
शिक्षा के साथ सुरक्षा का अधिकार: आरटीई अधिनियम पर जिला न्यायाधीश की अहम जानकारी
Posted on 27 अक्टूबर 2026
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हमारे **नागौर** संवाददाता के अनुसार, बच्चों के मौलिक अधिकारों को लेकर एक महत्वपूर्ण विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। इस शिविर में जिला एवं सेशन न्यायाधीश एस.एन. टेलर ने स्पष्ट किया कि प्रत्येक बच्चे को न केवल गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त करने का अधिकार है, बल्कि उसे स्कूल परिसर में पूर्ण सुरक्षा सुनिश्चित करने का भी हक है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यदि किसी बच्चे को स्कूल की लापरवाही के कारण किसी भी प्रकार की चोट पहुँचती है, तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ किशोर न्याय अधिनियम की धारा-75 के तहत कड़ी कार्रवाई की जा सकती है, जिसमें कारावास और जुर्माने का प्रावधान है।
आरटीई अधिनियम 2009: बच्चों के अधिकार
न्यायाधीश टेलर ने विशेष रूप से शिक्षा के अधिकार (आरटीई) अधिनियम 2009 के प्रावधानों पर प्रकाश डाला। उन्होंने विस्तार से बताया कि इस अधिनियम के तहत प्रत्येक बच्चे को:
- प्रवेश का अधिकार: किसी भी बच्चे को स्कूल में प्रवेश से वंचित नहीं किया जा सकता।
- मुफ्त एवं अनिवार्य शिक्षा: 6 से 14 वर्ष तक के सभी बच्चों को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा प्रदान की जानी चाहिए।
- सुरक्षित इंफ्रास्ट्रक्चर: स्कूलों में बच्चों के लिए सुरक्षित एवं उपयुक्त भौतिक वातावरण होना आवश्यक है।
- योग्य शिक्षक: शिक्षा प्रदान करने के लिए योग्य और प्रशिक्षित शिक्षकों की नियुक्ति होनी चाहिए।
- भेदभाव रहित वातावरण: दिव्यांग बच्चों सहित किसी भी बच्चे के साथ किसी भी प्रकार का भेदभाव नहीं किया जाना चाहिए।
शिविर के दौरान, छात्रों ने कई महत्वपूर्ण प्रश्न पूछे, जिनमें शौचालयों की उपलब्धता और रखरखाव, पीने के स्वच्छ पानी की व्यवस्था, शिक्षक-छात्र अनुपात तथा स्कूल के बुनियादी ढांचे की स्थिति जैसे मुद्दे शामिल थे। इन प्रश्नों के उत्तर न्यायाधीश टेलर और अन्य उपस्थित शिक्षाधिकारियों द्वारा दिए गए, जिससे छात्रों की शंकाओं का समाधान हुआ।
जागरूकता का महत्व
जिला शिक्षा अधिकारी सीताराम गोयल ने भी इस अवसर पर संबोधित करते हुए शिक्षा के साथ-साथ बच्चों की सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया। प्रधानाध्यापक विनोद विजयवर्गीय और विद्यालय के समस्त स्टाफ ने इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम के आयोजन में सहयोग किया और सभी उपस्थित गणमान्य व्यक्तियों का धन्यवाद ज्ञापित किया। यह 'ट्रांसफॉर्मेटिव ट्यूजडे' कार्यक्रम बच्चों के अधिकारों के प्रति समाज में जागरूकता फैलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ।
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नागौर के युवा पत्रकार और डिजिटल मीडिया विशेषज्ञ। अभिषेक जी को ग्रामीण विकास और स्थानीय समस्याओं के सटीक विश्लेषण का गहरा अनुभव है।


