
राजस्थान के सरकारी स्कूलों में बेटियों का परचम: लड़कों से 5 लाख ज़्यादा नामांकन
Posted on 22 अक्टूबर 2026
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प्रदेश के सरकारी स्कूलों में शिक्षा के क्षेत्र में छात्राओं ने एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, सरकारी विद्यालयों में लड़कियों का नामांकन लड़कों के मुकाबले करीब 5 लाख अधिक दर्ज किया गया है। यह आंकड़ा न केवल बालिका शिक्षा के प्रति बढ़ती जागरूकता को दर्शाता है, बल्कि राज्य सरकार द्वारा चलाई जा रही विभिन्न प्रोत्साहन योजनाओं की सफलता की भी पुष्टि करता है।
हमारे नागौर संवाददाता के अनुसार, बीकानेर निदेशालय से प्राप्त नामांकन के ताजा आंकड़ों के विश्लेषण में यह तथ्य सामने आया है कि कुल 38 लाख 74 हजार 349 लड़कियां और 33 लाख 74 हजार 394 लड़के सरकारी स्कूलों में नामांकित हैं। इस प्रकार, बेटियों की संख्या बेटों से स्पष्ट रूप से 4 लाख 99 हजार 955 अधिक है, जो लगभग 5 लाख के करीब है। यह स्थिति प्रदेश के सभी जिलों में समान रूप से दिखाई दे रही है, जो महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक बड़ा कदम है।
कक्षावार नामांकन का विश्लेषण
- नर्सरी कक्षा को छोड़कर: केवल नर्सरी कक्षा में ही लड़कों की संख्या लड़कियों से थोड़ी अधिक पाई गई है। इसके अतिरिक्त, पहली कक्षा से लेकर उच्च कक्षाओं तक, छात्राओं की संख्या लगातार लड़कों से आगे बनी हुई है।
- 10वीं कक्षा में सबसे अधिक अंतर: कक्षा 10वीं में छात्राओं और छात्रों की संख्या में सबसे बड़ा अंतर दर्ज किया गया है। इस कक्षा में 3 लाख 20 हजार 391 छात्राएं नामांकित हैं, जबकि छात्रों की संख्या 2 लाख 53 हजार 896 है। यह अंतर 66,495 छात्राओं का है।
- अन्य महत्वपूर्ण कक्षाएं: कक्षा 12वीं में छात्राओं की संख्या 58,145 अधिक है, और कक्षा 8वीं में यह अंतर 56,846 है। अन्य सभी कक्षाओं में यह अंतर 50 हजार से कम है, फिर भी छात्राओं का पलड़ा भारी है।
बालिका शिक्षा प्रोत्साहन योजनाएं
शिक्षा विभाग और जयपुर सचिवालय की बालिका शिक्षा फाउंडेशन द्वारा चलाई जा रही विभिन्न प्रोत्साहन योजनाएं इस सकारात्मक बदलाव की मुख्य वजह मानी जा रही हैं। इन योजनाओं ने अभिभावकों को अपनी बेटियों को स्कूल भेजने के लिए प्रोत्साहित किया है, जिससे उनका आत्मविश्वास और शिक्षा के प्रति रुझान बढ़ा है।
- गार्गी पुरस्कार: मेधावी छात्राओं को उच्च शिक्षा के लिए प्रेरित करने हेतु।
- बालिका प्रोत्साहन पुरस्कार: विभिन्न शैक्षणिक स्तरों पर उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए।
- मुख्यमंत्री हमारी बेटियां योजना: गरीब एवं मेधावी बालिकाओं को आर्थिक सहायता प्रदान करने हेतु।
- पद्माक्षी पुरस्कार: विशेष उपलब्धियां हासिल करने वाली छात्राओं का सम्मान।
- लाडो प्रोत्साहन योजना: बालिका जन्म को प्रोत्साहित करने और उनकी शिक्षा सुनिश्चित करने हेतु।
- साइकिल योजना: दूर-दराज के क्षेत्रों से आने वाली छात्राओं को स्कूल तक पहुँचने में मदद।
- स्कूटी योजना: उच्च शिक्षा में प्रवेश करने वाली छात्राओं को गतिशीलता प्रदान करने हेतु।
इन योजनाओं ने न केवल नामांकन दर में वृद्धि की है, बल्कि छात्राओं की शिक्षा जारी रखने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। हमारी टीम का मानना है कि यह प्रवृत्ति राज्य के उज्ज्वल भविष्य की ओर संकेत करती है, जहाँ शिक्षा के माध्यम से लैंगिक समानता को बढ़ावा मिल रहा है। यह प्रदेश के लिए गौरव का विषय है कि हमारी बेटियां हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं और सरकारी शिक्षण संस्थान उनकी प्रगति में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।
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Written & Verified By
नागौर के युवा पत्रकार और डिजिटल मीडिया विशेषज्ञ। अभिषेक जी को ग्रामीण विकास और स्थानीय समस्याओं के सटीक विश्लेषण का गहरा अनुभव है।


