
मूंडवा के प्रधानाचार्य ने दिया 'खुशी शाला' का कॉन्सेप्ट, NCERT ने किया सम्मानित
Posted on 28 अक्टूबर 2026
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नागौर जिले के मूंडवा स्थित स्वामी विवेकानंद राजकीय मॉडल स्कूल के प्रधानाचार्य भंवरलाल जाट ने हाल ही में भोपाल में आयोजित राष्ट्रीय स्कूल परामर्शदाता शिखर सम्मेलन में 'खुशी शाला' की एक अनूठी और प्रभावी अवधारणा प्रस्तुत की है। इस महत्वपूर्ण पहल के लिए राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) ने उन्हें प्रशंसा प्रमाण-पत्र से सम्मानित किया है, जिससे नागौर जिले का नाम राष्ट्रीय पटल पर रोशन हुआ है।
हमारे **मूंडवा** संवाददाता के अनुसार, यह तीन दिवसीय सम्मेलन 22 से 24 अक्टूबर तक NCERT के मनोदर्पण प्रकोष्ठ द्वारा आयोजित किया गया था। प्रधानाचार्य जाट ने इस मंच पर स्पष्ट किया कि शिक्षा का उद्देश्य केवल पाठ्यक्रम पूरा करना नहीं, बल्कि बच्चों में सीखने की तीव्र जिज्ञासा, मजबूत आत्मविश्वास और रचनात्मकता का विकास करना भी है। उन्होंने जोर दिया कि जब बच्चे बिना किसी डर और पूरे आनंद के साथ सीखते हैं, तो शिक्षा सबसे प्रभावी और यादगार बनती है।
खुशी शाला: नई शिक्षा नीति की भावना का प्रतिबिंब
प्रधानाचार्य भंवरलाल जाट ने 'खुशी शाला' के पीछे के मूल विचार को साझा करते हुए बताया कि यह केवल खेलकूद या मनोरंजन तक सीमित नहीं है। इसका मुख्य उद्देश्य विद्यालय की संपूर्ण कार्यसंस्कृति में एक सकारात्मक बदलाव लाना है, ताकि हर बच्चा सुरक्षित, सम्मानित और प्रेरित माहौल में अपनी पढ़ाई कर सके। यह अवधारणा राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 की बाल-केंद्रित और समग्र शिक्षा की भावना के पूरी तरह अनुरूप है, जो विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास को प्राथमिकता देती है।
शिक्षक से शुरू होगी सकारात्मक बदलाव की यात्रा
जाट ने इस बात पर विशेष बल दिया कि विद्यालय को आनंदमय बनाने की शुरुआत स्वयं शिक्षकों से होनी चाहिए। उनका मानना है कि जब एक शिक्षक स्वयं खुश और मानसिक रूप से संतुलित होगा, तभी वह अपने विद्यार्थियों के लिए एक सकारात्मक और प्रेरणादायक वातावरण तैयार कर पाएगा। इसके लिए शिक्षकों को पहले खुद को समझने और अपनी भावनाओं को पहचानने की आवश्यकता है। यह एक महत्वपूर्ण कदम है जो बीकानेर निदेशालय भी शिक्षकों के व्यावसायिक विकास में शामिल करने पर विचार कर सकता है।
भयमुक्त माहौल में बच्चे बेहतर तरीके से सीखेंगे
सम्मेलन में यह भी बताया गया कि एक आदर्श विद्यालय वह है, जहाँ विद्यार्थी बिना किसी झिझक के प्रश्न पूछ सकें, अपनी गलतियों से सीख सकें और खुद को पूरी तरह सुरक्षित महसूस करें। शिक्षक और विद्यार्थियों के बीच आत्मीय संवाद, आपसी विश्वास और संवेदनशील व्यवहार को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए। जाट ने स्पष्ट किया कि भय, अपमान और अनावश्यक दबाव बच्चों के आत्मविश्वास और सीखने की रुचि को गंभीर रूप से प्रभावित करते हैं। इसके विपरीत, एक प्रसन्नतापूर्ण वातावरण बच्चों की जिज्ञासा, रचनात्मकता और कक्षा में सक्रिय भागीदारी को बढ़ावा देता है, जिससे शैक्षिक परिणाम स्वतः बेहतर होते हैं।
मानसिक स्वास्थ्य को शिक्षा का अभिन्न अंग बनाना
प्रधानाचार्य जाट ने विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य को केवल परामर्श सेवाओं तक सीमित रखने के बजाय इसे स्कूल की रोजमर्रा की शिक्षण प्रक्रिया से जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि बच्चों की भावनात्मक सुरक्षा, आत्मविश्वास और मानसिक प्रसन्नता सीधे तौर पर शिक्षा की गुणवत्ता से जुड़ी है। उन्होंने विद्यालयों में शिक्षक, प्रधानाचार्य और अभिभावकों के सामूहिक प्रयासों से एक ऐसा वातावरण तैयार करने पर जोर दिया, जहाँ प्रत्येक बच्चा अपनी क्षमताओं के अनुसार आगे बढ़ सके। यह अवधारणा राजस्थान के सभी सरकारी विद्यालयों में मानसिक स्वास्थ्य को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।
राष्ट्रीय सम्मेलन में आनंदमय शिक्षा और विद्यालयी मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में उनके महत्वपूर्ण योगदान और विचार प्रस्तुत करने के लिए प्रधानाचार्य भंवरलाल जाट को NCERT की ओर से प्रशंसा प्रमाण-पत्र प्रदान किया गया। यह सम्मान मूंडवा सहित पूरे नागौर जिले के लिए गौरव का विषय है और शिक्षा के क्षेत्र में नए प्रतिमान स्थापित करता है।
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Written & Verified By
नागौर के युवा पत्रकार और डिजिटल मीडिया विशेषज्ञ। अभिषेक जी को ग्रामीण विकास और स्थानीय समस्याओं के सटीक विश्लेषण का गहरा अनुभव है।


