
मूंडवा: सरपंच चुनाव हारीं चिड़ी देवी को ग्रामीणों ने दिए 25 लाख, भाईचारे की मिसाल
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हमारे मूंडवा संवाददाता के अनुसार, नागौर जिले की मुंडवा पंचायत समिति के तहत आने वाली भदौरा ग्राम पंचायत के राजस्व गांव मोड़ी ने आपसी सौहार्द और भाईचारे की एक अनूठी मिसाल पेश की है। सरपंच चुनाव में हार का सामना करने वाली चिड़ी देवी के परिवार के साथ गांव के लोगों ने एकजुटता दिखाते हुए 25 लाख रुपए की आर्थिक सहायता जुटाई है। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब अक्सर चुनावी हार-जीत के बाद रिश्तों में दूरियां आ जाती हैं, लेकिन मोड़ी गांव ने एक मिसाल कायम की है।
ग्रामीणों ने चुना था अपना प्रत्याशी
मोड़ी गांव में 36 कौम के ग्रामीणों ने मिलकर एक साधारण और गरीब परिवार से आने वाले हेमाराम राव की पत्नी चिड़ी देवी को सरपंच पद के लिए अपना प्रत्याशी बनाया था। पूरे गांव ने एकजुट होकर उनके समर्थन में प्रचार किया और मतदान भी किया। ग्रामीणों का मानना था कि एक गरीब परिवार को चुनाव लड़ने का अवसर मिलना चाहिए और इसमें पूरा गांव उनका सहयोग करेगा। हालांकि, चुनाव परिणाम चिड़ी देवी के पक्ष में नहीं रहा और उन्हें हार का सामना करना पड़ा।
हार के बाद भी नहीं छोड़ा साथ
चुनाव में हार के बाद, ग्रामीणों ने चिड़ी देवी के परिवार से दूरी बनाने के बजाय उनके साथ मजबूती से खड़े रहने का फैसला किया। गांव में एक विशेष सभा का आयोजन किया गया, जिसमें सभी ने आपसी सहयोग से चंदा जुटाने का निर्णय लिया। ग्रामीणों का स्पष्ट मानना था कि एक गरीब परिवार पर चुनाव प्रचार और अन्य व्यवस्थाओं का आर्थिक बोझ नहीं पड़ना चाहिए।
- ग्रामीणों ने एकजुटता दिखाते हुए 25 लाख रुपए की राशि एकत्रित की।
- यह राशि चिड़ी देवी के पति हेमाराम राव को भेंट की गई।
- इस सहयोग और अपनत्व से हेमाराम राव भावुक हो गए, जिससे गांव में एक भावनात्मक माहौल बन गया।
"पद नहीं, पूरे गांव का साथ ही सबसे बड़ी पूंजी"
हेमाराम राव ने ग्रामीणों के इस स्नेहिल भाव पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, "सरपंच नहीं बन पाने का मलाल मन में था, लेकिन गांव के लोगों ने इस पल को गर्व और खुशी में बदल दिया। पद मिले या नहीं, पूरे गांव का साथ और अपनापन ही जीवन की सबसे बड़ी पूंजी है।" उनके ये शब्द ग्रामीणों के निस्वार्थ भाव और सामुदायिक एकजुटता की भावना को दर्शाते हैं। यह सिर्फ एक वित्तीय सहायता नहीं, बल्कि एक समुदाय द्वारा अपने सदस्यों के प्रति दिखाई गई अटूट प्रतिबद्धता और सम्मान का प्रतीक है।
नवनिर्वाचित वार्ड पंचों का सम्मान
इस अवसर पर ग्रामीणों ने केवल हारी हुई प्रत्याशी को ही नहीं, बल्कि नवनिर्वाचित वार्ड पंचों का भी सम्मान किया। वार्ड नंबर 5 से सहदेवराम गोलिया और वार्ड नंबर 6 से जगराम गोलिया को साफा पहनाकर सम्मानित किया गया। इस कार्यक्रम में गांव के विभिन्न समाजों और वर्गों के लोग बड़ी संख्या में मौजूद रहे, जो मोड़ी गांव की समावेशी संस्कृति और आपसी सम्मान को प्रदर्शित करता है। यह घटना दर्शाती है कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया में जीत-हार से कहीं बढ़कर सामुदायिक सौहार्द और आपसी भाईचारा मायने रखता है।
मोड़ी गांव ने पूरे नागौर जिले के लिए एक प्रेरक उदाहरण प्रस्तुत किया है कि कैसे चुनावी प्रतिद्वंद्विता के बाद भी समाज में एकता और सहयोग की भावना को बनाए रखा जा सकता है। यह घटना नागौर जिले में ग्रामीण समाज की मजबूती और आपसी संबंधों की गहराई को उजागर करती है। ग्रामीण भारत में जहां चुनावी राजनीति अक्सर दरारें पैदा करती है, वहीं मोड़ी गांव ने यह सिद्ध कर दिया कि सामूहिक कल्याण और मानवीय मूल्यों का स्थान किसी भी राजनीतिक पद से ऊपर होता है। हमारी टीम इस प्रकार के सकारात्मक सामाजिक प्रयासों की सराहना करती है और आशा करती है कि अन्य ग्राम पंचायतें भी मोड़ी गांव से प्रेरणा लेंगी।
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Written & Verified By
नागौर के युवा पत्रकार और डिजिटल मीडिया विशेषज्ञ। अभिषेक जी को ग्रामीण विकास और स्थानीय समस्याओं के सटीक विश्लेषण का गहरा अनुभव है।