
आरएएस 2013: हाईकोर्ट ने उत्तरपुस्तिका दोबारा जांचने के दिए आदेश
Posted on 24 अक्टूबर 2026
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राजस्थान हाईकोर्ट की जयपुर पीठ ने आरएएस मुख्य परीक्षा-2013 के एक अभ्यर्थी को बड़ी राहत देते हुए उसकी उत्तरपुस्तिका की दोबारा जांच कराने का आदेश दिया है। करीब नौ साल से चल रही इस कानूनी लड़ाई में यह फैसला अभ्यर्थी के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
न्यायालयीन आदेश का विवरण
यह आदेश राजस्थान हाईकोर्ट की जयपुर पीठ में न्यायाधीश गणेश राम मीणा ने एसबी सिविल रिट याचिका संख्या 21387/2017 पर 9 अक्टूबर 2026 को सुनाया। याचिकाकर्ता आरएएस मुख्य परीक्षा-2013 के एक अभ्यर्थी ने अपनी उत्तरपुस्तिका के मूल्यांकन पर सवाल उठाते हुए इसे न्यायालय में चुनौती दी थी।
मामले की पृष्ठभूमि
our नागौर संवाददाता के अनुसार, आरएएस मुख्य परीक्षा-2013 में शामिल हुए एक अभ्यर्थी को परीक्षा में कुल 449 अंक प्राप्त हुए थे और 14 सितंबर 2017 को उसे कराधान विभाग आवंटित किया गया था। हालांकि, जब अभ्यर्थी ने सूचना के अधिकार के तहत अपनी उत्तरपुस्तिका प्राप्त की, तो उसमें कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए।
उत्तरपुस्तिका में पाई गई खामियां
- उत्तरपुस्तिका के सामान्य हिंदी एवं सामान्य अंग्रेजी (पेपर-4) में कुछ उत्तरों को शून्य अंक दिए गए थे।
- विशेष रूप से, प्रश्न संख्या 6(iv) से 8(v) तक के उत्तरों पर लगातार शून्य अंक दर्ज किए गए थे।
- न्यायालय ने इस पहलू पर ध्यान दिया कि लगातार शून्य अंक दिए जाने और संबंधित उत्तरों पर कोई क्रॉस का निशान नहीं होने से तकनीकी त्रुटि की आशंका प्रबल होती है।
अदालत का निर्देश और संभावित परिणाम
इन तकनीकी खामियों को ध्यान में रखते हुए, अदालत ने संबंधित उत्तरों की एक स्वतंत्र परीक्षक द्वारा दोबारा जांच कराने का निर्देश दिया है। इस पुनः मूल्यांकन के बाद प्राप्त अंकों के आधार पर अभ्यर्थी की मेरिट सूची को संशोधित किया जाएगा। यदि संशोधित मेरिट के आधार पर अभ्यर्थी किसी दूसरी सेवा के आवंटन के लिए पात्र पाया जाता है, तो उसे नियमानुसार सेवा आवंटित की जाएगी। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया है कि इस प्रक्रिया से पूर्व में चयनित अन्य अभ्यर्थियों के आवंटन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।
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Written & Verified By
नागौर के युवा पत्रकार और डिजिटल मीडिया विशेषज्ञ। अभिषेक जी को ग्रामीण विकास और स्थानीय समस्याओं के सटीक विश्लेषण का गहरा अनुभव है।


