
नागौर के स्कूलों में 'बाल संसद' का गठन: नेतृत्व क्षमता और लोकतांत्रिक मूल्यों का विकास
Posted on 25 अक्टूबर 2026
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नागौर। राजस्थान के शिक्षा विभाग द्वारा विद्यार्थियों में लोकतांत्रिक मूल्यों की समझ और नेतृत्व क्षमता विकसित करने के उद्देश्य से विद्यालयों में 'बाल संसद' के गठन पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इसी कड़ी में, प्रदेश के विभिन्न राजकीय विद्यालयों में चुनाव प्रक्रिया के माध्यम से बाल संसद का सफलतापूर्वक गठन किया जा रहा है। यह पहल विद्यार्थियों को न केवल अपनी आवाज उठाने का मंच प्रदान करती है, बल्कि उन्हें भविष्य के जिम्मेदार नागरिक बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है।
हमारी टीम ने पाया कि बीकानेर निदेशालय से जारी निर्देशों के तहत सभी राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालयों को इस प्रक्रिया को अनिवार्य रूप से लागू करने को कहा गया है। यह निर्देश स्पष्ट करते हैं कि बाल संसद का मुख्य लक्ष्य बच्चों को विद्यालय प्रबंधन में सक्रिय भागीदार बनाना, उनमें निर्णय लेने की क्षमता विकसित करना और उन्हें एक लोकतांत्रिक प्रक्रिया का अनुभव कराना है।
बाल संसद की महत्ता और उद्देश्य
बाल संसद का गठन कोई साधारण प्रक्रिया नहीं, बल्कि शिक्षा के क्षेत्र में एक दूरगामी पहल है। इसके प्रमुख उद्देश्यों में शामिल हैं:
- लोकतांत्रिक मूल्यों का संवर्धन: छात्रों को मतदान, चुनाव प्रक्रिया, बहुमत का सम्मान और विपक्ष की भूमिका जैसे लोकतांत्रिक सिद्धांतों से परिचित कराना।
- नेतृत्व क्षमता का विकास: विभिन्न पदों पर चुने गए विद्यार्थियों को नेतृत्व करने, समस्याओं का समाधान करने और टीम के साथ काम करने का अवसर देना।
- उत्तरदायित्व की भावना: विद्यार्थियों को उनके कर्तव्यों और जिम्मेदारियों के प्रति सजग करना, जैसे कि विद्यालय परिसर की स्वच्छता, अनुशासन बनाए रखना, और शैक्षिक गतिविधियों में सहयोग करना।
- निर्वाचन प्रक्रिया की समझ: छात्रों को चुनाव लड़ने, प्रचार करने, वोट डालने और परिणामों को स्वीकार करने का सीधा अनुभव देना।
- समस्या समाधान कौशल: बाल संसद की बैठकों के माध्यम से छात्रों को विद्यालय से संबंधित मुद्दों पर चर्चा करने और उनके समाधान खोजने के लिए प्रोत्साहित करना।
नागौर जिले में प्रभाव
हमारे नागौर संवाददाता के अनुसार, जिले के शिक्षा अधिकारी भी इस पहल को गंभीरता से ले रहे हैं। नागौर जिले के कई विद्यालयों में हाल ही में बाल संसद का गठन किया गया है, जबकि अन्य विद्यालयों में यह प्रक्रिया अंतिम चरण में है। इस दौरान, शिक्षक और प्रधानाचार्य छात्रों को चुनाव प्रक्रिया के हर चरण में मार्गदर्शन प्रदान कर रहे हैं, ताकि यह पूरी तरह से निष्पक्ष और शैक्षिक हो।
बच्चों में खेल, शिक्षा, अनुशासन, स्वच्छता और सांस्कृतिक गतिविधियों के लिए अलग-अलग मंत्री और उपमंत्री चुने जा रहे हैं। ये मंत्री अपने-अपने विभागों की देखरेख करते हैं और प्रधानाचार्य एवं शिक्षकों के मार्गदर्शन में कार्य करते हैं। यह मॉडल बच्चों को वास्तविक जीवन की प्रशासनिक संरचना से परिचित कराता है।
अभिभावकों और शिक्षकों की भूमिका
इस पूरी प्रक्रिया में अभिभावकों और शिक्षकों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। शिक्षकों को यह सुनिश्चित करना होगा कि बाल संसद केवल एक औपचारिक इकाई न रहे, बल्कि यह सक्रिय रूप से कार्य करे। वहीं, अभिभावकों को भी अपने बच्चों को इन गतिविधियों में भाग लेने के लिए प्रेरित करना चाहिए, क्योंकि यह उनके सर्वांगीण विकास के लिए आवश्यक है। जयपुर सचिवालय भी इस तरह की जमीनी स्तर की शैक्षिक पहलों को प्रोत्साहित कर रहा है, जो छात्रों को सशक्त बनाने और उन्हें भविष्य के लिए तैयार करने में मदद करती हैं।
हमारा मानना है कि बाल संसद जैसी पहलें राजस्थान के शिक्षा क्षेत्र में एक नई क्रांति ला सकती हैं, जहां छात्र न केवल किताबी ज्ञान प्राप्त करें, बल्कि व्यवहारिक और नागरिक कौशल भी सीखें। नागौर जिले के सभी विद्यालयों को इस अवसर का लाभ उठाना चाहिए और अपने विद्यार्थियों को एक मजबूत लोकतांत्रिक नींव प्रदान करनी चाहिए।
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Written & Verified By
नागौर के युवा पत्रकार और डिजिटल मीडिया विशेषज्ञ। अभिषेक जी को ग्रामीण विकास और स्थानीय समस्याओं के सटीक विश्लेषण का गहरा अनुभव है।


