
राजस्थान के स्कूलों में अब लगेंगे 'शुगर बोर्ड', बच्चों को मिलेगी स्वास्थ्य शिक्षा
Posted on 22 अक्टूबर 2026
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जयपुर: अब प्रदेश के सभी सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों को चीनी के दुष्परिणामों और स्वस्थ खानपान के महत्व के बारे में जागरूक किया जाएगा। प्रारंभिक शिक्षा एवं पंचायती राज (प्रारंभिक शिक्षा) विभाग, बीकानेर के निदेशक ललित कुमार ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों (मुख्यालय), प्रारंभिक शिक्षा को इस संबंध में आवश्यक कार्रवाई के निर्देश जारी किए हैं। यह पहल प्रधानमंत्री के 'फिट इंडिया मूवमेंट' और राष्ट्रीय पोषण माह के उद्देश्यों से प्रेरित है, जिसका मुख्य लक्ष्य बच्चों में कम उम्र से ही स्वस्थ खानपान की आदतों को बढ़ावा देना और चीनी के अत्यधिक सेवन से जुड़े स्वास्थ्य जोखिमों के प्रति जागरूकता बढ़ाना है।
खाद्य पदार्थों में छिपी चीनी की जानकारी भी मिलेगी
राष्ट्रीय पोषण माह, जो हर साल सितंबर में पोषण संबंधी जागरूकता फैलाने, स्वस्थ आहार व्यवहार को प्रोत्साहित करने और कुपोषण से लड़ने के उद्देश्य से मनाया जाता है, के क्रम में राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) ने विद्यालयों में 'शुगर बोर्ड' लगाने की सलाह दी थी। इन बोर्डों के माध्यम से विद्यार्थियों को चीनी के सेवन, विभिन्न खाद्य पदार्थों में मौजूद अतिरिक्त चीनी की मात्रा और इससे जुड़े स्वास्थ्य जोखिमों के बारे में विस्तृत जानकारी प्रदान की जाएगी। इससे विद्यार्थी अपने दैनिक आहार में चीनी की मात्रा को लेकर अधिक सजग हो सकेंगे और बेहतर, स्वस्थ विकल्पों का चयन करने के लिए प्रेरित होंगे।
सभी जिलों के स्कूलों में लगेंगे बोर्ड
राजस्थान राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग के 1 अक्टूबर 2026 के पत्र के आलोक में, प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को अपने-अपने जिलों के विद्यालयों में 'शुगर बोर्ड' की स्थापना और प्रभावी प्रदर्शन सुनिश्चित करने के स्पष्ट निर्देश दिए हैं। इस महत्वपूर्ण पहल का उद्देश्य केवल भौतिक रूप से बोर्ड लगाना ही नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों को सही खानपान की आदतों के प्रति निरंतर जागरूक करना भी है। बोर्ड के माध्यम से नियमित रूप से जागरूकता गतिविधियां संचालित होने से न केवल बच्चों को लाभ होगा, बल्कि यह संदेश उनके परिवारों तक भी पहुंचेगा, जिससे एक स्वस्थ समाज के निर्माण में मदद मिलेगी।
जीवनशैली सुधार के लिए प्रेरणा
हमारे **नागौर** संवाददाता के अनुसार, शिक्षक संघ रेसटा के प्रदेशाध्यक्ष मोहर सिंह सलावद ने इस पहल का स्वागत करते हुए कहा कि विद्यालयों में 'शुगर बोर्ड' लगाने से बच्चों को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरणा मिलेगी। उन्होंने शिक्षकों से आह्वान किया है कि वे विद्यार्थियों को चीनी के अत्यधिक सेवन के नुकसान और संतुलित आहार के महत्व के बारे में जानकारी दें, ताकि बचपन से ही उनमें स्वास्थ्य के प्रति एक मजबूत जागरूकता विकसित हो सके। यह कदम भविष्य की पीढ़ियों के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।
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Written & Verified By
नागौर के युवा पत्रकार और डिजिटल मीडिया विशेषज्ञ। अभिषेक जी को ग्रामीण विकास और स्थानीय समस्याओं के सटीक विश्लेषण का गहरा अनुभव है।


