
नागौर रेलवे स्टेशन पर आज रेल पेंशनभोगियों के लिए विशेष डिजिटल शिविर
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नागौर जिले के हजारों रेलवे सेवानिवृत्त कर्मचारियों के लिए एक बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। आज, गुरुवार को, नागौर रेलवे स्टेशन पर एक विशेष डिजिटल शिविर का आयोजन किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य पेंशनभोगियों की वार्षिक जीवन प्रमाण पत्र जमा करने की प्रक्रिया को सरल और सुलभ बनाना है। यह पहल उत्तर पश्चिम रेलवे के जोधपुर मंडल द्वारा राष्ट्रव्यापी डिजिटल जीवन प्रमाण पत्र अभियान 5.0 के तहत की गई है, जो डिजिटलीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
हमारे नागौर संवाददाता के अनुसार, हर साल पेंशन चालू रखने के लिए जीवन प्रमाण पत्र जमा करना एक लंबी और जटिल प्रक्रिया रही है, खासकर वृद्ध और अस्वस्थ पेंशनभोगियों के लिए। इस समस्या के समाधान के लिए, जोधपुर मंडल ने यह विशेष योजना तैयार की है। शिविर का मुख्य लक्ष्य नागौर शहर और आसपास के ग्रामीण इलाकों में निवास करने वाले रेल पेंशनर्स को अनावश्यक प्रक्रियाओं, कागजी कार्रवाई और लंबी कतारों से मुक्ति दिलाना है।
शिविर के मुख्य उद्देश्य और सुविधाएं:
- सरल प्रक्रिया: पेंशनभोगियों को डिजिटल माध्यम से जीवन प्रमाण पत्र बनवाने में मदद मिलेगी, जिससे उनकी वार्षिक परेशानी का स्थाई समाधान होगा।
- सुविधाजनक स्थान: नागौर रेलवे स्टेशन पर शिविर का आयोजन होने से स्थानीय और ग्रामीण क्षेत्रों के पेंशनर्स को पहुंचने में आसानी होगी।
- वरिष्ठ अधिकारियों का मार्गदर्शन: यह शिविर मंडल रेल प्रबंधक अनुराग त्रिपाठी के मार्गदर्शन और वरिष्ठ मंडल वित्त प्रबंधक पी. एल. मीणा के नेतृत्व में आयोजित हो रहा है, जो इसकी गंभीरता और महत्व को दर्शाता है।
- होम विजिट सेवा: सबसे महत्वपूर्ण सुविधा उन पेंशनर्स के लिए है जो शारीरिक रूप से अक्षम हैं।
असमर्थ पेंशनर्स के लिए विशेष पहल – होम विजिट सेवा:
जोधपुर मंडल ने उन वृद्ध, गंभीर रूप से बीमार या चलने-फिरने में असमर्थ पेंशनर्स के लिए एक विशेष 'होम विजिट' सेवा भी शुरू की है, जो नागौर स्टेशन पर बने शिविर तक पहुंचने में असमर्थ हैं। इस मानवीय पहल के तहत, ऐसे पेंशनभोगियों के परिजनों को केवल नागौर स्टेशन स्थित शिविर में जाकर पेंशनभोगी की स्थिति और उनके पते की जानकारी दर्ज करानी होगी। इसके बाद, रेलवे की टीम स्वयं उनके घर जाकर जीवन प्रमाण पत्र का ऑन-द-स्पॉट वेरिफिकेशन करेगी। यह सुविधा सुनिश्चित करती है कि कोई भी पात्र पेंशनभोगी अपनी पेंशन सुविधाओं से वंचित न रहे, चाहे उनकी शारीरिक स्थिति कैसी भी हो।
यह पहल न केवल पेंशनभोगियों को सुविधा प्रदान करेगी, बल्कि डिजिटल इंडिया के सपने को साकार करने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम है। हमारी टीम ने पाया है कि ऐसे शिविरों से पारदर्शिता बढ़ती है और भ्रष्टाचार की संभावना कम होती है। यह रेलवे प्रशासन की तरफ से अपने सेवानिवृत्त कर्मचारियों के प्रति संवेदनशीलता और प्रतिबद्धता को दर्शाता है, जो अपने जीवन के महत्वपूर्ण वर्ष राष्ट्र सेवा में समर्पित करते हैं। हम सभी से अपील करते हैं कि इस अवसर का लाभ उठाएं और यदि आपके आसपास कोई रेलवे पेंशनभोगी है, तो उन्हें इस शिविर की जानकारी अवश्य दें। यह उनके लिए एक बड़ी सहायता साबित होगी।
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Written & Verified By
नागौर के युवा पत्रकार और डिजिटल मीडिया विशेषज्ञ। अभिषेक जी को ग्रामीण विकास और स्थानीय समस्याओं के सटीक विश्लेषण का गहरा अनुभव है।