
नागौर: शिक्षक सम्मेलन की नई तारीखों पर भी संकट, जनगणना प्रशिक्षण से टकराव!
Posted on 4 नवंबर 2026
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प्रदेश के शिक्षकों के लिए बड़ी खबर! राज्य स्तरीय शिक्षक सम्मेलन की तारीखों में एक बार फिर बदलाव की मांग जोर पकड़ रही है। शिक्षा विभाग ने पहले 27 और 28 नवंबर को प्रस्तावित सम्मेलन की तारीखों को बदलकर 23 और 24 दिसंबर कर दिया था, लेकिन अब इन नई तारीखों पर भी शिक्षकों के बीच असमंजस की स्थिति बन गई है। हमारी टीम को मिली जानकारी के अनुसार, जनगणना कार्य और अन्य विभागीय जिम्मेदारियों के चलते शिक्षक संघों ने इन तारीखों पर सम्मेलन आयोजित करने पर गहरी चिंता व्यक्त की है।
क्यों बदला गया था कार्यक्रम?
बीकानेर निदेशालय से जारी आदेश के अनुसार, निदेशक माध्यमिक शिक्षा, राजस्थान, श्री ललित कुमार ने बताया था कि पंचायती राज चुनावों के कारण अर्द्धवार्षिक परीक्षाओं की तारीखें बदलनी पड़ी थीं। ये परीक्षाएं अब 25 नवंबर से 7 दिसंबर तक निर्धारित की गई हैं। इसी वजह से पूर्व में तय शिक्षक सम्मेलन की तारीखों में संशोधन आवश्यक हो गया था, जिसके बाद सम्मेलन को दिसंबर माह में पुनर्निर्धारित किया गया।
यह बदलाव इसलिए किया गया था ताकि शिक्षक बिना किसी शैक्षणिक व्यवधान के अपनी परीक्षाओं पर ध्यान केंद्रित कर सकें। हालांकि, अब नई तारीखों पर भी कई व्यवहारिक दिक्कतें सामने आ रही हैं।
नई तारीखों पर भी विरोध क्यों?
शिक्षक संघ रेसटा के प्रदेशाध्यक्ष मोहर सिंह सलावद ने हमारी टीम से बातचीत में बताया कि नई तारीखों (23 और 24 दिसंबर) पर भी शिक्षकों की बड़ी संख्या में भागीदारी प्रभावित हो सकती है। उन्होंने इस संबंध में निदेशालय को अपनी आपत्तियां दर्ज कराई हैं। उनके अनुसार, दिसंबर का महीना शिक्षकों के लिए कई अन्य महत्वपूर्ण कार्यों से भरा रहेगा।
- जनगणना कार्य का प्रशिक्षण: जनगणना कार्य के दूसरे चरण की तैयारियों के तहत 16 दिसंबर से 18 जनवरी 2027 के बीच गणनाकर्ताओं और पर्यवेक्षकों का प्रशिक्षण प्रस्तावित है। दिसंबर के अंतिम सप्ताह में होने वाला सम्मेलन सीधे तौर पर इस महत्वपूर्ण प्रशिक्षण से टकराएगा।
- सीएमएमएस पोर्टल पंजीकरण: इसी अवधि में सीएमएमएस पोर्टल पर पंजीकरण से जुड़े काम भी शिक्षकों को पूरे करने होंगे, जिससे उन पर अतिरिक्त दबाव रहेगा।
- शैक्षणिक दबाव: 15 नवंबर से 10 दिसंबर 2026 के बीच अर्द्धवार्षिक परीक्षाओं, शैक्षणिक गतिविधियों और अन्य विभागीय दायित्वों का पहले से ही भारी दबाव रहेगा। इसके तुरंत बाद जनगणना प्रशिक्षण और पंजीकरण की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।
श्री सलावद ने यह भी स्पष्ट किया कि शिक्षक सम्मेलन शिक्षकों से जुड़े शैक्षणिक, सामाजिक और सेवा संबंधी मुद्दों पर चर्चा का एक महत्वपूर्ण मंच होता है। यदि शिक्षक बड़ी संख्या में इसमें शामिल नहीं हो पाएंगे, तो सम्मेलन का मूल उद्देश्य ही प्रभावित होगा। संघ का मानना है कि इतनी व्यस्त अवधि में सम्मेलन में शामिल होना अधिकांश शिक्षकों के लिए मुश्किल होगा, खासकर जब उन्हें जनगणना जैसे राष्ट्रीय महत्व के कार्य में भी जुटना है।
नागौर के शिक्षकों पर क्या होगा असर?
नागौर जिले के शिक्षकों के लिए भी यह स्थिति चिंताजनक है। चूंकि राज्य स्तरीय सम्मेलन में भाग लेने के लिए जिलेभर से शिक्षक प्रतिनिधि पहुंचते हैं, ऐसे में लगातार बदलती और व्यस्तता भरी तारीखें उनके लिए आवागमन और अवकाश प्रबंधन में बाधा बन सकती हैं। हमारी टीम को मिली जानकारी के अनुसार, जिले के कई शिक्षक संगठनों ने भी इस मुद्दे पर अपनी चिंता व्यक्त की है और विभाग से जल्द ही कोई सर्वमान्य समाधान निकालने की मांग की है। यह देखना होगा कि बीकानेर निदेशालय इन नई मांगों पर क्या रुख अपनाता है और क्या एक बार फिर सम्मेलन की तारीखों में बदलाव देखने को मिलता है।
हमारे नागौर संवाददाता के अनुसार, शिक्षा विभाग को इस मुद्दे पर तत्काल विचार कर शिक्षकों के हित में निर्णय लेना चाहिए ताकि राज्य स्तरीय सम्मेलन अपने उद्देश्यों को सफलतापूर्वक प्राप्त कर सके और शिक्षकों को अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े।
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Written & Verified By
नागौर के युवा पत्रकार और डिजिटल मीडिया विशेषज्ञ। अभिषेक जी को ग्रामीण विकास और स्थानीय समस्याओं के सटीक विश्लेषण का गहरा अनुभव है।


