
नागौर: अरिहंत इंटरनेशनल स्कूल में युवाचार्य का संदेश, बच्चों ने लिया नशामुक्त जीवन का संकल्प
Posted on 31 अक्टूबर 2026
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हमारे नागौर संवाददाता के अनुसार, शिक्षा की सार्थकता केवल किताबी ज्ञान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह विद्यार्थी के सर्वांगीण विकास और चरित्र निर्माण का माध्यम है। आज शनिवार, 31 अक्टूबर 2026 को अरिहंत इंटरनेशनल स्कूल में युवाचार्यश्री के सानिध्य में एक विशेष संवाद सत्र आयोजित किया गया, जहाँ विद्यार्थियों को जीवन में सही दिशा चुनने और नशे जैसी कुरीतियों से दूर रहने का मार्ग दिखाया गया।
तकनीक और एआई के दौर में संस्कार की महत्ता
युवाचार्यश्री ने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि आज का युग तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) का है, लेकिन विद्यार्थियों को ध्यान रखना होगा कि तकनीक उनके सोचने की शक्ति का विकल्प न बने। शिक्षा का मुख्य उद्देश्य केवल अंकों की दौड़ नहीं, बल्कि मुश्किल परिस्थितियों में सही निर्णय लेने का साहस विकसित करना है। उन्होंने जोर दिया कि यदि किसी परीक्षा में अंक कम आते हैं, तो उसे असफलता नहीं माना जाना चाहिए, क्योंकि अंक विद्यार्थी की वास्तविक योग्यता का पूर्ण पैमाना नहीं हैं।
सच्चे मित्र की पहचान और संगति का प्रभाव
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों से मित्रता के महत्व पर सीधा संवाद किया गया। युवाचार्यश्री ने बताया कि:
- सच्चा मित्र वही है जो गलत कदम उठाने पर आपको रोक दे और सही राह दिखाए।
- किशोरावस्था अच्छी आदतें और अनुशासन विकसित करने का स्वर्ण काल है।
- गलत संगति से बचना अनिवार्य है, क्योंकि अधिकांश नशों की शुरुआत यहीं से होती है।
- खेल, अध्ययन, और परिवार के प्रति संवेदनशीलता व्यक्ति को मानसिक रूप से मजबूत बनाती है।
नशामुक्त जीवन का सामूहिक संकल्प
सत्र के समापन पर सभी विद्यार्थियों ने जीवनभर नशे से दूर रहने का संकल्प लिया। उन्होंने न केवल स्वयं इससे बचने का वादा किया, बल्कि अपने मित्रों को भी स्वस्थ जीवनशैली के लिए प्रेरित करने का प्रण लिया। इस अवसर पर विद्यालय के चेयरमैन पंकज सूरिया, सचिव अजय चौरड़िया, प्रिंसिपल प्रतिमा यादव और प्रबंधक सूरजमल जैन ने युवाचार्यश्री का आशीर्वाद प्राप्त किया।
शिक्षकों और अभिभावकों के लिए संदेश
शिक्षा जगत के लिए यह एक महत्वपूर्ण संदेश है कि बीकानेर निदेशालय और जयपुर सचिवालय के दिशा-निर्देशों के अनुरूप, शिक्षण संस्थानों में 'संस्कार आधारित शिक्षा' पर जोर दिया जाना चाहिए। स्कूल से केवल प्रमाण-पत्र लेकर निकलना सफलता नहीं है, बल्कि मजबूत चरित्र और स्वस्थ जीवन पद्धति लेकर निकलना ही असली उपलब्धि है।
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Written & Verified By
नागौर के युवा पत्रकार और डिजिटल मीडिया विशेषज्ञ। अभिषेक जी को ग्रामीण विकास और स्थानीय समस्याओं के सटीक विश्लेषण का गहरा अनुभव है।


