्ड बनवाने की प्रक्रिया अभी भी जटिल या पहुंच से बाहर है।
शिक्षा विभाग पूरे सत्र के दौरान कक्षा पहली से आठवीं तक के विद्यार्थियों को प्रवेश दे रहा है। इस दौरान यह देखने में आया था कि आधार कार्ड की अनिवार्यता के चलते कई बच्चे नामांकन से वंचित रह जाते थे। इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए, विभाग ने यह उदार नीति अपनाई है ताकि प्रदेश में शिक्षा के सार्वभौमीकरण के लक्ष्य को प्राप्त किया जा सके।
अभिभावकों को मिली बड़ी राहत
यह फैसला उन हजारों अभिभावकों के लिए बड़ी राहत लेकर आया है जो अपने बच्चों का सरकारी स्कूल में दाखिला कराने के लिए आधार कार्ड की जटिलताओं से जूझ रहे थे। विशेषकर, प्रवासी श्रमिकों के बच्चे या ऐसे परिवार जो विभिन्न कारणों से आधार कार्ड नहीं बनवा पाए थे, उन्हें अब बिना किसी रुकावट के शिक्षा प्रणाली में शामिल होने का अवसर मिलेगा। हमारी टीम ने कई अभिभावकों से बात की, जिन्होंने इस फैसले का गर्मजोशी से स्वागत किया है। उनका मानना है कि यह कदम बच्चों के भविष्य को सुरक्षित करेगा और उन्हें समान अवसर प्रदान करेगा।
नामांकन बढ़ाने पर जोर
राजस्थान सरकार शिक्षा के क्षेत्र में निरंतर सुधारों के लिए प्रतिबद्ध है। इसी कड़ी में, विद्यालयों में नामांकन दर बढ़ाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। आधार कार्ड की अनिवार्यता हटाकर, विभाग ने नामांकन में आने वाली एक बड़ी बाधा को दूर कर दिया है। इससे उम्मीद है कि सरकारी स्कूलों में बच्चों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि होगी, जिससे शिक्षा के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने में मदद मिलेगी। यह पहल शिक्षा की गुणवत्ता और पहुंच दोनों को बेहतर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
क्या हैं नए प्रवेश के नियम?
- आधार की अनिवार्यता समाप्त: अब किसी भी बच्चे को आधार कार्ड न होने के कारण प्रवेश से वंचित नहीं किया जाएगा।
- पूरे सत्र में प्रवेश: कक्षा पहली से आठवीं तक के लिए पूरे शैक्षणिक सत्र के दौरान प्रवेश प्रक्रिया जारी रहेगी।
- शिक्षा का अधिकार सर्वोच्च: शिक्षा के अधिकार अधिनियम के प्रावधानों का पूर्णतः पालन किया जाएगा।
- अन्य पहचान पत्रों की भूमिका: यदि बच्चे के पास अन्य वैध पहचान दस्तावेज उपलब्ध हों, तो उन्हें भी प्राथमिकता दी जाएगी, हालांकि अब यह अनिवार्य नहीं होगा।
- जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश: सभी जिला शिक्षा अधिकारियों और स्कूल प्रिंसिपलों को इन निर्देशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने को कहा गया है।
यह एक प्रगतिशील कदम है जो राजस्थान को शिक्षा के क्षेत्र में अग्रणी राज्य बनाने की दिशा में और मजबूत करेगा। हमारी टीम सभी अभिभावकों और शिक्षकों से अपील करती है कि वे इन नए नियमों का लाभ उठाएं और यह सुनिश्चित करें कि कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे।
हमारे नागौर संवाददाता के अनुसार, स्थानीय शिक्षा अधिकारियों ने भी इन निर्देशों का स्वागत किया है और उन्हें जमीनी स्तर पर लागू करने की तैयारी शुरू कर दी है।
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Written & Verified By
नागौर के युवा पत्रकार और डिजिटल मीडिया विशेषज्ञ। अभिषेक जी को ग्रामीण विकास और स्थानीय समस्याओं के सटीक विश्लेषण का गहरा अनुभव है।


