
चुनाव प्रशिक्षण से अनुपस्थित 3 कर्मचारी निलंबित: शिक्षकों को मिली महत्वपूर्ण चेतावनी
Posted on 3 नवंबर 2026
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नागौर, 3 नवंबर 2026: पंचायतीराज चुनाव-2026 के दूसरे चरण के प्रशिक्षण में बिना सूचना अनुपस्थित रहने पर तीन सरकारी कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। इनमें एक शिक्षक भी शामिल हैं, जिससे प्रदेशभर के सरकारी कर्मचारियों, विशेषकर शिक्षा विभाग से जुड़े कार्मिकों में चुनाव ड्यूटी के प्रति गंभीरता बनाए रखने का स्पष्ट संदेश गया है। जिला निर्वाचन अधिकारी ने इस संबंध में सख्त आदेश जारी किए हैं, जो दर्शाते हैं कि निर्वाचन संबंधी निर्देशों की अवहेलना पर कोई रियायत नहीं बरती जाएगी।
क्या है पूरा मामला?
हमारी टीम ने मामले की गहन पड़ताल की है। जानकारी के अनुसार, करौली में पंचायतीराज चुनाव-2026 के तीसरे चरण के मतदान के लिए नियुक्त कर्मचारियों का दूसरा महत्वपूर्ण प्रशिक्षण 2 नवंबर को राजकीय महाविद्यालय में आयोजित किया गया था। इस प्रशिक्षण में सभी संबंधित कर्मचारियों की उपस्थिति अनिवार्य थी। हालांकि, कुछ कर्मचारी बिना किसी पूर्व सूचना या अनुमति के गैरहाजिर रहे, जिस पर जिला प्रशासन ने त्वरित और कड़ी कार्रवाई की है।
जिन कर्मचारियों को निलंबित किया गया है, उनमें हिंडौन के दो कृषि पर्यवेक्षक, अमर सिंह मीना और सतीश कुमार, तथा राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय कानरदा महाराजपुरा के शिक्षक रामलखन बैरवा शामिल हैं। इन तीनों को जिला निर्वाचन अधिकारी अक्षय गोदारा द्वारा जारी आदेशों के तहत निलंबित किया गया है। यह कार्रवाई निर्वाचन संबंधी निर्देशों की अनदेखी और प्रशिक्षण से गैरहाजिरी के गंभीर कदाचार के लिए की गई है।
नियम और परिणाम
यह निलंबन राजस्थान सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम, 1958 के नियम 13 के तहत किया गया है। यह नियम सरकारी कर्मचारियों द्वारा कर्तव्य में लापरवाही या आदेशों की अवहेलना पर अनुशासनात्मक कार्रवाई का प्रावधान करता है।
- तत्काल प्रभाव से निलंबन: तीनों कर्मचारियों को बिना किसी देरी के निलंबित कर दिया गया है।
- मुख्यालय का बदलाव: निलंबन की अवधि के दौरान तीनों कर्मचारियों का मुख्यालय जिला नियंत्रण कक्ष, कलक्ट्रेट करौली रहेगा।
- निर्वाह भत्ता: नियमानुसार, निलंबन अवधि में उन्हें निर्वाह भत्ता प्रदान किया जाएगा।
शिक्षा विभाग के लिए संदेश
इस घटनाक्रम का प्रदेश के शिक्षा विभाग पर व्यापक प्रभाव पड़ने की संभावना है। शिक्षकों को अक्सर विभिन्न प्रकार की गैर-शैक्षणिक ड्यूटी में लगाया जाता है, जिनमें जनगणना, चुनाव कार्य और अन्य प्रशासनिक कार्य शामिल होते हैं। यह निलंबन इस बात पर जोर देता है कि इन जिम्मेदारियों को उतनी ही गंभीरता से लिया जाना चाहिए जितनी कि नियमित शिक्षण कार्यों को।
जयपुर सचिवालय और बीकानेर निदेशालय से समय-समय पर जारी होने वाले निर्देशों में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि चुनाव जैसी राष्ट्रीय महत्व की ड्यूटी में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यह घटना शिक्षकों और अन्य सरकारी कर्मचारियों के लिए एक कड़ा संदेश है कि उन्हें अपने आवंटित कर्तव्यों के प्रति पूरी तरह से जवाबदेह और प्रतिबद्ध रहना होगा। भविष्य में ऐसी किसी भी चूक पर समान रूप से सख्त कार्रवाई की जा सकती है। हमारी टीम सभी सरकारी कर्मचारियों से अपील करती है कि वे अपने कर्तव्यों को गंभीरता से लें और किसी भी प्रकार की कठिनाई होने पर समय रहते सक्षम प्राधिकारी को सूचित करें।
हमारे नागौर संवाददाता के अनुसार, यह घटना यह भी दर्शाती है कि चुनाव आयोग और जिला प्रशासन अब निर्वाचन प्रक्रिया की शुचिता और दक्षता सुनिश्चित करने के लिए पहले से कहीं अधिक प्रतिबद्ध हैं। सरकारी सेवाओं में अनुशासन और समर्पण का महत्व सर्वोच्च है, और इस प्रकार की कार्रवाई भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने में सहायक होगी।
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Written & Verified By
नागौर के युवा पत्रकार और डिजिटल मीडिया विशेषज्ञ। अभिषेक जी को ग्रामीण विकास और स्थानीय समस्याओं के सटीक विश्लेषण का गहरा अनुभव है।


