
डेगाना: पंचायत चुनाव बाद जोड़-तोड़ शुरू, भाजपा ने बाड़ाबंदी की
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डेगाना (नागौर): राजस्थान में पंचायतराज चुनावों के मतदान संपन्न होने के बाद अब नई सरकार के गठन की राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। जिला प्रमुख और पंचायत समिति प्रधान के पदों पर कब्जा जमाने के लिए भाजपा और कांग्रेस दोनों ही प्रमुख दलों ने अपनी-अपनी रणनीतियां बनानी शुरू कर दी हैं। चुनाव परिणाम आने से पहले ही संभावित राजनीतिक समीकरणों को साधने और अपने चुने हुए सदस्यों को एकजुट रखने की कवायद शुरू हो गई है।
20 नवंबर को होने वाली मतगणना तक अपने समर्थित सदस्यों को सुरक्षित रखना दोनों प्रमुख दलों के लिए एक बड़ी चुनौती है। इस बीच, भाजपा ने इस दिशा में पहला कदम उठाते हुए डेगाना और भैरूंदा पंचायत समिति क्षेत्रों के अपने समर्थित जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों की बाड़ाबंदी शुरू कर दी है। वहीं, कांग्रेस ने भी मंगलवार को एक बैठक आयोजित कर दीपावली के बाद बाड़ाबंदी की तैयारी पर चर्चा की है।
भाजपा की बाड़ाबंदी और कांग्रेस की तैयारी
भाजपा ने जिला प्रमुख और पंचायत समिति प्रधान पद के चुनाव को ध्यान में रखते हुए जिला परिषद एवं पंचायत समिति सदस्यों को एकजुट रखने के प्रयास तेज कर दिए हैं। डेगाना और भैरूंदा पंचायत समिति क्षेत्रों के भाजपा समर्थित प्रत्याशियों को मतदान के बाद अन्यत्र ले जाकर ठहराया गया है। जानकारी के अनुसार, पंचायत समिति सदस्यों को एक स्थान पर रखा गया है, जबकि जिला परिषद सदस्यों को पुष्कर में ठहराया गया है। पार्टी नेताओं द्वारा प्रत्याशियों की गतिविधियों पर पैनी नजर रखी जा रही है, ताकि मतगणना और चुनाव प्रक्रिया पूरी होने तक सभी सदस्य एकजुट रहें।
पुष्कर में ठहरे जिला परिषद सदस्यों की कुछ तस्वीरें भी सामने आई हैं, जिनमें प्रत्याशी आपस में चर्चा करते, ताश खेलते और सामूहिक रूप से फोटो खिंचवाते हुए नजर आ रहे हैं। कुछ प्रत्याशियों के स्विमिंग पूल में समय बिताने की तस्वीरें भी सामने आई हैं। दीपावली के त्योहार को देखते हुए कुछ प्रत्याशियों को इस दौरान राहत भी दी गई है।
दूसरी ओर, कांग्रेस ने अभी तक डेगाना विधानसभा क्षेत्र के पंचायत समिति सदस्यों की औपचारिक बाड़ाबंदी शुरू नहीं की है। मंगलवार को आयोजित कांग्रेस पदाधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की बैठक में दीपावली के बाद सभी प्रत्याशियों को एकत्रित कर सुरक्षित स्थान पर ठहराने और प्रधान पद के चुनाव को लेकर रणनीति बनाने पर गहन चर्चा की गई। पार्टी नेताओं का मुख्य उद्देश्य मतगणना के बाद बनने वाले राजनीतिक समीकरणों के अनुसार प्रधान पद के लिए मजबूत दावेदारी पेश करना है।
बहुमत के लिए राजनीतिक जोड़-तोड़ जारी
मतगणना में अभी कुछ दिन शेष होने के कारण दोनों प्रमुख दल अपने सदस्यों को एकजुट रखने में पूरी तरह जुटे हुए हैं। वहीं, प्रधान पद के दावेदार निर्दलीय और अन्य दलों के प्रत्याशियों से भी लगातार संपर्क साध रहे हैं। बहुमत का आंकड़ा जुटाने के लिए राजनीतिक गलियारों में अंदरखाने जोड़-तोड़ का खेल शुरू हो गया है। पंचायत समितियों में किस दल का पलड़ा भारी रहेगा, इसे लेकर भी आम चर्चाओं का दौर जारी है।
- मतगणना तिथि: 20 नवंबर 2026
- प्रक्रिया: मतगणना के बाद जिला प्रमुख और प्रधान पद के चुनाव होंगे।
- मुख्य मुकाबला: भाजपा और कांग्रेस के बीच।
- रणनीति: सदस्यों को एकजुट रखना और बहुमत के लिए जोड़-तोड़।
पंचायतराज चुनाव की मतगणना 20 नवंबर को निर्धारित है, जिसके बाद जिला परिषद और पंचायत समितियों के चुनाव परिणाम सामने आएंगे और तत्पश्चात जिला प्रमुख तथा प्रधान पद के चुनाव की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। मतदान और मतगणना के बीच लंबे अंतराल ने राजनीतिक दलों की सक्रियता को और बढ़ा दिया है। अब सभी की निगाहें मतगणना के साथ-साथ प्रधान और जिला प्रमुख पद के लिए बनने वाले राजनीतिक समीकरणों पर टिकी हुई हैं।
हमारे डेगाना संवाददाता के अनुसार...
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नागौर के युवा पत्रकार और डिजिटल मीडिया विशेषज्ञ। अभिषेक जी को ग्रामीण विकास और स्थानीय समस्याओं के सटीक विश्लेषण का गहरा अनुभव है।