
जयपुर के पूर्णिमा विश्वविद्यालय में दर्दनाक हादसा: छात्रा की मौत, शिक्षा संस्थानों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल
Posted on 1 नवंबर 2026
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हमारे नागौर संवाददाता के अनुसार, राजधानी जयपुर के सीतापुरा स्थित पूर्णिमा विश्वविद्यालय में हुए एक दुखद हादसे ने समूचे शिक्षा जगत को झकझोर कर रख दिया है। शनिवार सुबह (31 अक्टूबर 2026) एमबीए द्वितीय वर्ष की एक छात्रा ने विश्वविद्यालय भवन की छठी मंजिल से कूदकर जान दे दी, जिससे मौके पर ही उसकी मौत हो गई। इस घटना ने एक बार फिर प्रदेश के शिक्षण संस्थानों में छात्रों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, मृतक छात्रा की पहचान मानसरोवर, प्रेम नगर निवासी यशस्वी रोहिल्ला (23) के रूप में हुई है। विश्वविद्यालय के सीसीटीवी फुटेज में यशस्वी सुबह 9:48 बजे छत की ओर जाती हुई दिखाई दी। शिवदासपुरा थाना अधिकारी राजेश गौतम ने बताया कि फिलहाल छात्रा की मौत के कारणों का स्पष्ट पता नहीं चल पाया है और मामले की गहनता से जांच की जा रही है।
परीक्षा से पहले फोन कॉल और जांच का दायरा
पुलिस की शुरुआती जांच में सामने आया है कि यशस्वी का कुछ दिन पहले ही कैंपस प्लेसमेंट हुआ था और शनिवार को उसकी मिड-टर्म परीक्षा थी। परीक्षा से ठीक पहले वह अपने दोस्तों के साथ थी, तभी उसके पास एक फोन कॉल आया। इस कॉल के बाद ही वह विश्वविद्यालय भवन की सबसे ऊपरी मंजिल पर पहुंची और यह दुखद कदम उठाया। पुलिस अब छात्रा की आखिरी बातचीत और घटना से पहले की सभी परिस्थितियों का पता लगाने में जुटी है।
हालांकि, अभी तक मौत के कारणों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन परिवारजनों का कहना है कि छात्रा की परीक्षा सुबह 9:45 बजे थी और उससे ठीक पहले आए फोन कॉल की बात सामने आई है। परिवार ने पुलिस से कॉल करने वाले व्यक्ति की पहचान, बातचीत का समय और अन्य सभी डिजिटल साक्ष्यों की बारीकी से जांच करने की मांग की है। उनका यह भी कहना है कि सिर्फ फोन कॉल को ही घटना का एकमात्र कारण नहीं माना जा सकता, बल्कि यह भी जांच होनी चाहिए कि छात्रा ऊपरी मंजिल तक कैसे पहुंची और उसे रोकने के लिए पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम क्यों नहीं थे?
प्रदेश में छात्रों की सुरक्षा पर लगातार उठते सवाल
यह पहला ऐसा मामला नहीं है जब जयपुर में किसी शिक्षण संस्थान में छात्र सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। हमें याद है कि ठीक एक साल पहले, 1 नवंबर 2025 को नीरजा मोदी स्कूल में भी चौथी कक्षा की छात्रा अमायरा की स्कूल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद मौत हो गई थी। उस समय परिवारजनों ने शिक्षकों पर बुलिंग की शिकायतों पर ध्यान न देने के आरोप लगाए थे। इसके बाद सीबीएसई की जांच में स्कूल में सुरक्षा, निगरानी और बाल संरक्षण से जुड़ी कई खामियां उजागर हुई थीं। अब पूर्णिमा विश्वविद्यालय में हुई यह घटना एक बार फिर शिक्षण संस्थानों में छात्रों की सुरक्षा के प्रति संवेदनशीलता और जवाबदेही पर बड़े प्रश्नचिह्न लगा रही है।
शिक्षा विभाग को लेनी होगी जिम्मेदारी
हमारी टीम का मानना है कि ऐसे लगातार हो रहे हादसों के बाद बीकानेर निदेशालय और जयपुर सचिवालय को इस मामले में गंभीरता से संज्ञान लेना चाहिए। प्रदेश के सभी निजी और सरकारी शिक्षण संस्थानों में छात्रों की शारीरिक और मानसिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए तत्काल प्रभाव से कड़े सुरक्षा दिशा-निर्देश जारी किए जाने चाहिए। इन निर्देशों में निम्न बिंदुओं पर विशेष ध्यान देना होगा:
- उच्च स्तरीय सुरक्षा इंतजाम: इमारतों की ऊंचाई वाले स्थानों पर पर्याप्त बैरिकेडिंग और सुरक्षा जाली लगाना।
- मनोवैज्ञानिक परामर्श: छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य के लिए नियमित परामर्श सत्र और हेल्पलाइन की सुविधा।
- सीसीटीवी निगरानी: सभी संवेदनशील स्थानों पर चौबीसों घंटे प्रभावी सीसीटीवी निगरानी।
- जवाबदेही तय करना: किसी भी सुरक्षा चूक के लिए संस्थान प्रशासन की जवाबदेही तय करना।
- शिक्षक-छात्र संवाद: छात्रों को अपनी समस्याओं को खुलकर साझा करने के लिए एक सुरक्षित और भरोसेमंद वातावरण प्रदान करना।
यह घटना हमें याद दिलाती है कि शिक्षा केवल अकादमिक उत्कृष्टता तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह छात्रों के सर्वांगीण विकास और उनकी सुरक्षा को सुनिश्चित करने की भी एक बड़ी जिम्मेदारी है। प्रशासन को इस दिशा में तत्काल और प्रभावी कदम उठाने होंगे ताकि भविष्य में ऐसी किसी भी दुखद घटना को रोका जा सके और हमारे छात्र एक सुरक्षित एवं भयमुक्त माहौल में शिक्षा ग्रहण कर सकें।
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Written & Verified By
नागौर के युवा पत्रकार और डिजिटल मीडिया विशेषज्ञ। अभिषेक जी को ग्रामीण विकास और स्थानीय समस्याओं के सटीक विश्लेषण का गहरा अनुभव है।


