
शिक्षा विभाग: 122 संविदाकर्मियों का 3 माह से वेतन बकाया, दिवाली पर भी झटका
Posted on 6 नवंबर 2026
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हमारे **नागौर** संवाददाता के अनुसार, जहाँ एक ओर राज्य सरकार दिवाली के अवसर पर कर्मचारियों को बोनस देने की बात कर रही है, वहीं जोधपुर जिले में शिक्षा विभाग के अधीन कार्यरत करीब 122 संविदाकर्मियों को पिछले तीन महीनों से वेतन नहीं मिला है। अगस्त, सितंबर और अक्टूबर का वेतन भुगतान अटकने से इन कर्मचारियों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।
किन कर्मचारियों का भुगतान अटका है?
जोधपुर जिला एमआईएस एसोसिएशन द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, अतिरिक्त जिला परियोजना समन्वयक के अधीन स्थानीय कार्यालय और जिले के विभिन्न ब्लॉकों में कार्यरत शिक्षक, एमआईएस-कंप्यूटर ऑपरेटर, कुक कम हेल्पर, चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी, चौकीदार सहित अन्य संविदाकर्मी वेतन से वंचित हैं।
भुगतान में देरी के कारण
इस भुगतान में देरी के पीछे बजट की कमी, एसएनए स्पर्श पोर्टल पर मैपिंग में समस्या और अन्य तकनीकी कारणों को बताया जा रहा है। एसोसिएशन के सदस्यों ने बताया कि एडीपीसी कार्यालय से लगातार संपर्क के बावजूद उन्हें कोई संतोषजनक जवाब या समाधान नहीं मिल रहा है। कर्मचारियों का कहना है कि विभागीय या बजट संबंधी समस्याओं के लिए उन्हें जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता और फर्म को भुगतान हो या न हो, उन्हें प्रतिमाह नियमित वेतन मिलना चाहिए।
पुरानी सेवा नियम और आरएलएसडीसी का मुद्दा
एसोसिएशन ने राजस्थान लॉजिस्टिकल सर्विस डिलीवरी कॉर्पोरेशन (आरएलएसडीसी) के गठन पर भी चिंता व्यक्त की। पूर्व सरकार द्वारा 1 अक्टूबर 2023 को संविदाकर्मियों को प्लेसमेंट एजेंसियों के शोषण से बचाने, सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने और स्थायी रोजगार की दिशा में यह व्यवस्था शुरू की गई थी। हालांकि, सत्ता परिवर्तन के बाद यह योजना प्रभावी रूप से आगे नहीं बढ़ पाई। वर्ष 2011 से विभिन्न विभागों में सेवाएं दे रहे इन कर्मचारियों के सेवा नियमों में लंबे समय से कोई बदलाव नहीं हुआ है। 2012-13 के सेवा नियमों के बाद न तो वेतन वृद्धि हुई और न ही अन्य भत्तों का लाभ मिला, बल्कि वेतन में कटौती की भी बात सामने आई है, जिसकी जांच की मांग की जा रही है।
अधिकारियों का पक्ष
इस मामले पर अतिरिक्त जिला परियोजना समन्वयक कार्यालय के एएओ रामनिवास मुंडेल ने बताया कि हाल ही में उनका भुगतान आया था, लेकिन जयपुर से ऑब्जेक्शन आने के कारण समस्या उत्पन्न हुई। उन्होंने बताया कि वर्तमान टेंडर में इनका वेतन कम हो रहा है और वर्कऑर्डर एक्सटेंड करने के लिए प्रस्ताव भेजा गया है। परिषद को एक्सटेंड करने के लिए लिखा गया है, जिसके बिना यह कार्य संभव नहीं है। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि यह समस्या पूरे प्रदेश में आ रही है और वे जल्द से जल्द वेतन भुगतान सुनिश्चित करने के लिए प्रयासरत हैं।
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Written & Verified By
नागौर के युवा पत्रकार और डिजिटल मीडिया विशेषज्ञ। अभिषेक जी को ग्रामीण विकास और स्थानीय समस्याओं के सटीक विश्लेषण का गहरा अनुभव है।


