
नागौर: प्राइवेट स्कूलों का 60 करोड़ बकाया, शिक्षा विभाग कार्यालय पर प्रदर्शन
Posted on 2 नवंबर 2026
Listen News
Audio Summary
हमारे नागौर संवाददाता के अनुसार, जिले में निजी स्कूलों को सरकारी योजनाओं के तहत मिलने वाले भुगतान में लंबे समय से हो रही देरी ने अब स्कूल संचालकों के सब्र का बांध तोड़ दिया है। सोमवार को नागौर में निजी स्कूल संगठनों ने शिक्षा विभाग के कार्यालय का घेराव कर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान सैकड़ों की संख्या में स्कूल संचालक एकत्र हुए और अपने लंबित भुगतान को लेकर अपनी आवाज बुलंद की।
सुबह 10 बजे से दोपहर 12 बजे तक चले इस प्रदर्शन में स्कूल संचालक मुख्य गेट पर धरने पर बैठ गए और सरकार तथा विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शनकारी संचालकों ने अधिकारियों को कार्यालय में प्रवेश करने से भी रोका, जिससे स्थिति तनावपूर्ण हो गई। स्कूल संचालकों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही उनकी मांगों का समाधान नहीं किया गया, तो वे इस आंदोलन को प्रदेश स्तर पर तेज करने को मजबूर होंगे।
लंबित भुगतान की स्थिति: 60 करोड़ रुपये से अधिक बकाया
जिला स्कूल एसोसिएशन के सचिव विनेश कुमार ने हमारी टीम को बताया कि नागौर जिले की निजी स्कूलों का विभिन्न सरकारी योजनाओं के तहत लगभग 60 करोड़ रुपये का भुगतान बकाया है। इसमें कई वर्षों का भुगतान शामिल है, जिससे स्कूलों के संचालन में भारी कठिनाई आ रही है।
- वित्तीय वर्ष 2023-24: इस वर्ष का 30 प्रतिशत भुगतान अभी तक लंबित है।
- वित्तीय वर्ष 2024-25 और 2025-26: इन दोनों वर्षों का 100 प्रतिशत भुगतान अब तक नहीं हुआ है।
विनेश कुमार ने यह भी बताया कि लंबे समय से यह राशि नहीं मिलने के कारण निजी स्कूल संचालकों को स्कूलों के संचालन, शिक्षकों के वेतन और अन्य शिक्षण व्यवस्थाओं को बनाए रखने में गंभीर आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। स्कूलों को अपने दैनिक खर्चों को पूरा करने में मुश्किल हो रही है, जिससे शिक्षा की गुणवत्ता पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।
बालिका शिक्षा फाउंडेशन और मुख्यमंत्री बालक प्रोत्साहन योजना का भी भुगतान अटका
स्कूल संचालकों ने बताया कि केवल RTE ही नहीं, बल्कि अन्य महत्वपूर्ण योजनाओं का भुगतान भी अटका हुआ है।
- बालिका शिक्षा फाउंडेशन: इस योजना के तहत वर्ष 2023 से 2026 तक का भुगतान बकाया चल रहा है।
- मुख्यमंत्री बालक प्रोत्साहन योजना: इस योजना के तहत वर्ष 2024 से 2026 तक का 100 प्रतिशत भुगतान लंबित है।
ये योजनाएं सीधे तौर पर विद्यार्थियों के अभिभावकों के खातों में राशि जमा करने से संबंधित हैं, लेकिन समय पर भुगतान न होने से निजी स्कूलों की आर्थिक स्थिति लगातार बिगड़ रही है, जिससे उन्हें बच्चों की शिक्षा सुनिश्चित करने में बाधाएं आ रही हैं।
नर्सरी से RTE भुगतान शुरू करने की मांग
प्रदर्शन के दौरान निजी स्कूल संचालकों ने RTE भुगतान व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण बदलाव की मांग भी उठाई। उनका तर्क है कि सरकार की ओर से बच्चों को नर्सरी कक्षा से ही RTE के तहत प्रवेश दिया जाता है, लेकिन स्कूलों को भुगतान केवल पहली से आठवीं कक्षा तक का ही मिलता है। ऐसे में नर्सरी से पहली कक्षा तक के बच्चों को पढ़ाने का पूरा खर्च स्कूल संचालकों को स्वयं वहन करना पड़ता है, जो उनके लिए एक अतिरिक्त वित्तीय बोझ है। उन्होंने मांग की कि RTE के तहत भुगतान नर्सरी कक्षा से ही शुरू किया जाना चाहिए, ताकि सभी बच्चों को समान रूप से शिक्षा मिल सके और स्कूलों पर अनावश्यक बोझ न पड़े।
समाधान न होने पर प्रदेशव्यापी आंदोलन की चेतावनी
प्रदर्शनकारी स्कूल संचालकों ने शिक्षा विभाग के अधिकारियों से सभी लंबित भुगतानों का जल्द से जल्द निस्तारण करने और सरकारी योजनाओं की भुगतान प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाने की मांग की। संचालकों का स्पष्ट कहना है कि यदि सरकार और विभाग ने जल्द ही उनकी मांगों पर गंभीरता से कार्रवाई नहीं की, तो वे निजी स्कूल संचालक पूरे प्रदेश में एक बड़ा आंदोलन करने को मजबूर होंगे। हमारी टीम इस पूरे मामले पर अपनी नजर बनाए हुए है और लगातार अपडेट्स प्रदान करेगी।
📲 खबर पसंद आई?
अपने दोस्तों के साथ शेयर करें!

Written & Verified By
नागौर के युवा पत्रकार और डिजिटल मीडिया विशेषज्ञ। अभिषेक जी को ग्रामीण विकास और स्थानीय समस्याओं के सटीक विश्लेषण का गहरा अनुभव है।


