
राजस्थान के शिक्षा विभाग को मिला राष्ट्रीय सम्मान: 'खुशीशाला' और AI तकनीक से बदलेगी नागौर के स्कूलों की सूरत
Posted on 30 अक्टूबर 2026
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हमारे नागौर संवाददाता के अनुसार, राजस्थान के शिक्षा विभाग ने राष्ट्रीय स्तर पर एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। शिक्षा जगत में नवाचार को बढ़ावा देने के लिए विभाग की दो प्रमुख पहलों को 'स्कॉच अवॉर्ड' (SKOCH Award) से सम्मानित किया गया है। यह गौरव का क्षण न केवल राज्य के लिए है, बल्कि नागौर जिले के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले लाखों विद्यार्थियों के लिए एक नई उम्मीद लेकर आया है।
क्या है यह खास उपलब्धि?
शिक्षा निदेशालय (बीकानेर) के मार्गदर्शन में तैयार की गई इन दो योजनाओं को राष्ट्रीय स्तर पर सराहा गया है:
- खुशीशाला - खुद की खोज: यह पहल बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य और उनकी व्यक्तिगत रुचियों को पहचानने पर केंद्रित है। इसका उद्देश्य स्कूल के माहौल को तनावमुक्त बनाकर बच्चों की रचनात्मकता को निखारना है।
- एआई आधारित दक्षता आकलन (AI-based Competency Assessment): यह तकनीक विद्यार्थियों की सीखने की क्षमता का सटीक विश्लेषण करेगी। इससे शिक्षकों को यह समझने में आसानी होगी कि किस बच्चे को किस विषय में अतिरिक्त सहायता की आवश्यकता है।
विद्यार्थियों और शिक्षकों के लिए इसके मायने
जयपुर सचिवालय से प्राप्त जानकारी के अनुसार, इन योजनाओं का मुख्य उद्देश्य शिक्षा की गुणवत्ता को तकनीक के साथ जोड़ना है। नागौर जिले के शिक्षकों के लिए इसका सीधा अर्थ यह है कि अब 'शाला दर्पण' पोर्टल पर डेटा-संचालित शिक्षण विधियों का उपयोग बढ़ेगा।
आगे क्या होगा?
विभाग अब इन योजनाओं को चरणबद्ध तरीके से जिले के सभी ब्लॉक मुख्यालयों तक पहुँचाने की तैयारी कर रहा है। इसका सीधा लाभ बोर्ड कक्षाओं के विद्यार्थियों को मिलेगा, क्योंकि एआई आधारित आकलन से उनकी कमियों को परीक्षा से पहले ही दूर किया जा सकेगा। शिक्षा विभाग के आला अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि आगामी सत्रों में नवाचारी गतिविधियों को शाला प्रबंधन समितियों (SMC) के माध्यम से और अधिक प्रभावी बनाया जाएगा। यह कदम राज्य के सरकारी स्कूलों को निजी विद्यालयों के मुकाबले अधिक प्रतिस्पर्धी और आधुनिक बनाने की दिशा में एक बड़ा प्रयास है।
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Written & Verified By
नागौर के युवा पत्रकार और डिजिटल मीडिया विशेषज्ञ। अभिषेक जी को ग्रामीण विकास और स्थानीय समस्याओं के सटीक विश्लेषण का गहरा अनुभव है।


