
राजस्थान के स्कूलों में लगेंगे 'शुगर बोर्ड': बच्चों को सिखाएंगे पैकेटबंद खाने का सच
Posted on 23 अक्टूबर 2026
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हमारे नागौर संवाददाता के अनुसार, राजस्थान के स्कूली शिक्षा विभाग ने एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए प्रदेश के सभी सरकारी और निजी विद्यालयों में 'शुगर बोर्ड' लगाने के निर्देश जारी किए हैं। बीकानेर निदेशालय द्वारा दी गई इन गाइडलाइन्स का मुख्य उद्देश्य बढ़ते हुए जंक फूड के चलन पर लगाम लगाना और विद्यार्थियों को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करना है।
क्या है यह नई व्यवस्था?
अब स्कूलों में एक विशेष 'शुगर बोर्ड' प्रदर्शित किया जाएगा। इस बोर्ड के माध्यम से बच्चों को बताया जाएगा कि उनके द्वारा खाए जाने वाले लोकप्रिय खाद्य पदार्थों में चीनी की मात्रा कितनी होती है। इसमें मुख्य रूप से शामिल होंगे:
- चॉकलेट और कैंडी
- बिस्किट व बेकरी उत्पाद
- पैकेटबंद जूस और कोल्ड ड्रिंक्स
- अन्य उच्च चीनी वाले प्रोसेस्ड फूड्स
क्यों लिया गया यह फैसला?
राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग की एडवाइजरी के बाद राजस्थान राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने इस संबंध में 1 अक्टूबर 2026 को पत्र जारी किया था। हमारी टीम को मिली जानकारी के अनुसार, यह निर्णय फिट इंडिया मूवमेंट और राष्ट्रीय पोषण माह के लक्ष्यों को प्राप्त करने की दिशा में एक अहम कदम है।
शिक्षक और अभिभावक ध्यान दें
विभाग ने स्पष्ट किया है कि शिक्षक केवल बोर्ड नहीं लगाएंगे, बल्कि वे नियमित अंतराल पर छात्रों को इन चीजों से होने वाले स्वास्थ्य जोखिमों के बारे में भी समझाएंगे। इसका उद्देश्य बच्चों में मोटापे, मधुमेह और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं को जड़ से खत्म करना है।
विभाग के निर्देश
- सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को अविलंब अपने क्षेत्र के विद्यालयों में शुगर बोर्ड सुनिश्चित करने को कहा गया है।
- यह केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि छात्रों की दिनचर्या में स्वस्थ बदलाव लाने का एक माध्यम होगा।
- शाला दर्पण के माध्यम से भी विद्यालयों को नियमित अपडेट देने के निर्देश दिए जा सकते हैं।
अभिभावकों से भी अपील की गई है कि वे बच्चों के टिफिन में जंक फूड के बजाय घर का बना पौष्टिक आहार रखने को प्राथमिकता दें।
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Written & Verified By
नागौर के युवा पत्रकार और डिजिटल मीडिया विशेषज्ञ। अभिषेक जी को ग्रामीण विकास और स्थानीय समस्याओं के सटीक विश्लेषण का गहरा अनुभव है।


