
नागौर में स्कूली बच्चों ने संभाली मतदाता जागरूकता की कमान: पंचायत चुनाव 2026 में बढे़गी वोटिंग
Posted on 22 अक्टूबर 2026
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हमारे नागौर संवाददाता के अनुसार, आगामी पंचायती राज चुनाव-2026 में मतदाताओं की अधिक से अधिक भागीदारी सुनिश्चित करने और लोकतांत्रिक प्रक्रिया को मजबूत बनाने के उद्देश्य से पूरे जिले में व्यापक मतदाता जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। इस महत्वपूर्ण पहल में शिक्षा विभाग भी सक्रिय भूमिका निभा रहा है। बीकानेर निदेशालय के मार्गदर्शन में, नागौर जिले के विभिन्न विद्यालयों के छात्र-छात्राएं जागरूकता रैलियों के माध्यम से आमजन को मतदान के लिए प्रेरित कर रहे हैं, जो भविष्य के जिम्मेदार नागरिकों के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
यह अभियान केवल मतदान प्रतिशत बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य प्रत्येक पात्र नागरिक को अपने मताधिकार के महत्व से अवगत कराना भी है। नागौर जिले के कई उपखंडों, जैसे मकराना, डेगाना, मेड़ता, और जायल, में स्कूली बच्चों ने उत्साहपूर्वक इन रैलियों में भाग लिया। उनके हाथों में 'मेरा वोट, मेरा अधिकार', 'लोकतंत्र का आधार, वोट करें हर बार', और 'जागरूक नागरिक बनें, मतदान अवश्य करें' जैसे नारे लिखे हुए पोस्टर और तख्तियां थीं। इन रैलियों के माध्यम से बच्चों ने अपने परिवार के सदस्यों, पड़ोसियों और स्थानीय समुदाय को मतदान के लिए प्रोत्साहित किया।
शिक्षा विभाग की भूमिका और छात्रों का योगदान
शिक्षा विभाग द्वारा चलाए जा रहे इस अभियान का मूल मंत्र छात्रों में शुरुआती दौर से ही लोकतांत्रिक मूल्यों और नागरिक कर्तव्यों की भावना विकसित करना है। स्कूल पाठ्यक्रम के अतिरिक्त, ऐसी गतिविधियां छात्रों को व्यावहारिक ज्ञान प्रदान करती हैं और उन्हें समाज के सक्रिय सदस्य के रूप में अपनी भूमिका को समझने में मदद करती हैं।
- नागरिक शिक्षा का सुदृढ़ीकरण: यह अभियान छात्रों को भारतीय लोकतंत्र की नींव और मतदान के महत्व के बारे में शिक्षित करता है।
- नेतृत्व और सामाजिक कौशल का विकास: जागरूकता रैलियों में भाग लेने से छात्रों में नेतृत्व क्षमता, टीम वर्क और सार्वजनिक बोलने के कौशल का विकास होता है।
- पारिवारिक और सामुदायिक सहभागिता: बच्चों के माध्यम से दिया गया संदेश परिवारों और समुदायों में अधिक गंभीरता से लिया जाता है, जिससे मतदान के प्रति जागरूकता बढ़ती है।
- दिव्यांग मतदाताओं पर विशेष जोर: अभियान में दिव्यांग मतदाताओं सहित सभी वर्गों के लोगों को मतदान के लिए प्रेरित करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, ताकि कोई भी मतदाता पीछे न छूटे।
जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग का समन्वय
जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग के बीच प्रभावी समन्वय के कारण ही यह अभियान सफल हो पा रहा है। जिला स्तर पर नियुक्त स्वीप (Systematic Voters' Education and Electoral Participation) कोऑर्डिनेटर और शिक्षा विभाग के अधिकारी यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि जागरूकता गतिविधियां प्रभावी ढंग से चलाई जाएं। विभिन्न विद्यालयों में शिक्षकों को भी छात्रों को मतदान के महत्व के बारे में समझाने के लिए प्रशिक्षित किया गया है।
हमारी टीम ने पाया है कि इन रैलियों का प्रभाव केवल शहरी क्षेत्रों तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीण अंचल में भी छात्रों की भागीदारी ने उत्साह का संचार किया है। अभिभावक भी अपने बच्चों को ऐसे सामाजिक अभियानों में भाग लेते देख गर्व महसूस कर रहे हैं, जो एक सकारात्मक सामाजिक परिवर्तन का संकेत है।
यह अभियान इस बात का प्रमाण है कि शिक्षा केवल अकादमिक ज्ञान प्रदान करने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह एक ऐसे समाज के निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है जहां प्रत्येक नागरिक अपने अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति सचेत हो। पंचायती राज चुनाव-2026 में मतदान प्रतिशत बढ़ाने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम है, जो भविष्य में एक मजबूत और जागरूक लोकतंत्र की नींव रखेगा।
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Written & Verified By
नागौर के युवा पत्रकार और डिजिटल मीडिया विशेषज्ञ। अभिषेक जी को ग्रामीण विकास और स्थानीय समस्याओं के सटीक विश्लेषण का गहरा अनुभव है।


