
बीकानेर रोड जाम: 7 हजार यात्री और 50 बसें सड़क पर, स्टैंड का इंतजार
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हमारे नागौर संवाददाता के अनुसार...
बीकानेर रेलवे फाटक पर ओवरब्रिज निर्माण शुरू होने के बाद से बंद पड़ा फलोदी बस स्टैंड शहर के लिए एक स्थायी सिरदर्द बन गया है। पिछले एक दशक से भी अधिक समय से, यात्री और बसें कृषि मंडी तिराहे और बीकानेर रोड फोरलेन पर खुले में खड़े होने को मजबूर हैं, जिससे आए दिन भीषण जाम की स्थिति बनती है और हजारों यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।
बस स्टैंड का अभाव बना जाम का कारण
शहर के पित्ती अस्पताल के पास संचालित फलोदी बस स्टैंड के बंद होने के बाद से, रोडवेज और निजी बसों का ठहराव ओवरब्रिज के नीचे और कृषि मंडी तिराहे पर होने लगा। समय के साथ, 16 जिलों में आवाजाही के लिए यात्रीभार में लगातार वृद्धि हुई है। वर्तमान में, बीकानेर रोड फोरलेन स्थित यह तिराहा स्थायी जाम का मुख्य केंद्र बन गया है। यहां से जोधपुर, बीकानेर, जैसलमेर, श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, फलोदी, कोटा, बूंदी, झालावाड़, भीलवाड़ा, चित्तौड़गढ़, उदयपुर, राजसमंद, जयपुर और बाड़मेर सहित बाहरी राज्यों/शहरों (दिल्ली, आगरा, जम्मू, चंडीगढ़, अहमदाबाद, सूरत, हैदराबाद) के लिए प्रतिदिन 40 से 50 निजी व रोडवेज बसें गुजरती हैं। विडंबना यह है कि इतने बड़े यात्रीभार वाले इस मुख्य बिंदु पर बसों के ठहराव के लिए पर्याप्त स्थान की कमी है, जिसके कारण दिन भर भीषण जाम लगा रहता है।
यात्रियों को हो रही भारी परेशानी
वर्तमान में, कृषि मंडी तिराहे पर बीकानेर रोड फोरलेन से सटकर केवल एक रोडवेज का टिकट काउंटर संचालित हो रहा है। रोजाना गुजरने वाली दर्जनों बसें मुख्य फोरलेन सड़क पर ही बीचों-बीच खड़ी हो जाती हैं, जिससे यातायात बुरी तरह बाधित होता है। बसों में चढ़ने-उतरने के दौरान महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को तेज रफ्तार गाड़ियों के बीच अपनी जान जोखिम में डालना पड़ता है, जिससे हादसे की आशंका बनी रहती है।
बस स्टैंड के प्रस्तावों का लंबा इंतजार
फलोदी बस स्टैंड कार्यालय बंद होने के बाद, वर्ष 2017 में तत्कालीन सभापति कृपाराम सोलंकी के कार्यकाल में कृषि मंडी तिराहे के पास एक दूसरा बस स्टैंड बनाने का प्रस्ताव तैयार कर कलेक्टर को भेजा गया था। हालांकि, न तो जमीन आवंटित हुई और न ही स्टैंड का निर्माण हो पाया। इसके बाद, वर्ष 2023 और फिर हाल ही में 2026 में भी बस स्टैंड बनाने के प्रस्ताव लिए गए, लेकिन अब तक कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आया है। नतीजा यह है कि बसें और यात्री सड़क पर खड़े होने को मजबूर हैं। तिराहे से आधे दर्जन से अधिक जिलों के लिए स्लीपर, लोक परिवहन और रोडवेज बसों का संचालन होता है। बसों के बीकानेर रोड फोरलेन पर ही खड़े होने और डिवाइडर के कारण, दिन भर में 15 से 20 बार जाम की स्थिति बनती है, और लगभग 5 से 7 हजार यात्रियों को खुले में, अपनी जान जोखिम में डालकर बसों का इंतजार करना पड़ता है।
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Written & Verified By
नागौर के युवा पत्रकार और डिजिटल मीडिया विशेषज्ञ। अभिषेक जी को ग्रामीण विकास और स्थानीय समस्याओं के सटीक विश्लेषण का गहरा अनुभव है।