
नागौर: आदर्श आचार संहिता उल्लंघन पर सरकारी शिक्षक को नोटिस, कार्रवाई तय!
Posted on 2 नवंबर 2026
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नागौर। पंचायतीराज चुनाव के दौरान आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन के मामले में जिला प्रशासन अब सख्त हो गया है। एक सरकारी शिक्षक को इस गंभीर शिकायत पर रिटर्निंग अधिकारी द्वारा नोटिस जारी किया गया है, जिसने जिलेभर के सरकारी कर्मचारियों और विशेषकर शिक्षकों में हड़कंप मचा दिया है। हमारी टीम को मिली जानकारी के अनुसार, संबंधित शिक्षक से तीन दिन के भीतर इस पूरे प्रकरण पर स्पष्टीकरण मांगा गया है, जिसके बाद आगामी कार्रवाई की जाएगी।
हमारे नागौर संवाददाता के अनुसार, यह मामला गिड़ा पंचायत समिति क्षेत्र से जुड़ा है, जहाँ एक राउमावि गोदारों की बस्ती के शिक्षक पर आदर्श आचार संहिता के नियमों का उल्लंघन करने का आरोप लगा है। चुनाव आयोग और बीकानेर निदेशालय (शिक्षा विभाग) द्वारा जारी स्पष्ट निर्देशों के बावजूद, कुछ सरकारी कर्मचारी चुनावी प्रक्रिया के दौरान अपनी निष्पक्षता बनाए रखने में विफल हो रहे हैं। यह घटना ऐसे ही एक गंभीर उल्लंघन का उदाहरण है, जिस पर प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है।
क्या है आदर्श आचार संहिता और सरकारी कर्मचारियों की भूमिका?
आदर्श आचार संहिता (Model Code of Conduct) चुनाव प्रक्रिया की शुचिता और निष्पक्षता बनाए रखने के लिए चुनाव आयोग द्वारा लागू किए गए नियमों का एक सेट है। इन नियमों का पालन सभी राजनीतिक दलों, उम्मीदवारों और सबसे महत्वपूर्ण, सरकारी कर्मचारियों के लिए अनिवार्य होता है। सरकारी कर्मचारी, चाहे वे शिक्षा विभाग से हों या किसी अन्य विभाग से, चुनावी ड्यूटी पर हों या न हों, उन्हें किसी भी राजनीतिक दल या उम्मीदवार के पक्ष में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से प्रचार करने या समर्थन देने की अनुमति नहीं होती है। उनकी भूमिका पूरी तरह से निष्पक्ष और तटस्थ होनी चाहिए। जयपुर सचिवालय से जारी दिशा-निर्देशों में भी यह स्पष्ट किया गया है कि किसी भी प्रकार की राजनीतिक गतिविधि में संलिप्तता सेवा नियमों का उल्लंघन मानी जाएगी।
सरकारी कर्मचारियों के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश
- निष्पक्षता: सरकारी कर्मचारियों को चुनाव के दौरान पूरी तरह से निष्पक्ष रहना चाहिए।
- राजनीतिक गतिविधियों से दूरी: किसी भी राजनीतिक दल या उम्मीदवार के लिए प्रचार, समर्थन या विरोधी गतिविधि में शामिल नहीं होना।
- सोशल मीडिया का उपयोग: सोशल मीडिया पर भी राजनीतिक पोस्ट, कमेंट या शेयर करने से बचना।
- कार्यालय का दुरुपयोग: किसी भी उम्मीदवार के प्रचार के लिए सरकारी संसाधनों या कार्यालय का दुरुपयोग नहीं करना।
- मतदान की गोपनीयता: मतदान करते समय गोपनीयता बनाए रखना और किसी भी प्रकार की राजनीतिक बयानबाजी से बचना।
स्पष्टीकरण न देने पर गंभीर परिणाम
जारी नोटिस में स्पष्ट किया गया है कि यदि शिक्षक तीन दिन के भीतर संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं देते हैं, तो उनके खिलाफ राजस्थान सेवा नियमों के तहत कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। इसमें वेतन वृद्धि रोकने से लेकर निलंबन और सेवा समाप्ति तक की कार्रवाई शामिल हो सकती है। बीकानेर निदेशालय भी ऐसे मामलों में तत्काल कार्रवाई के निर्देश देता रहा है, ताकि अन्य कर्मचारियों के लिए एक मिसाल कायम की जा सके। यह घटना उन सभी सरकारी कर्मचारियों के लिए एक चेतावनी है, जो चुनाव के दौरान आदर्श आचार संहिता की अवहेलना करने का विचार कर सकते हैं।
हमारी टीम इस पूरे मामले पर लगातार नजर बनाए हुए है और जैसे ही शिक्षक का स्पष्टीकरण प्राप्त होता है या प्रशासन द्वारा कोई अगली कार्रवाई की जाती है, हम आपको सूचित करेंगे। प्रशासन का यह कदम यह सुनिश्चित करता है कि चुनावी प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की अनियमितता या पक्षपात को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
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Written & Verified By
नागौर के युवा पत्रकार और डिजिटल मीडिया विशेषज्ञ। अभिषेक जी को ग्रामीण विकास और स्थानीय समस्याओं के सटीक विश्लेषण का गहरा अनुभव है।


