
सीमावर्ती जैसिंधर में शिक्षा का कायाकल्प: 112 करोड़ से बनेंगी नई सौगातें
Posted on 26 अक्टूबर 2026
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भारत-पाकिस्तान सीमा के निकट बसे जैसिंधर स्टेशन गांव में शिक्षा के क्षेत्र में अभूतपूर्व विकास की धारा बह रही है। एक छोटे से गांव में 1600 की आबादी के बावजूद, यहां शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए 112 करोड़ रुपए से अधिक के बड़े प्रोजेक्ट स्वीकृत हुए हैं। यह पहल सीमावर्ती क्षेत्रों के ग्रामीण विद्यार्थियों के लिए उच्च शिक्षा और तकनीकी कौशल विकास के नए द्वार खोल रही है।
शिक्षा के विस्तार में ऐतिहासिक निवेश
हमारे नागौर संवाददाता के अनुसार, जैसिंधर स्टेशन में शिक्षा के क्षेत्र में सबसे बड़ा निवेश आवासीय विद्यालय के रूप में किया गया है। वर्ष 2012-13 में स्वीकृत इस महत्वपूर्ण परियोजना पर 32.25 करोड़ रुपए व्यय किए गए। 15 चरणों में निर्मित इस आधुनिक परिसर में कक्षा 12वीं तक के कुल 568 विद्यार्थियों, जिनमें 284 छात्र और 284 छात्राएं शामिल हैं, के लिए आवासीय और शैक्षणिक सुविधाएँ उपलब्ध कराई गई हैं। परिसर में 124 कमरे हैं, जिनमें प्रत्येक के साथ संलग्न शौचालय की व्यवस्था है। इस आवासीय सुविधा के कारण आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थी भी अब बेहतर शिक्षा के साथ-साथ सुरक्षित आवास का लाभ उठा पा रहे हैं।
नए केंद्रीय विद्यालय भवन का निर्माण जारी
गांव में 25 बीघा जमीन पर 25 करोड़ रुपए की लागत से 300 बच्चों की क्षमता वाले एक नए केंद्रीय विद्यालय भवन का निर्माण कार्य प्रगति पर है। वर्तमान में, केंद्रीय विद्यालय एक किराए के भवन से संचालित हो रहा है। अंतरराष्ट्रीय पहचान वाले मुनाबाव से लगभग 5 किलोमीटर की दूरी पर स्थित जैसिंधर स्टेशन, भारत-पाक सीमा के करीब बसा एक महत्वपूर्ण गांव है। पहले जैसिंधर ग्राम पंचायत का हिस्सा रहा यह गांव, रेलवे स्टेशन की उपस्थिति के कारण 'जैसिंधर स्टेशन' के नाम से जाना जाता है। वर्तमान ग्राम पंचायत में जैसिंधर स्टेशन के अतिरिक्त केरकोरी, खियाणी और साईदान की बेरी राजस्व गांव भी शामिल हैं। इस पंचायत की कुल आबादी लगभग 1600 है और मतदाताओं की संख्या 1288 है। सीमित आबादी के बावजूद, यहां शिक्षा और आवासीय सुविधाओं का विस्तार इस क्षेत्र को आसपास के ग्रामीण विद्यार्थियों के लिए एक प्रमुख शैक्षिक केंद्र के रूप में स्थापित कर रहा है।
तकनीकी शिक्षा और अन्य सुविधाएं
शैक्षणिक विकास के साथ-साथ, जैसिंधर स्टेशन तकनीकी शिक्षा और कौशल विकास के अवसरों को भी बढ़ावा दे रहा है। कमजोर वर्ग के 50 विद्यार्थियों के लिए 5 बीघा जमीन पर 60 से 70 लाख रुपए की लागत से अंबेडकर छात्रावास का निर्माण किया गया है। इसके अलावा, वर्ष 2009 में 33.15 लाख रुपए की लागत से एक बालिका छात्रावास भी स्थापित किया गया था।
तकनीकी शिक्षा के अवसरों को बढ़ाते हुए, वर्ष 2013-14 में 75 बीघा भूमि पर 12.30 करोड़ रुपए की लागत से पॉलिटेक्निक कॉलेज स्वीकृत किया गया। इसके बाद, 2014-15 में 8 करोड़ रुपए की लागत से आईटीआई कॉलेज को भी मंजूरी मिली। ये परियोजनाएं जैसिंधर स्टेशन को स्कूली शिक्षा के साथ-साथ तकनीकी प्रशिक्षण और कौशल विकास के एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में विकसित कर रही हैं, जिससे स्थानीय युवाओं को रोजगार के बेहतर अवसर प्राप्त होंगे।
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Written & Verified By
नागौर के युवा पत्रकार और डिजिटल मीडिया विशेषज्ञ। अभिषेक जी को ग्रामीण विकास और स्थानीय समस्याओं के सटीक विश्लेषण का गहरा अनुभव है।


